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Gorakhpur News: साइबर स्पेस से सीमा तक, बदल रहा राष्ट्रीय सुरक्षा का स्वरूप
Tue, 01 Sep 2026 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 01 Sep 2026 02:25 AM IST
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गोरखपुर। राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सीमाओं और सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गई है। साइबर स्पेस, सूचना युद्ध, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा भी इसके महत्वपूर्ण आयाम बन चुके हैं।
महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में शिक्षक उन्मेष योजना के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान में रक्षा अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य विवेक विश्वकर्मा ने कहा कि भारत को सैन्य क्षमता के साथ-साथ तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक रूप से भी सशक्त होना होगा।
‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर हमले, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दुरुपयोग और दुष्प्रचार गंभीर चुनौतियां हैं। सीमा विवाद, आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और सामरिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, जल एवं ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन, महामारी, खाद्य सुरक्षा, संगठित अपराध और सूचना युद्ध भी चिंता के प्रमुख विषय हैं।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सरकार और सेना की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह नागरिकों की सजगता, अनुशासन और राष्ट्रहित से भी जुड़ी है। शिक्षकों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। विद्यार्थियों में राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना आवश्यक है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुबोध कुमार मिश्रा ने किया।
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महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में शिक्षक उन्मेष योजना के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान में रक्षा अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य विवेक विश्वकर्मा ने कहा कि भारत को सैन्य क्षमता के साथ-साथ तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक रूप से भी सशक्त होना होगा।
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‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर हमले, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दुरुपयोग और दुष्प्रचार गंभीर चुनौतियां हैं। सीमा विवाद, आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और सामरिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, जल एवं ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन, महामारी, खाद्य सुरक्षा, संगठित अपराध और सूचना युद्ध भी चिंता के प्रमुख विषय हैं।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सरकार और सेना की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह नागरिकों की सजगता, अनुशासन और राष्ट्रहित से भी जुड़ी है। शिक्षकों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। विद्यार्थियों में राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना आवश्यक है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुबोध कुमार मिश्रा ने किया।