{"_id":"65cdaf595ecb163db902b989","slug":"gorakhpur-is-changing-if-the-hospitals-in-the-streets-come-to-medicity-then-things-will-be-resolved-2024-02-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बदल रहा गोरखपुर: गली-मुहल्लों के अस्पताल मेडिसिटी में आएं तो बात बन जाए, इन झंझटों से भी मिलेगा निजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदल रहा गोरखपुर: गली-मुहल्लों के अस्पताल मेडिसिटी में आएं तो बात बन जाए, इन झंझटों से भी मिलेगा निजात
Thu, 15 Feb 2024 12:00 PM IST
रोहित सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: रोहित सिंह
Updated Thu, 15 Feb 2024 12:00 PM IST
सार
बदलते गोरखपुर में शहर में जाम से निजात दिलाना एक बड़ी चुनौती है। शहर के गले मोहल्ले और चौराहों पर खुले अस्पताल और नर्सिंग होम की वजह से जाम बड़ी समस्या बनी हई है। जीडीए ने इन झंझटों से छुटकारा दिलाने के लिए मेडिसिटी योजना लांच की है। यशोदा हॉस्पिटल समूह ने भूखंड भी देख लिया है। इस समूह की दो एकड़ में 200 करोड़ निवेश कर कैंसर अस्पताल बनाने की योजना है।
विज्ञापन
यही से शुरुआत होगा खोराबार टाउनशिप व मेडिसिटी का।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरक्षनगरी की तस्वीर बदल रही है। विकास के पथ पर अग्रसर शहर में जीडीए अब खोराबार आवासीय योजना के साथ मेडिसिटी भी विकसित कर रहा है। लेकिन, शहर में बहुत सारे अस्पताल और नर्सिंग होम गली-मुहल्लों में संचालित हो रहे हैं। अस्पतालों के सामने गाड़ियां खड़ी हो जाती हैं। हर रोज लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है। एक किलोमीटर की दूरी तय करने में आधे घंटे से ज्यादा भी लग जाता है। अगर ऐसे अस्पताल मेडिसिटी में शिफ्ट हो जाएं तो शहर के गली-मोहल्लों में जाम नहीं लगेगा। बस इसके लिए सभी को सोच बदलनी होगी, फिर हर किसी को आराम होगा।
छात्र संघ चौराहा से बेतियाहाता चौक तक करीब डेढ़ किलोमीटर में दो दर्जन से अधिक हॉस्पिटल और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इसी के बराबर डाइग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल स्टोर की दुकान खुली होने से यह पूरा एरिया मेडिकल का हब बन गया है। इस मार्ग पर पार्किेग का स्थान नहीं होने से सड़क के किनारे तक वाहन खड़ा कर लोग उपचार कराने के लिए मजबूर हैं। बुधवार को दोपहर एक बजे छात्र संघ चौराहा से बेतियाहाता की तरफ जाने पर चौराहे से आगे ही सड़क के किनारे तक कतार में चार पहिया वाहन खड़े थे। इसके चलते जाम की स्थिति बनी रही। आसपास स्थित करीब तीन से चार हॉस्पिटल हैं। किसी में पार्किंग की सुविधा नहीं है।
माता को लेकर आए रुस्तमपुर के सुशील पांडेय का कहना था कि अगर अस्पताल नहीं आना रहता तो इस रूट पर आते ही नहीं। इसी तरह शिक्षक रमेंद्र प्रताप चंद का कहना था कि अस्पताल को योजनाबद्ध तरीके से मेडिसिटी में शिफ्ट करा दिया जाए तो आम लोगों को बहुत राहत होगी। वहीं, अस्पताल संचालकों को भी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। यहां से आगे बढ़ने पर फिराक चौराहा तक यही स्थिति देखने को मिली। कहीं गाड़ियां तो कहीं फल लादे ठेले लगे थे। जाम के चलते वाहन रेंगते हुए निकल रहे थे। सड़क के दोनों तरफ जहां खाली जगह मिली लोगों ने अपना कार या बाइक खड़ा कर ली थी।
विज्ञापन
यशोदा हॉस्पिटल समूह सहित कई संस्थानों ने देखा भूखंड
अब कई बड़े समूहों ने मेडिसिटी में अस्पताल खोलने की योजना बनाई है। यशोदा हॉस्पिटल समूह ने भूखंड भी देख लिया है। इस समूह की दो एकड़ में 200 करोड़ निवेश कर कैंसर अस्पताल बनाने की योजना है। इसके अलावा कई अन्य बड़े संस्थान भी मन बना रहे हैं। खोराबार मेडिसिटी में आवासीय क्लीनिक लेन के लिए 51 भूखंड, छोटे व मध्यम आकार के हॉस्पिटल के लिए 47 भूखंड हैं।
जबकि, बड़े हॉस्पिटल के लिए 7 भूखंड, डायग्नोस्टिक लैब के लिए 12, स्कूल कम्युनिटी सेंटर के लिए 6 भूखंड भी जीडीए ने आरक्षित कर रखा है। इसके अलावा राप्तीनगर विस्तार एवं स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में भी मेडिसिटी के लिए अलग से भूखंड चिन्हित किया गया है। जिसके लिए 22 फरवरी तक आवेदन करने का मौका है। शहर के कई हॉस्पिटल संचालकों ने आवेदन भी कर रखा है।
