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यूपी: इस जिले के छह गांवों में एक भी एसटी नहीं, प्रधान के पद हो गए आरक्षित
Thu, 04 Mar 2021 10:23 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 04 Mar 2021 10:23 AM IST
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पंचायत चुनाव।
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के तीन ब्लॉकों जंगल कौड़िया, ब्रह्मपुर और कौड़ीराम में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रधान पद के लिए आरक्षित छह गांवों में आरक्षण का पेच फंस गया है। इन गांवों में एसटी वर्ग का कोई व्यक्ति ही नहीं, ऐसे में चुनाव कौन लड़ेगा?
आरक्षण निर्धारण के दौरान ही संबंधित तहसीलों की तरफ से भी पंचायतीराज विभाग और सीडीओ को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि इन गांवों में अनुसूचित जनजाति का कोई व्यक्ति नहीं है। इसके बाद सीडीओ ने मामला शासन के संज्ञान में लाते हुए मार्गदर्शन मांगा है। मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान भी यह मामला उठा, मगर कोई नतीजा नहीं निकल सका। जिन पंचायतों में यह समस्या आई है, उनमें जंगल कौड़िया ब्लॉक का जंगल कौड़िया गांव एसटी महिला, गायघाट गांव एसटी, कौड़ीराम ब्लॉक का चंवरिया बुजुर्ग गांव एसटी महिला के लिए, जबकि चंवरिया खुर्द एसटी के लिए आरक्षित किया गया है। इसी तरह ब्रह्मपुर ब्लॉक का कोल्हुआ एसटी तथा महुअरकोल गांव एसटी महिला के लिए आरक्षित है।
जिला पंचायतीराज विभाग के मुताबिक, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर सभी पदों के लिए जनगणना 2011 की आबादी को ही आधार मानकर आरक्षण तय किया गया है। जिला स्तर पर इसमें बदलाव संभव नहीं है। यही वजह है कि संबंधित गांवों में आबादी नहीं होने के बाद भी जनगणना की रिपोर्ट में एसटी की आबादी दर्ज होने से उसे इस जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया।
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आरक्षण निर्धारण के दौरान ही संबंधित तहसीलों की तरफ से भी पंचायतीराज विभाग और सीडीओ को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि इन गांवों में अनुसूचित जनजाति का कोई व्यक्ति नहीं है। इसके बाद सीडीओ ने मामला शासन के संज्ञान में लाते हुए मार्गदर्शन मांगा है। मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान भी यह मामला उठा, मगर कोई नतीजा नहीं निकल सका। जिन पंचायतों में यह समस्या आई है, उनमें जंगल कौड़िया ब्लॉक का जंगल कौड़िया गांव एसटी महिला, गायघाट गांव एसटी, कौड़ीराम ब्लॉक का चंवरिया बुजुर्ग गांव एसटी महिला के लिए, जबकि चंवरिया खुर्द एसटी के लिए आरक्षित किया गया है। इसी तरह ब्रह्मपुर ब्लॉक का कोल्हुआ एसटी तथा महुअरकोल गांव एसटी महिला के लिए आरक्षित है।
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जिला पंचायतीराज विभाग के मुताबिक, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर सभी पदों के लिए जनगणना 2011 की आबादी को ही आधार मानकर आरक्षण तय किया गया है। जिला स्तर पर इसमें बदलाव संभव नहीं है। यही वजह है कि संबंधित गांवों में आबादी नहीं होने के बाद भी जनगणना की रिपोर्ट में एसटी की आबादी दर्ज होने से उसे इस जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया।
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2015 के चुनाव में बीडीसी सदस्य का एक पद रिक्त रह गया
इस संबंध में कैंपियरगंज, बांसगांव और चौरीचौरा के तहसीलदारों से रिपोर्ट मांगी गई थी। सभी ने संबंधित गांवों में एसटी वर्ग का एक भी व्यक्ति नहीं होने की पुष्टि की है। लिखा है कि इन गांवों में किसी के पास एसटी का प्रमाण पत्र नहीं है, न ही 2015 के बाद किसी को इस जाति वर्ग का प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
चौरीचौरा तहसील में वर्ष 2008 से 2015 के बीच सात प्रमाण पत्र जारी हुए थे, मगर छह निरस्त किए जा चुके हैं। जबकि एक निरस्तीकरण की प्रक्रिया में है। इसके बाद सीडीओ ने पंचायतीराज निदेशालय को पत्र लिखकर पूरा मामला बताते हुए मार्ग दर्शन मांगा है। बुधवार तक इस संबंध में शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी हो सका।
