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Gorakhpur News: सिपाही भर्ती में असफल युवक ने खड़ा किया साइबर ठगी का नेटवर्क

Fri, 12 Jun 2026 02:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 02:08 AM IST
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Gang operating from history-sheeter's house; three accused sent to jail.
गोरखपुर। कोतवाली क्षेत्र के दीवान बाजार में हिस्ट्रीशीटर के मकान से संचालित साइबर ठगी का एक संगठित नेटवर्क सिपाही भर्ती में असफल रहने के बाद कुशीनगर निवासी संकेत राय ने अपने साथियों के साथ खड़ा किया था। पुलिस ने मामले में 13 आरोपियों को नामजद किया है। इनमें से तीन को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया है, जबकि 10 अन्य की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। आरोप है कि गिरोह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मर्चेंट क्यूआर कोड तैयार कर साइबर अपराध से अर्जित धनराशि के लेन-देन और निकासी में सहयोग कर रहा था।
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कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संकेत राय, तौहीद आलम उर्फ गोलू और राज सिंह के रूप में हुई थी। इनके कब्जे से मोबाइल फोन और कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे।
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जांच के दौरान संकेत राय के मोबाइल में फर्जी पहचान पत्र तैयार करने से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज मिले। मोबाइल में बड़ी संख्या में ई-मेल पते सक्रिय पाए गए। कई व्हाट्सएप समूहों में मर्चेंट क्यूआर कोड तैयार करने, दस्तावेजों के आदान-प्रदान और खातों के संचालन से संबंधित बातचीत दर्ज मिली है। साथ ही विभिन्न बैंक खातों में लेन-देन के डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं।
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पुलिस के अनुसार, तौहीद आलम और राज सिंह के मोबाइल फोन से भी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खातों और मर्चेंट क्यूआर कोड से संबंधित सामग्री बरामद हुई है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के गुर्गे अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे। कोई दस्तावेज उपलब्ध कराता था तो कोई उनके आधार पर मर्चेंट खाते और क्यूआर कोड तैयार करता था।
बिहार और पूर्वांचल तक फैला था गिरोह का जाल
मुख्य आरोपी संकेत राय ने पूछताछ में बताया कि करीब एक वर्ष पहले उसकी मुलाकात गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर बिहार के एक युवक से हुई थी। इसके बाद बैंक खातों, पहचान पत्रों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर मर्चेंट क्यूआर कोड तैयार करने का काम शुरू हुआ। धीरे-धीरे कई लोग इस नेटवर्क से जुड़ते चले गए। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क गोरखपुर के अलावा बिहार के कई जिलों तक फैला था। कुछ गुर्गे बैंक खाते और दस्तावेज उपलब्ध कराते थे, जबकि कुछ ई-मेल पते, पहचान संबंधी जानकारी और सत्यापन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराते थे। सभी की जिम्मेदारियां पहले से तय थीं और उसी के अनुसार काम का बंटवारा किया जाता था।

प्रशिक्षण के बाद तैयार किया गया पूरा ढांचा
पूछताछ में यह भी पता चला कि गिरोह के एक गुर्गे ने संकेत राय और उसके साथियों को मर्चेंट खाता तथा क्यूआर कोड तैयार करने की पूरी प्रक्रिया सिखाई थी। इसके बाद संकेत अपने सहयोगियों से यह काम करवाता था और बदले में उन्हें भुगतान किया जाता था। पुलिस अब भागे आरोपियों की तलाश के साथ पूरे नेटवर्क के विस्तार की भी जांच कर रही है।
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