दीवानी कचहरी के अधिवक्ता धनंजय तिवारी कहते हैं कि जितने भी बड़े हॉस्पिटल हैं उन्हें अब शहर के बाहर खोलने पर जोर देना चाहिए। इससे शहर में होने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है। इसे लेकर अफसर और अस्पताल संचालक संवाद करें और रास्ता निकालें। पहले जब भीड़ कम थी तब तो कोई दिक्कत नहीं होती थी। लेकिन, आज तो हर घर में गाड़ी है। बहुत सारे लोग बाहर से मरीज लेकर आते हैं। योजनाबद्ध तरीके से अब इसका हल निकालने की जरूरत है।
जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने बताया कि खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी में बड़े व छोटे हॉस्पिटल के अलावा अन्य संस्थान के लिए भूखंड उपलब्ध है। शहर के अलावा बाहरी के कई संस्थानों ने भूखंड देखा है। इसके अलावा राप्तीनगर विस्तार एवं स्पोर्ट्स सिटी में भी हॉस्पिटल के लिए अलग से भूखंड चिन्हित किया गया है।
विज्ञापन
छात्र संघ चौराहा से बेतियाहाता चौक तक करीब डेढ़ किलोमीटर में दो दर्जन से अधिक हॉस्पिटल और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इसी के बराबर डाइग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल स्टोर की दुकान खुली होने से यह पूरा एरिया मेडिकल का हब बन गया है। इस मार्ग पर पार्किेग का स्थान नहीं होने से सड़क के किनारे तक वाहन खड़ा कर लोग उपचार कराने के लिए मजबूर हैं। बुधवार को दोपहर एक बजे छात्र संघ चौराहा से बेतियाहाता की तरफ जाने पर चौराहे से आगे ही सड़क के किनारे तक कतार में चार पहिया वाहन खड़े थे। इसके चलते जाम की स्थिति बनी रही। आसपास स्थित करीब तीन से चार हॉस्पिटल हैं। किसी में पार्किंग की सुविधा नहीं है।
विज्ञापन
माता को लेकर आए रुस्तमपुर के सुशील पांडेय का कहना था कि अगर अस्पताल नहीं आना रहता तो इस रूट पर आते ही नहीं। इसी तरह शिक्षक रमेंद्र प्रताप चंद का कहना था कि अस्पताल को योजनाबद्ध तरीके से मेडिसिटी में शिफ्ट करा दिया जाए तो आम लोगों को बहुत राहत होगी। वहीं, अस्पताल संचालकों को भी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। यहां से आगे बढ़ने पर फिराक चौराहा तक यही स्थिति देखने को मिली। कहीं गाड़ियां तो कहीं फल लादे ठेले लगे थे। जाम के चलते वाहन रेंगते हुए निकल रहे थे। सड़क के दोनों तरफ जहां खाली जगह मिली लोगों ने अपना कार या बाइक खड़ा कर ली थी।
विज्ञापन
यशोदा हॉस्पिटल समूह सहित कई संस्थानों ने देखा भूखंड
अब कई बड़े समूहों ने मेडिसिटी में अस्पताल खोलने की योजना बनाई है। यशोदा हॉस्पिटल समूह ने भूखंड भी देख लिया है। इस समूह की दो एकड़ में 200 करोड़ निवेश कर कैंसर अस्पताल बनाने की योजना है। इसके अलावा कई अन्य बड़े संस्थान भी मन बना रहे हैं। खोराबार मेडिसिटी में आवासीय क्लीनिक लेन के लिए 51 भूखंड, छोटे व मध्यम आकार के हॉस्पिटल के लिए 47 भूखंड हैं।
जबकि, बड़े हॉस्पिटल के लिए 7 भूखंड, डायग्नोस्टिक लैब के लिए 12, स्कूल कम्युनिटी सेंटर के लिए 6 भूखंड भी जीडीए ने आरक्षित कर रखा है। इसके अलावा राप्तीनगर विस्तार एवं स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में भी मेडिसिटी के लिए अलग से भूखंड चिन्हित किया गया है। जिसके लिए 22 फरवरी तक आवेदन करने का मौका है। शहर के कई हॉस्पिटल संचालकों ने आवेदन भी कर रखा है।
दीवानी कचहरी के अधिवक्ता धनंजय तिवारी कहते हैं कि जितने भी बड़े हॉस्पिटल हैं उन्हें अब शहर के बाहर खोलने पर जोर देना चाहिए। इससे शहर में होने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है। इसे लेकर अफसर और अस्पताल संचालक संवाद करें और रास्ता निकालें। पहले जब भीड़ कम थी तब तो कोई दिक्कत नहीं होती थी। लेकिन, आज तो हर घर में गाड़ी है। बहुत सारे लोग बाहर से मरीज लेकर आते हैं। योजनाबद्ध तरीके से अब इसका हल निकालने की जरूरत है।
जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने बताया कि खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी में बड़े व छोटे हॉस्पिटल के अलावा अन्य संस्थान के लिए भूखंड उपलब्ध है। शहर के अलावा बाहरी के कई संस्थानों ने भूखंड देखा है। इसके अलावा राप्तीनगर विस्तार एवं स्पोर्ट्स सिटी में भी हॉस्पिटल के लिए अलग से भूखंड चिन्हित किया गया है।