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गोरखपुर अलर्ट: हवा पहले ही बहुत खराब है...पटाखों से इसे और मत बिगाड़िए

Fri, 10 Nov 2023 12:30 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 10 Nov 2023 12:30 PM IST
सार

फिजिशियन डॉ. गौरव पांडेय ने कहा कि शोर और प्रदूषण हर समय मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते हैं। पटाखे जलाने पर उनसे गंधक और पोटैशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैस निकलती हैं। एक साथ चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्क्त होने लगती है।

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Gorakhpur Alert Air already very bad will be worse with firecrackers
गोरखपुर में धुंध। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर शहर में धूल और धुआं के चलते पहले से ही हवा की गुणवत्ता खराब है। अब दिवाली-छठ पर पटाखे फूटेंगे तो धुआं इसे और बिगाड़ेगा। घरों से निकले कूड़ा-करकट को लोग जलाएंगे। ऐसे में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बिगड़ जाएगा। सांस, हृदय और अस्थमा के रोगियों के लिए यह जानलेवा हो जाएगा। ऐसे में बुद्धिजीवियों की सलाह है कि बचाव के लिए हर किसी को समझदारी दिखानी होगी, क्योंकि थोड़ी सी खुशी बहुतों के लिए दुखदायक हो सकती है।

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लोग पटाखे न फोड़कर प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर भी लोगों को प्रदूषण से सेहत को नुकसान से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उधर, नगर निगम की ओर से अपील की जा रही है कि कूड़ों को इकट्ठा करके नगर निगम की गाड़ी को ही दें, जलाएं ना। ऐसी ही सावधानियों को बरत कर हम प्रदूषण के बढ़ते स्तर को रोक सकते हैं साथ ही पटाखों के शोर को भी कम कर सकते हैं।
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शहर में निर्माण कार्य चल रहे हैं। दिवाली पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने में जुटे हैं। हवा में नमी होने की वजह से प्रदूषण के कारक (एयर पाल्यूटेंट) की परत बन जा रही है। इससे धुंध (स्मॉग) बन रहा है। बीते आठ दिनों से हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) खराब है। बुधवार को एक्यूआई का स्तर 211 दर्ज किया गया, जो खतरे के स्तर से ज्यादा है। ऐसे में जब दिवाली पर जब पटाखे जलेंगे तो प्रदूषण अधिक बढ़ जाएगा। इसको लेकर नगर निगम और क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय के अधिकारियों ने सलाह जारी की है।
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नगर निगम को दें कूड़ा, घर के सामने न जलाएं

धुएं और धूल की वजह से हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसको देखते हुए नगर निगम की ओर से साफ-सफाई में सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। इसके अलावा घरों की सफाई से निकलने वाला कूड़ा निकालकर लोग जला दे रहे हैं। इससे प्रदूषण फैल रहा है। नगर निगम के अधिकारियों की ओर से बताया जा रहा है कि घर से निकलने वाला कूड़ा नगर निगम की गाड़ी में जरूर डाल दें। उसे घर के आसपास, मोहल्ले में या सड़क किनारे जलाने से परहेज करें।

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गोरखपुर शहर में हवा की गुणवत्ता

तारीख एक्यूआई स्थिति
09 नवंबर 2023 211 खराब
08 नवंबर 2023 163 मध्यम
07 नवंबर 2023 224 खराब
06 नवंबर 2023 203 खराब
05 नवंबर 2023 279 खराब


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दिवाली पर पटाखे को कोई विधान नहीं, संवेदनशील बने समाज

समाजवादी चिंतक एवं पूर्व आचार्य गोविवि प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि दिवाली तो प्रकाश का पर्व है। प्रकाश को लेकर जितनी विधियां हैं, उनका प्रयोग करें। पटाखे का इस पर्व से कोई जुड़ाव नहीं है। यह तो धनाढ्य वर्ग का प्रदर्शन है। अब इसमें हर वर्ग के लोग शामिल होते जा रहे हैं। यह बारूद वरिष्ठ नागरिक और बीमार लोगों के लिए बहुत खतरनाक है। समाज को इसके लिए संवेदनशील होने की जरूरत है। हर किसी को पटाखे न जलाने का संकल्प लेना चाहिए। ऐसा करके हम बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगा सकते हैं। इस लोग समझें। हर किसी के संवदेनशील होने से ही इस पर रोक लग सकती है।

