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Gorakhpur News: देश का पहला एम्स बना गोरखपुर, जहां प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज के साथ पढ़ाई भी

Tue, 16 May 2023 12:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 16 May 2023 12:18 PM IST
सार

एम्स निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर और आरोग्य मंदिर के निदेशक डॉ. विमल मोदी ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को समझौता पत्र सौंपा। डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि देश का पहला एम्स होगा, जो प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए मरीजों का इलाज करेगा।

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Gorakhpur became country first AIIMS studies along with treatment from naturopathy
गोरखपुर एम्स। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मरीजों का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए इलाज किया जाएगा। इलाज के दौरान हवा, मिट्टी, धूप, पानी का इस्तेमाल होगा। इलाज के बाद मरीजों पर शोध किया जाएगा और इसी पर आधारित सर्टिफिकेट कोर्स भी कराया जाएगा। इसके लिए एम्स और आरोग्य मंदिर के बीच सोमवार को समझौता हुआ। गोरखपुर एम्स देश का पहला एम्स है, जहां प्राकृतिक चिकित्सा के साथ पढ़ाई और शोध भी होगा।

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एम्स निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर और आरोग्य मंदिर के निदेशक डॉ. विमल मोदी ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को समझौता पत्र सौंपा। डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि देश का पहला एम्स होगा, जो प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए मरीजों का इलाज करेगा। मरीजों के इलाज पर एम्स का आयुष विभाग आरोग्य मंदिर के डॉक्टरों के साथ शोध करेगा, यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होंगे।
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इसी तर्ज पर एम्स प्राकृतिक चिकित्सा के छोटे-छोटे सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कराएगा। इससे वैश्विक स्तर पर आयुष की तर्ज पर प्राकृतिक चिकित्सा की भी पहचान होगी। अब तक प्राकृतिक चिकित्सा पर कोई शोध नहीं किए गए हैं। इसकी वजह से विश्व पटल पर इसकी जानकारी लोगों को नहीं हो सकी है। इस दौरान आरोग्य मंदिर की डॉ. स्मिता मोदी, एम्स आयुष के नोडल अधिकारी डॉ. तेजस पटेल, डॉ. पल्लवी आदि मौजूद रहीं।
 

एम्स शोध को अंतरराष्ट्रीय जनरल में कराएगा प्रकाशित

डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा की शुरुआत भारत से हुई है। इस पद्धति को महात्मा गांधी भी मानते थे। अपनी कई किताबों में उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति का जिक्र किया है। यह पद्धति अब तक हाशिए पर थी, लेकिन अब इसका प्रचार-प्रसार विदेश में किया जाएगा।

डॉ. विमल मोदी ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा में सभी गंभीर मरीजों का इलाज है। इस चिकित्सा पद्धति को अब केवल वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित करने की जरूरत है। इसमें एम्स मदद करेगा। एम्स के विशेषज्ञों की टीम मॉडर्न चिकित्सा पद्धति और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से इलाज पर शोध करेगी।

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