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ट्रस्टियों का एलान: गीता प्रेस नहीं लेगा गांधी शांति पुरस्कार की धनराशि, बोले- सम्मान स्वीकार, दान नहीं

Mon, 19 Jun 2023 05:44 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 19 Jun 2023 05:44 PM IST
सार

दुनिया भर में धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन के लिए प्रसिद्ध गीता प्रेस की उपलब्धियों में रविवार को शांति का एक और अध्याय जुड़ गया। गीता प्रेस को वर्ष 2021 का गांधी शांति पुरस्कार मिलने से ट्रस्टी से लेकर शहर के लोग तक हर्षित हैं।

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Gita Press will not accept Gandhi Peace Prize money
गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गीता प्रेस ट्रस्ट ने गांधी शांति पुरस्कार के साथ मिलने वाली एक करोड़ रुपये की धनराशि को लेने से मना कर दिया है। गीता प्रेस ट्रस्टियों का कहना है कि कहना है कि गीता प्रेस किसी तरह का दान का धन नहीं लेता है। इसलिए ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि गांधी शांति पुरस्कार के साथ मिलने वाली एक करोड़ रुपये की धनराशि गीता प्रेस स्वीकार नहीं करेगा।

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बता दें कि गीता प्रेस को वर्ष 2021 का गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली ज्यूरी ने सर्वसम्मति से गीता प्रेस के नाम पर मुहर लगाई है।
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गीताप्रेस के प्रबंधक डॉ लाल मणि तिवारी ने बताया कि गीता प्रेस कहीं से भी मिलने वाले सम्मान या धन को स्वीकार नहीं करता है, लेकिन गीता प्रेस के ट्रस्टियों ने निर्णय लिया है कि वह गांधी शांति पुरस्कार स्वीकृत करेंगे, लेकिन उसके साथ मिलने वाले एक करोड़ रुपये को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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इसे भी पढ़ें: गीता प्रेस को दिया जाएगा 2021 का गांधी शांति पुरस्कार, संस्कृति मंत्रालय ने की घोषणा

शताब्दी वर्ष में गीता प्रेस के नाम जुड़ा शांति का एक और अध्याय

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गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

दुनिया भर में धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन के लिए प्रसिद्ध गीता प्रेस की उपलब्धियों में रविवार को शांति का एक और अध्याय जुड़ गया। गीता प्रेस को वर्ष 2021 का गांधी शांति पुरस्कार मिलने से ट्रस्टी से लेकर शहर के लोग तक हर्षित हैं। स्थापना के सौ वर्ष पूरे करने के अवसर पर मिले पुरस्कार से खुशी चौगुनी हो गई है।

सनातन धर्म और संस्कृति के पुनर्जागरण में गीता प्रेस का योगदान अतुलनीय रहा है। गीता प्रेस केवल प्रेस ही नहीं, बल्कि दर्शनीय तीर्थ स्थल है। गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने बताया कि वर्ष 1921 के आसपास जयदयाल गोयंदका ने कलकत्ता (कोलकाता) में गोविंद भवन ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसी ट्रस्ट से गीता का प्रकाशन कराते थे। पुस्तक में कोई त्रुटि न हो इसके लिए प्रेस को कई बार संशोधन करना पड़ता था। प्रेस के मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है, तो अपनी प्रेस लगा लीजिए।

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यह बात गोयंदका के मन में घर कर गई। उन्होंने गीता प्रकाशित करने के लिए प्रेस लगाने का मन बनाया तो गोरखपुर का चयन किया। 29 अप्रैल 1923 को उर्दू बाजार में 10 रुपये महीने के किराए पर कमरा लेकर गीता का प्रकाशन शुरू किया गया। धीरे-धीरे गीता प्रेस का निर्माण हुआ। गीता प्रेस की वजह से गोरखपुर को आज अलग पहचान मिली हुई है। प्रेस के पास दो लाख वर्ग फीट जमीन है। इसमें 1.45 लाख वर्ग फीट में प्रेस, कार्यालय और मशीनें लगी हैं। 55 हजार वर्ग फीट में दुकानें और आवास हैं।

1926 में शुरू हुई कल्याण पत्रिका

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गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी बताते हैं कि दिल्ली में अप्रैल 1926 में आयोजित मारवाड़ी अग्रवाल सभा के आठवें अधिवेशन में घनश्यामदास बिड़ला ने भाईजी को अपने विचारों व सिद्धांतों पर आधारित एक पत्रिका निकालने की सलाह दी। गीता प्रेस के संस्थापक सेठजी जयदयाल गोयंदका की सहमति से 22 अप्रैल 1926 को पत्रिका का नाम कल्याण तय किया गया।