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ग्रीन पटाखों से मनाएं दिवाली, टेराकोटा लैंप का करें उपयोग

गोविवि भूगोल विभाग डॉ. दीपक प्रसाद ने कहा कि सर्दियों में वायु प्रदूषण काफी लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए गर्मियों की तुलना में अधिक तीव्र दर से सांस के साथ भीतर जाता है। दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पटाखों से बचकर हरित पटाखों (ग्रीन पटाखा) का प्रयोग करें। वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए साल 2018 में ग्रीन पटाखों का कांसेप्ट लाया गया था। इनमें एलुमिनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे खतरनाक केमिकल नहीं होते हैं। इको-फ्रेंडली दीयों का प्रयोग से अधिकांश लोग दिवाली में घरों को रोशन करते हैं। हालांकि, अत्यधिक रोशनी भी प्रदूषण का कारण बनती है तो इस दिवाली आप अपने घर को रोशन करने और अत्यधिक वायु प्रदूषण से बचने के लिए टेराकोटा लैंप का उपयोग कर सकते हैं।

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जल में लंबे समय तक घुलनशील रहते हैं बारूद के कण

गोविवि रसायन विज्ञान विभाग विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि दीपावली पर्व पर आतिशबाजी का जबरदस्त प्रदर्शन होता है, जिसमें रोशनी एवं आवाज का अतिरेक पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करता है। प्राचीन काल में प्रभाव कम था, क्योंकि बारूद का उपयोग केवल युद्ध के समय होता था। बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे की नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइड्स, क्लोराइड्स, अमोनिया के जल में घुलनशील आयन उत्पन्न होते है, साथ ही साथ विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते है ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है, जल में घुलन शील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है। अतिरिक्त मात्रा में कार्बन ब्लैक के उत्सर्जन से अस्थमा जैसे रोग के कारक बनते है।

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प्रदूषण से बचने के लिए करें इको पटाखे का प्रयोग

गोविवि भूगोल विभाग डॉ. अंकित सिंह ने कहा कि पटाखों के निर्माण में विभिन्न धातुओं का प्रयोग किया जाता है, जो भिन्न-भिन्न रंग प्रदान करते हैं। जैसे गुलाबी रंग के लिए लिथियम, सोडियम साल्ट से नारंगी और पीला और बेरियम तथा तांबा सॉल्ट से नीला या हरे रंग की रोशनी होती है। पटाखों के जलाए जाने से वायुमंडल में गैस और धुएं की मात्रा में वृद्धि होती है। इनमें मुख्य रूप से कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाॅइआक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। इससे वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि होती है, जो आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी पैदा करती है। इससे निकलने वाले एरोसोल से मृदा व जल प्रदूषण भी होता है। जो मानव व जीव-जंतुओं के लिए बहुत हानिकारक सिद्ध होता है। ऐसे में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हमें पटाखों को जलाने से बचना चाहिए और हो सके तो इको पटाखें का ही प्रयोग करना चाहिए जो केवल आवाज करते हैं।

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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार पांडेय ने कहा कि शोर और प्रदूषण से तनाव होता है, जो ब्लड प्रेशर और शुगर के अलावा हृदय रोगियों के लिए भी हानिकारक है। अचानक तेज आवाज के पटाखे बजने पर हृदय रोगियों को जो झटका लगता है, इससे उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए शोर को जितना कम किया जा सके, उतना बेहतर होगा।

फिजिशियन डॉ. गौरव पांडेय ने कहा कि शोर और प्रदूषण हर समय मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते हैं। पटाखे जलाने पर उनसे गंधक और पोटैशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैस निकलती हैं। एक साथ चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्क्त होने लगती है। सबसे अधिक परेशानी एलर्जी व अस्थमा पेसेंट को होती है। दिवाली के अगले दिन इस तरह के मरीजों की संख्या और अधिक बढ़ती है।




 
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