गोरखपुर विश्वविद्यालय: शिक्षकों के अंकपत्रों की आज से होगी जांच, अब दौड़ रहे डिग्री लेने को
गोरखपुर विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में भी फर्जी शिक्षकों की तलाश तेज हो गई है। सोमवार से विश्वविद्यालय के शिक्षकों के अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों की जांच शुरू होगी। पहले दिन पांच विभागों में कागजात खंगाले जाएंगे। वहीं नोडल अधिकारी की मांग पर कुलसचिव ने अब संबंधित विभागों में ही जांच के निर्देश दिए हैं।
शिक्षकों को प्रमाण पत्रों के संदर्भ में शपथ पत्र भी देना होगा। उधर, शिक्षक संगठन फुफुक्टा ने पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठकर शिक्षक जांच प्रक्रिया के विरोध में निंदा प्रस्ताव लाया है। मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री तथा प्रमुख सचिव के सामने मामला उठाने को कहा है। सदस्यों ने कोरोना प्रभाव कम होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
दरअसल, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में फर्जी अंकपत्र के बलबूते अनामिका नाम पर कई जगहों पर नौकरी करने का मामला सामने आया था। इसके बाद शासन ने इंटरमीडिएट के साथ डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी अंकपत्र और प्रमाण पत्रों की जांच कराने का निर्णय लिया।
विश्वविद्यालय में ढाई सौ शिक्षक हैं। जांच के लिए दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. कुमुद त्रिपाठी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। नोडल अधिकारी ने साफ कर दिया है कि जांच समिति के सदस्य विभागों में जाकर जांच करेंगे। सभी अभिलेख विभागाध्यक्षों द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किए जाएंगे। यही नहीं मूल प्रति भी जांच समिति के सामने शिक्षकों को उपलब्ध कराना होगा।
इन विभागों में आज जांच होगी
फुफुक्टा के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षक संघ अध्यक्षों के साथ शिक्षक जांच प्रकरण पर ऑनलाइन बैठक की। जिसमें गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कई मुद्दे उठाए। डॉ. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में शासनादेश कार्यपरिषद द्वारा लागू किया जाना चाहिए और सक्षम अधिकारियों के द्वारा ही जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कोरोना काल के बाद जांच कराने की वकालत की। उक्त सभी बिंदुओं को फुफुक्टा ने अपने विरोध-प्रस्ताव में शामिल किया है। यह विश्वास दिलाया है कि उच्च शिक्षा मंत्री से मिलकर इस जांच समिति का विरोध दर्ज कराएंगे।
जांच से परेशानी की वजह कुछ और तो नहीं
शिक्षकों के अभिलेखों की जांच को लेकर विश्वविद्यालय में चर्चाओं का बाजार गर्म है। शिक्षक जांच कराने से परेशान हैं। इस परेशानी की असल वजह कुछ और ही है। चर्चा यह भी है कि जांच में कुछ शिक्षकों की बदली गई जन्मतिथि भी पकड़ में आ सकती है।
कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने वरिष्ठता के खेल में इसे बदलवा भी दिया था। वहीं यह भी चर्चा है कि कुछ शिक्षकों ने नौकरी ज्वाइन करने के बाद पीएचडी की है। नए शिक्षकों में जाति प्रमाणपत्र और नेट के प्रमाण पत्र को लेकर भी शिकायत पूर्व में हो चुकी है। हालांकि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि क्या सही है और क्या फर्जी?
गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में इन दिनों डिग्री निकलवाने को लेकर होड़ मची हुई है। रोजाना करीब 150 आवेदन आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर आवेदन 20 वर्ष नौकरी कर चुके शिक्षकों केेे हैं। उन्होंने प्रोविजनल सर्टिफिकेट जमाकर नौकरी ज्वाइन कर ली और बाद में डिग्री निकलवाई ही नहीं।
प्रशासनिक भवन में जमा आवेदनों में वर्ष 2000 के पहले के आवेदन ज्यादा हैं। परिषदीय और इंटरमीडिएट कॉलेजों के शिक्षकों के अलावा डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों ने भी स्नातक और परास्नातक की डिग्री के लिए आवेदन किए हैं।
कस्तूरबा शिक्षिकाओं, अनुदेशक और शिक्षामित्रों का सत्यापन शुरू
गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत फर्जी शिक्षकों के खिलाफ जांच के लिए जहां मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों की जानकारी अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है, वहीं कस्तूरबा बालिका विद्यालय में कार्यरत 160 शिक्षिकाओं के दस्तावेजों की जांच के साथ आधार कार्ड का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। 565 अनुदेशकों और 3300 शिक्षामित्रों के भी आधार कार्ड का सत्यापन ब्लॉक स्तर पर शुरू हो चुका है।