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जल्द बदल जाएगी गोरखपुर जिला अस्पताल की सूरत, जानिए कैसा होगा इसका नजारा
Wed, 06 Jan 2021 04:12 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 06 Jan 2021 04:12 PM IST
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गोरखपुर जिला अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर जिला अस्पताल की सूरत जल्द ही बदलने वाली है। मुख्य ओपीडी भवन दो मंजिला होगा। इसमें सभी विभागों के ओपीडी होंगे। अस्पताल में टिटनेस वार्ड की जगह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) भी स्थापित होगा। इसकी मंजूरी शासन की ओर से मिल गई है।
जिला अस्पताल में 330 बेड हैं। अस्पताल में ओपीडी का भवन करीब 100 साल पुराना है। एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में बहुमंजिला ओपीडी भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एसटीपी-ईटीपी और दूसरी अन्य सुविधाओं के लिए भी इंतजाम करने की मांग की गई थी। इसकी मंजूरी शासन की ओर से मिल गई है।
बताया कि अस्पताल की जरूरतों और उस पर आने वाले खर्च के आंकलन के लिए शासन ने आर्किटेक्ट भेजा है। बीते दो दिन से आर्किटेक्ट ने अस्पताल का निरीक्षण किया है। इस दौरान अवर अभियंता भी साथ में मौजूद रहे।
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आर्किटेक्ट ने नए बहुमंजिला इमारत की बजाय पुरानी ओपीडी भवन पर ही एक और फ्लोर बनाने का सुझाव दिया है। इसके लिए अस्पताल के पुराने ओपीडी भवन पर लिंटर की एक बार फिर से ढलाई होगी। इसके बाद उसके ऊपर नए सिरे से एक और मंजिल का निर्माण होगा। अस्पताल में वेटिंग एरिया भी बनाया जाएगा। नए भवन के निर्माण के बाद दूसरे सभी विभागों की ओपीडी अब अस्पताल के एक ही भवन में चलेगी। इससे मरीजों को न्यू ओपीडी में जाने की जरूरत नहीं होगी।
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जिला अस्पताल में 330 बेड हैं। अस्पताल में ओपीडी का भवन करीब 100 साल पुराना है। एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में बहुमंजिला ओपीडी भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एसटीपी-ईटीपी और दूसरी अन्य सुविधाओं के लिए भी इंतजाम करने की मांग की गई थी। इसकी मंजूरी शासन की ओर से मिल गई है।
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बताया कि अस्पताल की जरूरतों और उस पर आने वाले खर्च के आंकलन के लिए शासन ने आर्किटेक्ट भेजा है। बीते दो दिन से आर्किटेक्ट ने अस्पताल का निरीक्षण किया है। इस दौरान अवर अभियंता भी साथ में मौजूद रहे।
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आर्किटेक्ट ने नए बहुमंजिला इमारत की बजाय पुरानी ओपीडी भवन पर ही एक और फ्लोर बनाने का सुझाव दिया है। इसके लिए अस्पताल के पुराने ओपीडी भवन पर लिंटर की एक बार फिर से ढलाई होगी। इसके बाद उसके ऊपर नए सिरे से एक और मंजिल का निर्माण होगा। अस्पताल में वेटिंग एरिया भी बनाया जाएगा। नए भवन के निर्माण के बाद दूसरे सभी विभागों की ओपीडी अब अस्पताल के एक ही भवन में चलेगी। इससे मरीजों को न्यू ओपीडी में जाने की जरूरत नहीं होगी।
टिटनेस वार्ड टूटेगा, लगेगी एसटीपी-ईटीपी
अस्पताल से निकलने वाले संक्रमित पानी को विसंक्रमित करने के अब तक कोई इंतजाम नहीं है। एनजीटी और प्रदूषण विभाग के मानकों के मुताबिक 300 बेड के अस्पताल में एसटीपी और ईटीपी अनिवार्य है। अस्पताल में ये दोनों सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में टिटेनस वार्ड को तोड़कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट को भी कैंपस में लगाने का फैसला लिया गया है।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि शासन ने भेजे गए प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। आर्किटेक्ट ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया है। टिटनेस वार्ड को ध्वस्त कर वहां पर दो ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होंगे। नए नक्शे से अस्पताल का स्वरूप बदला-बदला दिखेगा।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि शासन ने भेजे गए प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। आर्किटेक्ट ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया है। टिटनेस वार्ड को ध्वस्त कर वहां पर दो ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होंगे। नए नक्शे से अस्पताल का स्वरूप बदला-बदला दिखेगा।