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गोरखपुर बिजली निगम: हद है! बिना वीसीबी किट लगे ही फैक्ट्रियों में दे दिए बिजली कनेक्शन, अब बना रहे दोषी

Wed, 22 Sep 2021 12:50 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 22 Sep 2021 12:50 PM IST
सार

गीडा इलाके में बार- बार फाल्ट से होने वाली कटौती पर अभियंता उद्यमियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अभियंताओं का कहना है कि बिना वीसीबी के ही फैक्ट्रियां चल रही हैं। कनेक्शन कैसे दिया गया सवाल पर अधिकारी शांत हैं।

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Gorakhpur Electricity Corporation officials gave connections to entrepreneurs without checking safety kit
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में बिजली निगम के अधिकारियों ने बिना सुरक्षा किट की जांच किए ही उद्यमियों को कनेक्शन दे दिया है। अधिशासी अभियंता गीडा ने खुद अपनी जांच में स्वीकार किया कि फैक्ट्रियों में वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (वीसीबी) नहीं लगे हैं। एक फैक्ट्री में वीसीबी लगा था, जो खराब पाया गया। अब सवाल यह है कि उद्यमियों ने वीसीबी नहीं लगवाया था तो उनके फैक्ट्रियों में कनेक्शन कैसे दे दिए गए? इन सबके बाद जब गीड़ा में लगातार फाल्ट की वजह से बिजली आपूर्ति गुल हो रही है तो अभियंता इसके लिए उद्यमियों को ही जिम्मेदार बनाने में लगे हैं।
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अधीक्षण अभियंता ग्रामीण द्वितीय रमेश चंद्रा ने अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर एक दिन पहले अधिशासी अभियंता सोमदत्त शर्मा, उपखंड अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह के गीडा की फैक्ट्रियों का निरीक्षण करने और लगातार फाल्ट की सूचना से होने वाली कटौती की जानकारी लेने भेजा था। उन्होंने भी सात फैक्ट्रियों की जांच की थी। अधिशासी अभियंता की रिपोर्ट के मुताबिक एबीआर इंडस्ट्रीज में लगे प्रोटेक्शन सिस्टम वीसीबी की सीटी जली थी। इसके अलावा एबीआर इंडस्ट्रीज, अशोक उपाध्याय उद्योग, हाईटेक-750 उद्योग, आकाश जालान, शुद्ध प्लस, प्रियांजन उद्योग में वीसीबी नहीं लगी थी।
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अधीक्षण अभियंता से इस संबंध में पूछने पर कि बिना सुरक्षा मानकों की जांच किए आखिर हैवी लोड के कनेक्शनों को कैसे जारी कर दिया। क्या कनेक्शन देते वक्त अभियंताओं ने या बाद में रूटीन के तौर पर उन्होंने फैक्ट्रियों की जांच कर खामियां देखी और उद्यमियों को सलाह दी थी।
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उन्होंने खुद स्वीकार करते हुए कहा कि गलतियां दोनों ही तरफ से हैं। इसी की जांच के लिए टीम भेजी गई थी। सभी बिंदुओं पर जांच करवाई जा रही है। जल्दी ही गीडा के बिजली की समस्या को पूरी तरह से खत्म करने का प्रयास है। जबकि अधिशासी अभियंता सोमदत्त शर्मा ने बताया कि सभी को अपने यहां प्रोटेक्शन सिस्टम लगवाने के साथ लगे हुए फैक्ट्रियों में उसे ठीक रखाना चाहिए। फैक्ट्री के उपकरणों में फाल्ट होते ही बिजली ट्रिप कर जाएगी। उसका असर फीडर की आपूर्ति पर नहीं पड़ेगा। नहीं तो एक फैक्ट्री के फाल्ट से फिर फीडर का शटडाउन लेना पड़ता है। इसी से अन्य की बिजली भी गुल हो जाती है।

गीडा क्षेत्र के एसडीओ पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जांच के दौरान गीडा की 131 बड़ी फैक्ट्रियों में एचटी लाइन से बिजली आपूर्ति होती है। इन फैक्ट्रियों में से सिर्फ 6 में प्रोटेक्शन सिस्टम लगा है। अन्य फैक्ट्रिया फ्यूज लगाकर काम चलाया जा रहा।

 
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने बताया कि अगर टीपीएमओ (सुरक्षा किट) लगा देने से बिजली की ट्रिपिंग रुक जाएगी तो सभी उद्यमी इस उपकरण को लगाने के लिए तैयार हैं। क्या इसके बाद विभाग की जिम्मेदारी लेगा कि टीपीएमओ लगाने के बाद फॉल्ट नहीं होगा।
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