वर्ष 2015 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जंगल कौड़िया ब्लॉक का वार्ड नंबर 22, क्षेत्र पंचायत सदस्य का पद भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गया था। मौके पर इस जाति की आबादी नहीं होने की वजह से कोई चुनाव ही नहीं लड़ सका, जिससे यह पद पांच साल तक खाली रहा। जानकारों के मुताबिक, शासनादेश के अनुसार जनगणना में दर्ज आबादी को आधार मानकर आरक्षण तय किया जाएगा। इसमें फेरबदल नहीं हो सकता। ऐसे में इन पंचायतों में आरक्षण का बदलना आसान नहीं होगा, जिससे सीट खाली भी रह सकती है। वहां त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर उसे वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं।
चौरीचौरा तहसील में वर्ष 2008 से 2015 के बीच सात प्रमाण पत्र जारी हुए थे, मगर छह निरस्त किए जा चुके हैं। जबकि एक निरस्तीकरण की प्रक्रिया में है। इसके बाद सीडीओ ने पंचायतीराज निदेशालय को पत्र लिखकर पूरा मामला बताते हुए मार्ग दर्शन मांगा है। बुधवार तक इस संबंध में शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी हो सका।
वर्ष 2015 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जंगल कौड़िया ब्लॉक का वार्ड नंबर 22, क्षेत्र पंचायत सदस्य का पद भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गया था। मौके पर इस जाति की आबादी नहीं होने की वजह से कोई चुनाव ही नहीं लड़ सका, जिससे यह पद पांच साल तक खाली रहा। जानकारों के मुताबिक, शासनादेश के अनुसार जनगणना में दर्ज आबादी को आधार मानकर आरक्षण तय किया जाएगा। इसमें फेरबदल नहीं हो सकता। ऐसे में इन पंचायतों में आरक्षण का बदलना आसान नहीं होगा, जिससे सीट खाली भी रह सकती है। वहां त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर उसे वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं।
बीडीसी सदस्य के दो और ग्राम पंचायत सदस्य के 41 पद भी फंसे
जिले के सिर्फ छह ग्राम पंचायतों ही नहीं, बल्कि कौड़ीराम और ब्रह्मपुर ब्लॉक के दो बीडीसी सदस्य पदों पर भी पेंच फंस गया है। कौड़ीराम ब्लॉक का वार्ड नंबर 81 और ब्रह्मपुर ब्लॉक का वार्ड नौ, दोनों ही एसटी महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। इसी तरह कौड़ीराम, ब्रह्मपुर और जंगल कौड़िया ब्लॉक के 41 ग्राम पंचायत सदस्य पद भी एसटी के लिए आरक्षित होने से वहां भी मामला फंस गया है।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि जनगणना 2011 की आबादी को ही आधार मानकर आरक्षण तय किया गया है। जिले के जंगल कौड़िया, ब्रह्मपुर और कौड़ीराम ब्लॉक में एसटी या एसटी महिला के लिए छह प्रधान व दो क्षेत्र पंचायत सदस्य के अलावा ग्राम पंचायत सदस्य के 41 पद आरक्षित किए गए हैं। जनगणना रिपोर्ट में इन गांवों में एसटी की आबादी है, मगर गांव में मौके पर आबादी नहीं है।
बांसगांव, कैंपियरगंज और चौरीचौरा के तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि उनके ब्लॉकों में कोई एसटी नहीं है। 2015 के बाद किसी भी एसटी का प्रमाण पत्र नहीं जारी किया गया है। मामले की जानकारी शासन को दे दी गई है। मार्गदर्शन मांगा गया है। शासन का जो निर्देश होगा, उसी के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि जनगणना 2011 की आबादी को ही आधार मानकर आरक्षण तय किया गया है। जिले के जंगल कौड़िया, ब्रह्मपुर और कौड़ीराम ब्लॉक में एसटी या एसटी महिला के लिए छह प्रधान व दो क्षेत्र पंचायत सदस्य के अलावा ग्राम पंचायत सदस्य के 41 पद आरक्षित किए गए हैं। जनगणना रिपोर्ट में इन गांवों में एसटी की आबादी है, मगर गांव में मौके पर आबादी नहीं है।
बांसगांव, कैंपियरगंज और चौरीचौरा के तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि उनके ब्लॉकों में कोई एसटी नहीं है। 2015 के बाद किसी भी एसटी का प्रमाण पत्र नहीं जारी किया गया है। मामले की जानकारी शासन को दे दी गई है। मार्गदर्शन मांगा गया है। शासन का जो निर्देश होगा, उसी के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।