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गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन: तीन महीने में निर्माण पूरा करने की चुनौती
Fri, 03 Jan 2020 10:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 10:37 AM IST
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छह किमी फोरलेन का निर्माण
- फोटो : file
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गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन का निर्माण मार्च तक पूरा करने को कहा गया है। सड़क में अतिरिक्त कार्य बढ़ने के कारण इसका 183 करोड़ का बजट बढ़कर 408 करोड़ का हो गया है। इसके अलावा जो नाला बन रहा है उसमें भी नये सिरे से संशोधन करने को कहा जा रहा है। हालांकि कहा जा रहा है कि नाले में बहुत अधिक फेरबदल करना संभव नहीं है।
गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन 2016 में स्वीकृत हुआ था। इसे 2018 में पूरा होना था। 19.4 किलोमीटर लंबे फोरलेन की शुरुआती लागत 183 करोड़ थी। असुरन से फर्टिलाइजर मोड़ तक लगभग सात किलोमीटर तक दोनों तरफ नाले के निर्माण के अलावा सर्विस लेन, अंडर ग्राउंड केबल , जलकल की पाइपलाइन सहित अन्य अतिरिक्त कार्यों के साथ जिनकी जमीन व मकान पड़ रहा है उसका मुआवजा देने के कारण लागत बढ़कर 408 करोड़ हो गई।
लोक निर्माण विभाग द्वारा बनवाए जा रहे नाले को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विभाग के मुताबिक नाले के नजदीक जिन घरों की नालियां थीं, पाइप डालकर नाले में उनका पानी गिराया जा रहा है। इससे जलभराव की स्थिति है। निर्माणाधीन नाले की ऊंचाई पर सवाल उठाया जा रहा है कि कॉलोनियों का पानी उसमें नहीं जा पाएगा।
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बताते हैं कि जो भी कॉलोनी बसी हैं वह जीडीए की नहीं हैं। समय-समय पर जमीन लेकर लोग घर बनाते गए और उनके हिसाब से नाली बनती गई। लो लैंड एरिया होने के कारण पहले भी पानी निकासी के लिए बरसात में पंप लगाया जाता था। वैसे नगर निगम और लोक निर्माण विभाग तकनीकी जांच कर रहे हैं। जो बात आ रही है उसमें मामूली परिवर्तन तो संभव है पर अधिक की गुंजाइश नहीं है।
सड़क की जो डीपीआर बनी है वह पूरी तरह से नाप-जोख कर बनाई गई है। नाले को लेकर जो आपत्ति है उसे नगर निगम और विभाग के अभियंता देख रहे हैं। जो संभव होगा उसे ठीक किया जाएगा। - प्रवीण कुमार, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड
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गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन 2016 में स्वीकृत हुआ था। इसे 2018 में पूरा होना था। 19.4 किलोमीटर लंबे फोरलेन की शुरुआती लागत 183 करोड़ थी। असुरन से फर्टिलाइजर मोड़ तक लगभग सात किलोमीटर तक दोनों तरफ नाले के निर्माण के अलावा सर्विस लेन, अंडर ग्राउंड केबल , जलकल की पाइपलाइन सहित अन्य अतिरिक्त कार्यों के साथ जिनकी जमीन व मकान पड़ रहा है उसका मुआवजा देने के कारण लागत बढ़कर 408 करोड़ हो गई।
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लोक निर्माण विभाग द्वारा बनवाए जा रहे नाले को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विभाग के मुताबिक नाले के नजदीक जिन घरों की नालियां थीं, पाइप डालकर नाले में उनका पानी गिराया जा रहा है। इससे जलभराव की स्थिति है। निर्माणाधीन नाले की ऊंचाई पर सवाल उठाया जा रहा है कि कॉलोनियों का पानी उसमें नहीं जा पाएगा।
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बताते हैं कि जो भी कॉलोनी बसी हैं वह जीडीए की नहीं हैं। समय-समय पर जमीन लेकर लोग घर बनाते गए और उनके हिसाब से नाली बनती गई। लो लैंड एरिया होने के कारण पहले भी पानी निकासी के लिए बरसात में पंप लगाया जाता था। वैसे नगर निगम और लोक निर्माण विभाग तकनीकी जांच कर रहे हैं। जो बात आ रही है उसमें मामूली परिवर्तन तो संभव है पर अधिक की गुंजाइश नहीं है।
सड़क की जो डीपीआर बनी है वह पूरी तरह से नाप-जोख कर बनाई गई है। नाले को लेकर जो आपत्ति है उसे नगर निगम और विभाग के अभियंता देख रहे हैं। जो संभव होगा उसे ठीक किया जाएगा। - प्रवीण कुमार, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड