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बिजली विभाग की हड़ताल से हाहाकार: गलियों से हाईवे तक अधेरा... बिना बिजली गोरखपुरवासी हैरान

Sat, 18 Mar 2023 10:31 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 18 Mar 2023 10:31 AM IST
सार

मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की दिक्कत पर खुद जाकर सही करवाने का प्रयास किया। पाली बिजली घर में अधीक्षण अभिोयंता के साथ जाकर मरम्मत कार्य करवाया। सभी अभियंता 72 घंटे की हड़ताल पर हैं।

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Four lakh people without electricity on the first day of strike
अधिशासी अभियंता कार्यालय विद्युत नगरीय वितरण खण्ड प्रथम शास्त्री चौक । - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बिजली अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों की बृहस्पतिवार रात 10 बजे से शुरू हुई हड़ताल के 12 घंटे भी नहीं बीत पाए थे कि गोरखपुर जिले में बिजली व्यवस्था बेपटरी होने लगी। शुक्रवार को पहले दिन की हड़ताल में शहरी व ग्रामीण इलाके के चार लाख से अधिक उपभोक्ताओं बिजली के लिए जूझना पड़ा। ग्रामीण इलाके में 10 बिजलीघरों के डेढ़ लाख उपभोक्ताओं के यहां 24 घंटे से बिजली आपूर्ति ठप है।

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आपूर्ति सुचारू रखने के लिए किए गए प्रशासनिक इंतजाम पहले दिन विफल नजर आए। ग्रामीण इलाकों में व्यवस्था ठीक रखने के लिए अधीक्षण अभियंता ग्रामीण और मुख्य अभियंता को उतरना पड़ा। फिर भी स्थिति नहीं संभल पाई।
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उधर, महानगर के सरस्वतीपुरम, गायत्रीपुरम, शाहपुर, इंडस्ट्रियल इस्टेट, तारामंडल, सर्किट हाउस, रानीडिहा, दिव्यनगर, कुंतीनगर, विश्वविद्यालय, विकास नगर समेत अन्य बिजलीघरों में सुबह से दोपहर तक बिजली आपूर्ति का संकट था। इसके अलाव, सहजनवां के गीडा आवासीय इलाके में शुक्रवार की सुबह से शाम तक बिजली नहीं थी। ऐसे में पानी की टंकियां खाली हो गईं। इनवर्टर भी जवाब देने लगे। लोगों ने दुकान से पानी की बोतल खरीदकर जरूरी कामों को पूरा किया।
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ग्रामीण इलाकों में 40 बिजलीघर के साथ 70 से अधिक फीडर बंद हैं। रानीडिहा इलाके के संतोष गुप्ता ने बताया कि बृहस्पतिवार रात में बिजली गुल हुई तो लगा आपूर्ति में कोई छोटी दिक्कत है, अभी आ जाएगी। लेकिन, सुबह तक बिजली आई। कुछ देर के लिए बल्ब जला तो वोल्टेज लो था। घरों के पानी की टंकी खाली हो गई। दोपहर 12 बजे आपूर्ति बहाल होने पर टंकी भरी गई।
टाउनहाल बिजली घर के ट्रांसफार्मर में लगी आग


 

शुक्रवार सुबह बारिश के दौरान टाउनहॉल बिजली घर के 7.50 एमवीए ट्रांसफार्मर में आग लग गई। इससे जिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। अस्पताल में जांच कराने के लिए आने वाले रोगी व तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ी। देवरिया के राजेंद्र सुबह अपने हाथ का एक्सरे करवाने आए थे। लेकिन, बिजली नहीं होने से निजी सेंटर पर जाकर एक्सरे करवाना पड़ा।

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ग्रामीण इलाके के इन बिजली घरों की ठप है आपूर्ति
33केवी मछली गांव, 33केवी कैंपियरगंज ग्रामीण, 33केवी सोनौरा, 33केवी पीपीगंज, 33केवी नेतवर, 33केवी सिंघोरवा, 33केवी जंगल कौड़िया, 33केवी सरहरी, 33केवी एफसीआई , 33केवी कैंपियरगंज तहसील, 33केवी अमहिया, 33केवी चौरीचौरा, 33केवी मुंडेरा,33केवी खुटहन, 33केवी सरदारनगर, 33केवी जगदीशपुर, 33केवी नैयापर, 33केवी भटहट, 33केवी बड़हलगंज, 33केवी डेरवा, 33केवी पादरी बाजार,33केवी घघसरा, 33केवी पाली, 33केवी खजनी, 33केवी सहजनवां तहसील, 33केवी सहजनवां ग्रामीण, 33केवी अहिरौली, 33केवी चैनपुर, 33केवी कल्याणपुर मठिया,33केवी बांसगांव ग्रामीण, 33केवी बांसगांव तहसील, 33केवी बिधनापर, 33केवी धुरियापार,33केवी रानीपुर, 33केवी कौड़ीराम, 33केवी हरपुर अनंतपुर, 33केवी गोला बाजार, 33केवी गोला तहसील, 33केवी हरिहरपुर, 33केवी नौसढ़, 33केवी सेवई, 33केवी खजनी तहसील।

मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की दिक्कत पर खुद जाकर सही करवाने का प्रयास किया। पाली बिजली घर में अधीक्षण अभिोयंता के साथ जाकर मरम्मत कार्य करवाया। सभी अभियंता 72 घंटे की हड़ताल पर हैं, ऐसे में संपर्क करना और फाल्ट तत्काल सही करवाना संभव नहीं था।
 

साहब, चार्ज न लेब त हमहूं छोड़कर चल जाईब

Four lakh people without electricity on the first day of strike
मोहद्दीपुर विद्युत उपकेंद्र। - फोटो : अमर उजाला।

घघसरा बिजली घर में लेखपाल की तैनाती की गई है। यहां तैनात एसएसओ ने लेखपाल को फोन कर उनसे चार्ज लेने की बात की। कहा, 12 घंटे से अधिक समय हो गईल है साहब, चार्ज न लेब त हमहूं छोड़कर चल जाईब। बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

लेखपाल हूं, खंभे पर चढ़ जाऊं क्या?
ग्रामीण इलाके में एक बिजली घर का चार्ज लेखपाल ने ले लिया था। लाइन में अचानक फाल्ट आने पर लेखपाल संबंधित लाइनमैन (संविदाकर्मी) के साथ इलाके में गए थे। लेखपाल ने लाइनमैन से समस्या के समाधान के लिए कहा तो उसने कहा कि साहब मैं सीढ़ी ढोने का काम करता हूं। कुशल श्रमिक नहीं हूं। इसपर लेखपाल ने कहा, लाइन कैसे बनेगी तब? क्या मैं खंभे पर चढ़ जाऊं। इसके बाद लाइन बनाने आई टीम वापस चली गई।

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कुशल संविदाकर्मियों की तलाश शुरू
प्रशासनिक अधिकारियों ने निगम के अभियंताओं से अपने अपने बिजलीघर के कुशल श्रमिकों का फोन नंबर लेकर उन्हें ढूंढ रहे हैं। लाइन बनाने के काम के लिए संविदाकर्मियों की अलग-अलग श्रेणियां होती हैं। इसमें कुशल श्रमिक बिजली के खंभे पर चढ़कर फाल्ट सही करता है। ऐसे में अपने बिजलीघर के कुशल श्रमिक का मोबाइल नंबर लेकर अधिकारी उसके घर तक जाकर खोजबीन कर रहे हैं

गीडा के उद्यमियों ने कहा, बंद न करना पड़ जाए उद्योग

बिजली की आवाजाही से उद्यमियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। लघु भारती के अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि मार्च क्लोजिंग के समय हड़ताल पर जाना बिलकुल अनुचित है। डीजल के खर्च पर फैक्ट्री चलाना नामुमकिन है। शासन -प्रशासन को अतिशीघ्र इस समस्या का समाधान करना पड़ेगा अन्यथा सभी उद्योगों को भी बंद करना पड़ेगा। बताया कि इस संबंध में मुख्य अभियंता आशु कालिया से बात भी हुई। उन्होंने आश्वासन दिया है कि प्रयास कर रहे हैं, दिक्कत न हो।

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बिजलीकर्मियों की प्रमुख मांगे
19 वर्ष की सेवा के बाद तीन प्रमोशन वेतनमान दिया जाए, निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत चेयरमैन, प्रबंध निदेशकों व निदेशकों के पदों पर चयन किया जाए, सभी बिजली कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाए, ट्रांसफॉर्मर वर्कशॉप के निजीकरण के आदेश वापस लिए जाएं, 765/400/220 केवी विद्युत उपकेंद्रों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से चलाने का निर्णय रद्द हों, पारेषण( ट्रांसमिशन) में जारी निजीकरण प्रक्रिया निरस्त की जाए, आगरा फ्रेंचाइजी व ग्रेटर नोएडा का निजीकरण रद्द किया जाए, ऊर्जा कर्मियों की सुरक्षा के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉइज प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो।



 

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