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Labour day: मजदूरों पर सबसे ज्यादा पड़ी है कोरोना की मार, दूसरों के रहमोकरम पर जी रहे अब जिंदगी

Fri, 01 May 2020 04:11 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 01 May 2020 04:11 PM IST
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Labour day 2020 special story from gorakhpur
labour day - फोटो : अमर उजाला।
आज मजदूर दिवस है, लेकिन हर बार से अलग। मजदूरों के हितों को लेकर इस बार न तो गोष्ठियां होंगी और न ही रैलियां निकाली जाएंगी। ज्यादातर फैक्ट्रियों में लॉकडाउन की वजह से ताले पड़े हैं। कोरोना की सबसे ज्यादा मार इन्हीं मजदूरों पर ही पड़ी है। खासकर दिहाड़ी और ठेके पर काम करने वाले मजदूरों पर, इनके घर के चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं।

 
Labour day 2020 special story from gorakhpur
भगवानपुर निवासी संजय। - फोटो : अमर उजाला।

सरकार की ओर से राशन सामग्री और एक हजार रुपये मिले हैं, लेकिन दूसरे जिलों से आए मजदूरों का इसका भी लाभ नहीं मिला, क्योंकि ज्यादातर अनियमित श्रमिक हैं और इनका पंजीयन भी श्रम विभाग में नहीं है। कुछ ऐसे ही मजदूरों से उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की गई तो उनका दर्द छलक उठा। बोले, गली-नुक्कड़ पर किराना की दुकानों से उधारी पर सामान भी मिलना बंद हो गया है। खाने का संकट है। कर्ज का बोझ चढ़ता जा रहा है। एनजीओ के लोगों के सहारे भोजन का इंतजाम हो रहा है। 

गांव से रुपये मंगाए तो खर्च चला
भगवानपुर निवासी संजय बताते हैं कि बहुत खराब स्थिति है। 19 मार्च के बाद से ही घर पर बैठे हैं। मुझे तो सरकारी मदद भी नहीं मिली है। गोंडा का रहने वाला हूं, यहां पार्षद के पास नाम, पता नोट करवाया, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं मिला। गांव से रुपये मंगाए थे तो घर का खर्च चल रहा है।

Labour day 2020 special story from gorakhpur
बरगदवां निवासी अजय मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
हमें तो कोई मदद नहीं मिली
बरगदवां निवासी अजय मिश्रा बताते हैं कि सरिया फैक्ट्री में काम करते हैं। नियमित नहीं होने के चलते हमें कोई मदद नहीं मिली। डीएम से भी मुलाकात की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जो रुपये थे उसी से खर्च चल रहा है। अगर लॉकडाउन और बढ़ा तो घर का  चूल्हा जलना मुश्किल हो जाएगा।
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Labour day 2020 special story from gorakhpur
बरगदवां निवासी दीपक यादव। - फोटो : अमर उजाला।
जो बचाकर रखे थे, वह भी खर्च हो गया
बरगदवां निवासी दीपक यादव बताते हैं कि किराए पर परिवार के साथ रहता हूं। फैक्ट्री बंद है तो कमाई भी नहीं हो रही है। थोड़ा बहुत बचाकर जो रखा था उसी से काम चल रहा है। सरकार से मुझे कोई मदद नहीं मिली है।
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Labour day 2020 special story from gorakhpur
विकासनगर निवासी अरुण चौबे। - फोटो : अमर उजाला।
कर्ज लेकर राशन लाया हूं
विकासनगर निवासी अरुण चौबे बताते हैं कि हम लोग किराए पर मकान लेकर रहते हैं, इसलिए राशन कार्ड भी नहीं है। सुना है सरकार ने श्रमिकों को राशन और नकद देकर मदद की है ,लेकिन हमें तो कुछ भी नहीं मिला। कर्ज लेकर घर का राशन लाया हूं। ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी।
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