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Gorakhpur News: माफिया अजीत शाही समेत सात बदमाशों पर इनाम घोषित, कर चुके हैं बड़े-बड़े कांड

Tue, 16 May 2023 02:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 16 May 2023 02:01 PM IST
सार

माफिया अजीत शाही का गैंग डी-4, वर्ष 2010 में पुलिस में रजिस्टर्ड है। माफिया के ऊपर पहला केस 1991 में मारपीट और धमकी का दर्ज हुआ था। उसके बाद शहर के कैंट, खोराबार, शाहपुर, गुलरिहा, गोरखनाथ और खामपार दिवरिया मिलाकर कुल 33 मुकदमें दर्ज हुए हैं।

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Reward declared on seven miscreants including mafia Ajit Shahi
बाएं से माफिया अजीत शाही और सूरज सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मुकदमों में फरार चल रहे माफिया अजीत शाही समेत सात बदमाशों पर एसएसपी ने सोमवार को इनाम घोषित कर दिया। अजीत शाही और हिस्ट्रीशीटर सूरज सिंह की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। वहीं, नर्सिंग होम में हिस्ट्रीशीटर सूरज के साथ तोड़फोड़ करने वाले विशाल सिंह, विनय यादव, राहुल शर्मा पर 15-15 हजार रुपये का इनाम गिरफ्तारी के लिए घोषित किया गया। एसएसपी ने गैंगस्टर में फरार सचिन यादव व शक्तिधर सिंह पर भी 15-15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।

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जानकारी के मुताबिक, रेलवे कोऑपरेटिव बैंक में नियुक्ति को लेकर माफिया अजीत शाही ने अपने साथियों संग मिलकर बैंक में जाकर धमकी दी थी। आरोप है कि इस दौरान रंगदारी भी मांगी गई। शाहपुर पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। माफिया अजीत जिले के टॉप टेन बदमाशों की सूची में भी शामिल है। अब एसएसपी ने गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित कर दिया है।
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वहीं, बेलघाट के सोपाईघाट गांव निवासी सूरज सिंह, सिकरीगंज के हरिहरपुर निवासी विशाल सिंह, गाई बेला निवासी राहुल शर्मा, पीपीगंज के विनय यादव थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। कुछ दिन पहले रंगदारी न मिलने पर एक नर्सिंग होम में इन लोगों ने तोड़फोड़ की थी।

मामला संज्ञान में आने पर रामगढ़ताल पुलिस ने रंगदारी, तोड़फोड़ सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है, लेकिन आरोपी पकड़ से दूर हैं। एसएसपी ने सभी पर इनाम घोषित कर दिया। कैंट थाने में दर्ज गैंगस्टर केस में फरार चल रहे गिरधरगंज निवासी सचिन यादव व महराजगंज के घुघली इलाके के शक्तिधर सिंह पर भी 15-15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

डी-4 गिरोह का सरगना है माफिया अजीत

माफिया अजीत शाही का गैंग डी-4, वर्ष 2010 में पुलिस में रजिस्टर्ड है। माफिया के ऊपर पहला केस 1991 में मारपीट और धमकी का दर्ज हुआ था। उसके बाद शहर के कैंट, खोराबार, शाहपुर, गुलरिहा, गोरखनाथ और खामपार दिवरिया मिलाकर कुल 33 मुकदमें दर्ज हैं। अंतिम मुकदमा वर्ष 2016 में खोराबार थाने में दर्ज हुआ था। इन मुकदमों में से कई में माफिया अजीत शाही कोर्ट से बरी भी हो चुका है।

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पुलिस रिकार्ड में माफिया अजीत शाही को अब तक किसी मामले में पुलिस सजा नहीं दिला पाई है। योगी सरकार आने के बाद माफिया ने खुद को क्राइम से दूर कर लिया था। हालांकि, सात साल बाद एक बार फिर माफिया अजीत शाही की गुंडई सामने आई और बैंक के कर्मचारियों ने एक जुट होकर माफिया और उसके गुर्गे के खिलाफ तहरीर देकर केस दर्ज कराया है।

नर्सिंग होम से वसूली करता है सूरज
सूरज सिंह अपने साथियों संग मिलकर नर्सिंग होम से रंगदारी वसूलता है। न देने पर ही वारदात को अंजाम देता है। अभी एक साल पहले सूरज ने रंगदारी न देने पर डीआईजी बंगला के सामने स्थित एक नर्सिंग होम पर फायरिंग कर सनसनी फैला दी थी। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर सूरज और उसके साथियों को जेल भेजा गया था। जेल से जमानत पर छूटने के बाद आरोपी सूरज सिंह ने फिर से अपना पुराना काम शुरू कर दिया। शनिवार को तारामंडल के एक नर्सिंग होम में अपने तीन साथियों संग रंगदारी वसूलने गया था। डॉक्टर के मना करने पर आरोपियों ने तोड़फोड़ की थी। गिरफ्तारी न होने पर एसएसपी ने इनाम घोषित किया है।

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