ग्रीनलैंड अस्पताल मामला: टीका लगने के 12वें दिन तीसरे मासूम ने भी दम तोड़ा, दो बच्चे की पहले ही हो चुके है मौत
ग्रीनलैंड अस्पताल में पांच मार्च को तीन नवजातों को नियमित टीका के तहत बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी और ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) लगाई गई थी। टीका लगने के बाद से तीनों बच्चों की हालत खराब हो गई। इसमें से गगहा के सौरभ राय का बेटे का छह मार्च और दूसरे बशारतपुर निवासी निशांत चार्ल्स के मासूम की 12 मार्च को मौत हो गई।
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गोरखपुर करीम नगर स्थित ग्रीनलैंड हॉस्पिटल में पांच मार्च को जिन तीन बच्चों को वैक्सीन लगाई गई थी, उसमें तीसरे नवजात की भी मौत शुक्रवार को 12 दिन बाद हो गई। उसका इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। मौत की सूचना पर पुलिस हरकत में आई और शव को कब्जे में ले लिया। शनिवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
इस मामले में एक बार फिर नवजात के परिजनों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर गुप्ता पर लापरवाही बरतने और अस्पताल प्रशासन पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है।
राप्तीनगर फेज-चार के रहने वाले विनीत सिंह की पत्नी का प्रसव ग्रीनलैंड हॉस्पिटल में चार मार्च को हुआ था। अगले दिन नवजात को दो अन्य बच्चों के साथ ओरल पोलियो वैक्सीन, बीसीजी और हेपेटाइटिस का टीका लगाया गया।
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टीका लगने के बाद नवजात की स्थिति बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। बताया जा रहा है कि उसी समय उसके शरीर का रंग नीला पड़ गया था। परिजन इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में भर्ती कराए, जहां पांच मार्च से ही उसका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस बीच परिजनों ने शहर के कई निजी डॉक्टरों से भी इलाज की सलाह ली, लेकिन इसके बाद भी वह बच नहीं सका। शुक्रवार की शाम बीआरडी प्रशासन ने मासूम को मृत घोषित कर दिया। बीआरडी प्रशासन के साथ ही परिजनों ने भी इसकी सूचना पुलिस को दी।
यह है मामला
ग्रीनलैंड अस्पताल में पांच मार्च को तीन नवजातों को नियमित टीका के तहत बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी और ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) लगाई गई थी। टीका लगने के बाद से तीनों बच्चों की हालत खराब हो गई। इसमें से गगहा के सौरभ राय का बेटे का छह मार्च और दूसरे बशारतपुर निवासी निशांत चार्ल्स के मासूम की 12 मार्च को मौत हो गई। जबकि, तीसरा मासूम मेडिकल कॉलेज में भर्ती था, जहां शुक्रवार को उसकी मौत हुई है।
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अस्पताल हो चुका है सील, डॉक्टर पर दर्ज है मुकदमा
इस मामले में पहला मुकदमा सौरभ राय की तहरीर पर डॉ. सुधीर गुप्ता के खिलाफ चिलुआताल थाने में दर्ज हो चुका है। साथ ही 12 मार्च को दूसरे बच्चे की मौत के बाद ग्रीन लैंड हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की मौजूदगी में सील कर दिया गया है। मामले में पांच सदस्यीय कमेटी जांच भी कर रही है।
जांच के लिए हिमाचल के कसौली भेजा गया वैक्सीन का सैंपल
दोनों नवजातों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ड्रग इंस्पेक्टर के सहयोग से तीनों वैक्सीन की जांच के लिए सैंपल लेकर हिमाचल के कसौली भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक सप्ताह बाद रिपोर्ट आ सकती है। इसके बाद ही वैक्सीन के सही और गलत होने की जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल पुलिस भी वैक्सीन के जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसकी वजह से उसकी जांच भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
कड़ी कार्रवाई हो तभी मिलेगी कलेजे को ठंडक
तीनों नवजात की मौत के बाद अब तक हुई कार्रवाई से परिजन संतुष्ट नहीं है। परिजनों का कहना है कि जब तक कड़ी कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक कलेजे को ठंडक नहीं पहुंचेगी। सौरभ राय की पत्नी मधु राय ने बताया कि पिछले साल शादी हुई थी। पहला बच्चा था, पूरा परिवार खुश था। अचानक एक गलत इंजेक्शन की खुराक ने पल भर में पूरी खुशियों को काफूर कर दिया। जब तक डॉक्टर के प्रैक्टिस से लेकर कानूनी कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक कलेजे को सुकून नहीं मिलेगा। इसके लिए हर लड़ाई लड़ी जाएगी।
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18 घंटे रूबी रही खुश, 12 दिन बाद मासूम की हुई मौत
राप्तीनगर फेज चार में रहने वाले विनीत कुमार सिंह महराजगंज कलेक्ट्रेट में तैनात हैं। दो साल पहले उनकी शादी रूबी सिंह से हुई। रूबी जब मां बनी तो पूरे घर में खुशियां ही खुशियां थीं। चार मार्च को बेटे को जन्म दी तो घर का माहौल खुशनुमा हो गया। पहला बच्चा होने पर दपंती ने आसपास और रिश्तेदारों को मिठाई भी खिलाई। लेनिक, परिवार की यह खुशी केवल 18 घंटे ही रही।
अगले दिन नवजात को वैक्सीन लगी और परिवार की खुशियों पर दाग लग गया। 12 दिनों तक परिजन बीआरडी के नियोनेटल वार्ड के बाहर केवल इस बात का इंतजार करते रहे कि डॉक्टर नवजात के ठीक होने की बात कहेंगे, लेकिन यह दिन उनके जीवन में अब नहीं आएगा। आखिरकार डॉक्टरों ने 12 दिन बाद यह कह दिया कि अब बच्चा नहीं रहा। इसके बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दो भाइयों के बीच इकलौता था नवजात
शाहपुर के रहने वाले शिशांत चार्ल्स और भाई आशीष चार्ल्स के परिवारों का इकलौती खुशी छिन गई। आशीष और उसकी पत्नी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स हैं। आशीष के कहने पर शिशांत ने पत्नी का प्रसव ग्रीनलैंड हॉस्पिटल में कराया था। पांच मार्च की सुबह पत्नी ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। परिवार की खुशियां चंद घंटे में ही मातम में बदल गई। अस्पताल में बच्चे को टीका लगाते ही स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद नवजात को बीआरडी में भर्ती कराया गया, जहां पर 12 मार्च को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।