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नजूल नीति: गोरखपुर में चर्च की 94 एकड़ भूमि पर था घोष बाबू का हाता...बेचकर बिल्डिंग बनवा ली- सीएम से की शिकायत

Thu, 14 Mar 2024 11:00 AM IST
रोहित सिंह रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Thu, 14 Mar 2024 11:00 AM IST
सार

इंडियन ट्रस्ट चर्च के मैनेजर बोबी विलियम ने जनसुनवाई पोर्टल पर सीएम से की शिकायत। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच करवाते हुए शासन पूरी भूमि को समाहित कर ले। चर्च की भी मंशा है कि लोकहित में इस जमीन का उपयोग सके। इसके अलावा चर्च सोसाइटी के समन्वय से कुछ हिस्सा मूल हकदार को भी मिल सके।

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Ghosh Babu owned 94 acres of church land in Gorakhpur, everything was sold - now complaint to CM
शिकायतकर्ता ने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नजूल अध्यादेश-2024 लागू होने के बाद अब शहर में बेशकीमती जमीनों को नियम विरुद्ध बेचे जाने का मामले भी खुलने लगे हैं। ऐसी ही एक शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई है, जिसमें पादरी बाजार में घोष बाबू का हाता की जमीन को बेचने का आरोप इंडियन ट्रस्ट चर्च के मैनेजर बॉबी विलियम ने लगाया है।

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उनका आरोप है कि चर्च मिशन सोसाइटी से घोष बाबू को लीज पर मिली 94 एकड़ जमीन को धोखाधड़ी से बेच डाला गया। जमीन के धंधेबाजों ने उस जमीन पर मकान, होटल और बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनवा डालीं।
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जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत के अनुसार, घोष बाबू के परिजनों ने शहर में गलत तरीके से एक व्यक्ति को चर्च की लीज पर मिली जमीन की पॉवर ऑफ अटार्नी सौंप दी। इसके बाद हाता की लीज की 94 एकड़ जमीन को बेच दिया गया, जबकि चर्च की लीज की जमीन को बेचना तो दूर, लीजी (लीज लेने वाला) के निधन के बाद स्थानांतिरत भी नहीं किया जा सकता।
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इसके लिए दावेदार को फिर से आवेदन करना होता है और कमेटी इस पर फैसला लेती है लेकिन, लीजी के निधन के बाद उनके बेटे ने फर्जी तरीके से खुद को जमीन का लीजी दिखाते हुए तीसरे आदमी को पॉवर ऑफ अटार्नी देकर ये जमीन बिकवा दी। इसकी जानकारी चर्च ऑफ इंडिया को 2013 में हुई।

विलियम ने शिकायत में लिखा है कि इसके बाद मौके पर जाकर घोष बाबू के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन, उक्त स्थल पर घोष बाबू, उनके परिजन या किसी अन्य से संपर्क नहीं हो सका। पूछने पर पता चला कि अब उनके परिवार का यहां कोई नहीं रहता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच करवाते हुए शासन पूरी भूमि को समाहित कर ले। चर्च सोसाइटी के समन्वय से कुछ हिस्सा मूल हकदार को भी मिल सके।

जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायती पत्र में विलियम ने कहा है कि रेवेन्यू रिकार्ड में 29 जनवरी 2019 को सत्यापित लीज की डीड के अनुसार, 6 मार्च 1945 में चर्च मिशन सोसाइटी के जेएच फरेर द्वारा बशारतपुर में प्रियो नाथ घोष (पीएन घोष) को 94 एकड़ जमीन लीज पर दी गई थी। 1956 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गजट जारी कर चर्च मिशन सोसाइटी की संपत्तियों को इंडियन ट्रस्ट चर्च के अधीन कर दिया।

इसी में गोरखपुर में घोष बाबू का हाता भी था। आरोप है कि ट्रस्ट की तरफ से दी गई लीज प्रीप्रूवल लीज ( अवधि नहीं होती, लेकिन 99 वर्ष के लिए मान्य होती है) दी थी। इसके तहत बिना किसी तरह के पक्के निर्माण कराए उसकी निगरानी के लिए एक समझौता किया गया।

इसके लिए प्रति बीघा तत्कालीन समय में दो रुपये चार आना सालाना शुल्क पट्टेदार की तरफ से जमा किया जाता था। पट्टेदार के निधन के बाद सोसाइटी की तरफ से उनके वारिसों के नाम पर रिलीज की जानी थी। आरोप है कि विधिक प्रक्रिया अपनाए बिना घोष के परिजनों ने खुद को असल पट्टेदार घोषित कर दिया।

यही नहीं, बेटे एंथोनी ललित मोहन ने पारस नाथ गुप्ता के नाम से अवैध पॉवर ऑफ अटार्नी भी दे दी। इसी पॉवर ऑफ अटार्नी का प्रयोग करते हुए अलग-अलग नामों से कर दिया। इन्हीं पॉवर ऑफ अटार्नी वालों ने अवैध तरीके से घोष बाबू के हाते की जमीन को भूमिधर दिखाते हुए लीज से बाहर कर ग्राहकों को बेच दिया। जबकि, लीज की जमीन को फ्री होल्ड करवाए बिना पट्टेधारक किसी दूसरे के नाम पर भी स्थानान्तरित तक नहीं करवा सकते।


आरोप लगाया गया है कि घोष बाबू के परिवारजनों ने पॉवर ऑफ अटार्नी का गलत प्रयोग करते हुए लीज की 94 एकड़ जमीन को गलत तरीके से बैनामा कर लोगों के साथ ठगी कर दी। इसे बेचा तो जा ही नहीं सकता था। चर्च प्रबंधन की मंशा है कि उक्त बची जमीन के हिस्से के साथ पूरी जमीन की जांच प्रशासन अपने स्तर से करवा ले।




 

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