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गोरखपुर वासियों को लॉकडाउन का मिला ये खास फायदा, बदल गई शहर की सूरत
Fri, 01 May 2020 08:03 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 01 May 2020 08:03 PM IST
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Ramgarh taal
- फोटो : राजेश कुमार
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लॉकडाउन की वजह से गोरखपुर का वातावरण संतोषजनक हो गया है। आंकडों पर जाएं तो लॉकडाउन के पहले और बाद की तुलना में वायु प्रदूषण तकरीबन आधा हो गया है।
Ramgarh taal
- फोटो : राजेश कुमार
एमएमएमयूटी के शोधार्थी नहीं कर रहे हैं डाटा कलेक्शन
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से विश्वविद्यालय बंद है। इस वजह से फिलहाल प्रदूषण संबंधी डाटा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। लॉकडाउन के खत्म होने के बाद इसकी शुरुआत होगी। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय में भी लॉकडाउन की वजह से जरूरत भर के ही कर्मचारी और अधिकारी आ रहे हैं।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से विश्वविद्यालय बंद है। इस वजह से फिलहाल प्रदूषण संबंधी डाटा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। लॉकडाउन के खत्म होने के बाद इसकी शुरुआत होगी। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय में भी लॉकडाउन की वजह से जरूरत भर के ही कर्मचारी और अधिकारी आ रहे हैं।
शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय व डॉ. वीएन अग्रवाल।
- फोटो : अमर उजाला।
एक्सपर्ट की राय
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय ने बताया कि औद्योगिक गतिविधियां बंद हैं। वायु प्रदूषण वाले तत्व पैदा नहीं हो रहे हैं। सड़कों पर आवाजाही कम है। सीमित संख्या में ही वाहन चल रहे हैं। ऐसे में बहुत ही कम प्रदूषण उत्सर्जन हो रहा है। निर्माण कार्य बंद होने से भी प्रदूषण का मानक ठीक हुआ है। लकड़ी और ईंधन का इस्तेमाल भी सीमित है। इन सब वजहों से वायु प्रदूषण बहुत कम हो सका है।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण का प्रभाव श्वसन तंत्र पर पड़ता है। एक्यूआई बेहतर होने से दमा और सीओपीडी वाले मरीजों को कम परेशानी होगी। ऐसा देखा भी जा रहा है। इस तरह की शिकायत वाले मरीजों की संख्या काफी कम हो गई है। ऐसे लोगों के फोन भी कम आ रहे हैं। निश्चित तौर पर यह वाहनों के कम चलने से हो रहा है, इसके अलावा बीच में कुछ दिन बारिश भी हुई है। इससे भी वायु की गुणवत्ता में सुधार आया है।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय ने बताया कि औद्योगिक गतिविधियां बंद हैं। वायु प्रदूषण वाले तत्व पैदा नहीं हो रहे हैं। सड़कों पर आवाजाही कम है। सीमित संख्या में ही वाहन चल रहे हैं। ऐसे में बहुत ही कम प्रदूषण उत्सर्जन हो रहा है। निर्माण कार्य बंद होने से भी प्रदूषण का मानक ठीक हुआ है। लकड़ी और ईंधन का इस्तेमाल भी सीमित है। इन सब वजहों से वायु प्रदूषण बहुत कम हो सका है।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण का प्रभाव श्वसन तंत्र पर पड़ता है। एक्यूआई बेहतर होने से दमा और सीओपीडी वाले मरीजों को कम परेशानी होगी। ऐसा देखा भी जा रहा है। इस तरह की शिकायत वाले मरीजों की संख्या काफी कम हो गई है। ऐसे लोगों के फोन भी कम आ रहे हैं। निश्चित तौर पर यह वाहनों के कम चलने से हो रहा है, इसके अलावा बीच में कुछ दिन बारिश भी हुई है। इससे भी वायु की गुणवत्ता में सुधार आया है।
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- फोटो : राजेश कुमार।
लॉकडाउन के पहले से आधा प्रदूषण स्तर
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि इनसैट (इंडियन सेटेलाइट) से मिले आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन लागू होने के बाद गोरखपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) संतोषजनक स्तर पर है।
हालांकि लॉकडाउन के दौरान आंधी, तेज हवाएं और गेहूं की कटान के दौरान कंबाइन का इस्तेमाल होने से दो-तीन दिन एक्यूआई कुछ खराब हुआ था, लेकिन अब यह फिर से बेहतर हो गया है। यह सब सड़कों पर वाहनों के कम होने की वजह से संभव हो पाया है। हवा को प्रदूषण करने वाले कारक काफी कम हो गए हैं।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि इनसैट (इंडियन सेटेलाइट) से मिले आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन लागू होने के बाद गोरखपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) संतोषजनक स्तर पर है।
हालांकि लॉकडाउन के दौरान आंधी, तेज हवाएं और गेहूं की कटान के दौरान कंबाइन का इस्तेमाल होने से दो-तीन दिन एक्यूआई कुछ खराब हुआ था, लेकिन अब यह फिर से बेहतर हो गया है। यह सब सड़कों पर वाहनों के कम होने की वजह से संभव हो पाया है। हवा को प्रदूषण करने वाले कारक काफी कम हो गए हैं।
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- फोटो : राजेश कुमार
लॉकडाउन के पहले
तारीख मात्रा (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर)
19 मार्च - 167
20 मार्च - 168
21 मार्च - 162
22 मार्च - 120 (जनता कर्फ्यू)
लॉकडाउन के बाद
19 अप्रैल - 95
20 अप्रैल - 93
21 अप्रैल - 108
22 अप्रैल - 85
तारीख मात्रा (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर)
19 मार्च - 167
20 मार्च - 168
21 मार्च - 162
22 मार्च - 120 (जनता कर्फ्यू)
लॉकडाउन के बाद
19 अप्रैल - 95
20 अप्रैल - 93
21 अप्रैल - 108
22 अप्रैल - 85