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नेपाल की तराई में भी होगा एफएम का गुणगान, अब नहीं सुनाई देगा 'ये आकाशवाणी का गोरखपुर केंद्र है'
Sat, 21 Nov 2020 07:56 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 21 Nov 2020 07:56 PM IST
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गोरखपुर आकाशवाणी। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर आकाशवाणी के मीडिया वेब ट्रांसमीटर को बंद करने के बीच प्रसार भारती ने गोरखपुर एफएम का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया है। गोरखपुर एफएम का गुणगान अब नेपाल के तराई में भी होगी। नेपाई के तराई जिलों में गोरखपुर एफएम की गूंज लोग सुन सकेंगे। इसके लिए देवरिया और सिद्धार्थनगर में 100-100 वाट और महराजगंज में 10 किलोवाट का एफएम लगाया जाएगा। इसकी मॉनिटरिंग गोरखपुर आकाशवाणी करेगी।
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प्रसार भारती का मानना है कि आकाशवाणी गोरखपुर का भटहट स्थित हाइपावर 100 मीटर के ट्रांसमीटर केंद्र को अब कोई सुनने वाला नहीं है। इसके मशीन भी 40 साल पुराने हो गए हैं। देशभर में जितने भी इस तरह के ट्रांसमीटर हैं, उसे बंद करने का फैसला भी सरकार कर चुकी है। क्योंकि इससे सरकार को नुकसान हो रहा था।
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गोरखपुर के साथ-साथ जालंधर (पंजाब) में भी शनिवार को 100 मीटर के ट्रांसमीटर बंद किए गए हैं। आकाशवाणी गोरखपुर के केंद्राध्यक्ष राहुल सिंह ने बताया कि महानिदेशालय का पत्र मिलने के बाद शनिवार को भटहट स्थित ट्रांसमीटर बंद कर दिया गया है। आकाशवाणी का संचालन नहीं बंद किया गया है। प्रसार भारती की ओर से एफएम चलता रहेगा।
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नेपाल तक पहुंचेगा एफएम
बताया कि देवरिया और सिद्धार्थनगर में 100-100 वाट का एफएम और महरागंज में 10 किलोवाट का एफएफ लगाया जा रहा है। देवरिया और सिद्धार्थनगर में 80 प्रतिशत काम भी पूरे हो चुके हैं। महराजगंज में बिल्डिंग का काम पूरा हो चुका है। जल्द ही मशीनें भी लगनी शुरू हो जाएंगी।
महराजगंज में लगने वाला 10 किलोवाट एफएम की फ्रिक्वेंसी की पहुंच नेपाल के तराई तक होगी। नेपाल में बैठे लोग भी एफएम आसानी से सुन सकेंगे। गोरखपुर में लगा एफएम भी 10 किलोवाट का है। इसकी फ्रिक्वेंसी भी 60 से 70 किलोमीटर तक है। इसमें अगर टॉवर की ऊंचाई बढा दी जाए इसकी क्षमता में और विस्तार हो जाएगा।
महराजगंज में लगने वाला 10 किलोवाट एफएम की फ्रिक्वेंसी की पहुंच नेपाल के तराई तक होगी। नेपाल में बैठे लोग भी एफएम आसानी से सुन सकेंगे। गोरखपुर में लगा एफएम भी 10 किलोवाट का है। इसकी फ्रिक्वेंसी भी 60 से 70 किलोमीटर तक है। इसमें अगर टॉवर की ऊंचाई बढा दी जाए इसकी क्षमता में और विस्तार हो जाएगा।