इसी वर्ष भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के संपादकत्व में कल्याण का प्रथम साधारण अंक मुंबई से प्रकाशित हुआ। दूसरे वर्ष कल्याण का प्रथम विशेषांक भगवन्नामांक गोरखपुर से प्रकाशित हुआ। तभी से कल्याण का प्रकाशन गीता प्रेस से किया जा रहा है। अब तक गीता प्रेस से कल्याण की लगभग 17 करोड़ प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। जो पूरे विश्व में प्रत्येक माह पहुंचाई जाती हैं।

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15 भाषाओं में होता है पुस्तकों का प्रकाशन
गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ लालमणि तिवारी ने बताया कि गीता प्रेस से श्रीमद्भागतगीता, रामचरित मानस, पुराण, उपनिषद सहित 15 भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित की जाती हैं। इनमें हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, मराठी, गुजराती, तमिल, कन्नड़, असमिया, उड़िया, उर्दू, तेलुगु, मलयालम, पंजाबी, अंग्रेजी, नेपाली आदि भाषाएं शामिल हैं। गीता प्रेस से अब तक लगभग 1850 प्रकार की 92.5 करोड़ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

गीता प्रेस से महात्मा गांधी था विशेष जुड़ाव

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रामचरितमानस व गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।

गीता प्रेस से महात्मा गांधी का विशेष जुड़ाव था। उन्होंने कल्याण पत्रिका के लिए पहला लेख लिखा था। इसमें गांधी जी ने स्वाभाविक शब्द के दुरुपयोग का जिक्र किया था। इसके बाद उन्होंने कई बार कल्याण के लिए लेख या संदेश लिखे। गांधीजी के निधन के बाद गीता प्रेस विभिन्न विषयों पर गांधी जी के विचार छापता रहा है। महात्मा गांधी ने आठ अक्तूबर 1933 को गीता प्रेस की गीता प्रवेशिका के लिए भूमिका लिखी थी। सत्याग्रह आश्रम वर्धा में गांधीजी ने यह संग्रहणीय पत्र लिखा था। गीता प्रेस के लीला चित्र मंदिर में तीन पृष्ठ का वह पत्र आज भी संग्रहित है।

गीता प्रेस की लोकप्रिय पुस्तकें

श्रीमदभगवद गीता
संस्कृत भाषा के 700 श्लोक वाला सनातन ग्रंथ है, जो महाभारत का हिस्सा है। यह हिंदू धर्म का पवित्र ग्रंथ है। गीता प्रेस ने इसे संस्कृत, हिंदी अंग्रेजी सहित 15 भाषाओं में प्रकाशित किया है।

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रामचरित मानस
गीता प्रेस से प्रकाशित सबसे लोकप्रिय रामायण गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस है। हिंदी व संस्कृत के अलावा 2002 में इसे तेलुगु में भी प्रकाशित किया गया। अभी गुजराती, कन्नड़, उड़िया, असमिया, मराठी, नेपाली, बंगाली और अंग्रेजी में रामचरित मानस का प्रकाशन किया जा रहा है।

पुराण व उपनिषद
गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित पुराण मूलरूप से संस्कृत व अन्य भारतीय भाषाओं में है। इस दौरान कई ग्रंथों के नाम विष्णु, शिव व ब्रह्मा जैसे प्रमुख हिंदू देवताओं के नाम पर रखे गए हैं। वहीं, उपनिषद प्राचीन वैदिक ग्रंथ है, जिसे सनातन हिंदू दर्शन का आधार माना जाता है।

गीता प्रेस ने तय किया है 100 वर्षों का सफर

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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
गीता प्रेस ने 100 वर्षों का सफर तय कर लिया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 मई 2022 से गीता प्रेस अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। शताब्दी वर्ष के शुभारंभ पर चार जून 2022 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गीता प्रेस पहुंचे थे। शताब्दी वर्ष का समापन समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से होगा। गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। अभी पीएमओ से तारीख नहीं मिली है। उनकी मौजूदगी में ही शताब्दी वर्ष का समापन समारोह मनाया जाएगा।

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गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने कहा कि गीता प्रेस के अध्याय में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। वर्ष 2021 का गांधी शांति पुरस्कार प्राप्त होने की ट्रस्टियों और कर्मचारियों में खुशी है। इस पुरस्कार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति गीताप्रेस की ओर से आभार व्यक्त करता हूं।

गीता प्रेस के मुख्य ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल ने कहा कि गांधी शांति पुरस्कार मिलना गौरव की बात है। इस पुरस्कार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हृदय से धन्यवाद। पुरस्कार की घोषणा के बाद हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हमको और शक्ति प्रदान करें, ताकि हम जिस कार्य को कर रहें उसे आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।



 
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