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डबल बैनामे का आरोप: 30 एकड़ जमीन के बैनामे के नाम पर 1.55 करोड़ की ठगी, DGP से शिकायत के बाद केस दर्ज
Sat, 25 Jul 2026 03:04 PM IST
Rohit Singh
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Sat, 25 Jul 2026 03:04 PM IST
सार
शिकायतकर्ता के मुताबिक समझौते के बाद 2 जून 2022 से 24 जनवरी 2023 के बीच अलग-अलग तिथियों में आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में जमीन खरीद और बैनामा कराने के लिए कुल करीब 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
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जालसाजी।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
हाटा तहसील में 30 एकड़ जमीन का बैनामा कराने के नाम पर करीब 1.55 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मेसर्स जेएस इंफ्राटेक के अधिकृत पार्टनर अनूप कुमार गोयल की शिकायत पर रामगढ़ताल थाने में धीरज सिंह, अनिल कुमार सिंह, देवेंद्र सिंह समेत अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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अनूप कुमार गोयल ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी)को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि आरोपियों ने ग्राम चक नीलकंठ, तहसील हाटा, जनपद कुशीनगर स्थित करीब 30 एकड़ भूमि विभिन्न काश्तकारों से खरीदकर कंपनी के नाम बैनामा कराने का भरोसा दिया था। आरोपियों ने खुद को जमीन खरीद और बैनामा प्रक्रिया पूरी कराने में सक्षम बताया और कंपनी को विश्वास में लिया।
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इसके बाद 31 मई 2022 को गोरखपुर के मिर्जापुर लालडिग्गी स्थित जेएस इंफ्राटेक कार्यालय में भूमि क्रय-विक्रय से संबंधित समझौता किया गया।शिकायतकर्ता के मुताबिक समझौते के बाद 2 जून 2022 से 24 जनवरी 2023 के बीच अलग-अलग तिथियों में आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में जमीन खरीद और बैनामा कराने के लिए कुल करीब 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
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पीड़ित ने पुलिस को बैंक लेनदेन से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं। आरोप है कि रकम का बड़ा हिस्सा गोरखपुर निवासी मुख्य आरोपी देवेंद्र सिंह, धीरज सिंह, अनिल कुमार सिंह और उनके निर्देश पर अन्य लोगों को दिया गया।अनूप कुमार गोयल का आरोप है कि बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित भूमि की वास्तविक और कानूनी स्थिति उनसे छिपाई गई थी।
कई भूखंडों के संबंध में पहले से ही अन्य लोगों के साथ समझौते या व्यवस्थाएं की जा चुकी थीं, लेकिन इसकी जानकारी नहीं दी गई। आरोप है कि उन्हीं जमीनों के नाम पर दोबारा कंपनी से रकम ली गई। इसके अलावा कुछ ऐसी भूमि का भी सौदा कराया गया, जिसकी कानूनी स्थिति और हस्तांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी।