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क्रिकेट के तीनों प्रारूपों के लिए क्रिकेटर खुद को करें तैयार : वसीम जाफर
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- भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज वसीम जाफर ने अमर उजाला से की विशेष बातचीत
- क्रिकेट के कई मुद्दों पर खुलकर रखे विचार, कहा, टी-20 से टेस्ट नहीं वनडे क्रिकेट को है खतरा
गोरखपुर। क्रिकेट की दुनिया आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहां टी-20 की चकाचौंध और क्रिकेट के पारंपरिक खेल टेस्ट मैच के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। आईपीएल की शुरुआत ने खिलाड़ियों के कॅरिअर और प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या टी-20 की वजह से टेस्ट मैच और वनडे क्रिकेट अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। इन्हीं मुद्दों पर अमर उजाला संवाददाता ने भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज वसीम जाफर से खास बातचीत की। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को ही खिलाड़ी की असली कसौटी बताया। उन्होंने न केवल हार्दिक पांडया की ओर से उन्हें रोल मॉडल माने जाने पर खुशी जताई, बल्कि भारतीय टीम के भविष्य, चयन प्रक्रिया और टेस्ट मैचों में घरेलू मैदानों पर गिरते दबदबे पर भी अपनी बेबाक राय साझा की।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट का मूल स्वरूप टेस्ट क्रिकेट है, जो खिलाड़ी के कौशल, स्वभाव और फिटनेस की असली पहचान कराता है। यदि टेस्ट मैच रोमांचक हों और परिणाम दें तो दर्शक इसे पसंद करते रहेंगे। टी-20 क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ रही है क्योंकि यह कम समय में परिणाम देता है। 50 ओवर का प्रारूप सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि यह टेस्ट और टी-20 के बीच का संतुलन मांगता है और इसे जीवित रखना मुश्किल हो सकता है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आईपीएल जैसे टी-20 लीग में मिलने वाला पैसा, पहचान और मंच युवा खिलाड़ियों को आकर्षित करता है। कई खिलाड़ी आईपीएल के माध्यम से भारतीय टीम में जगह बना चुके हैं। युवा खिलाड़ियों को टी-20 को प्राथमिकता देते हुए भी टेस्ट और वनडे क्रिकेट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्हें खुद को क्रिकेट के तीनों प्रारूपों के अनुसार तैयार करना होगा।
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उन्होंने कहा कि भारत के पास 25-30 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का एक बड़ा पूल है, खासकर टी-20 प्रारूप में भारत आसानी से दो टीमें मैदान में उतार सकती है। भारत को घरेलू मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में अपना दबदबा वापस लाने की जरूरत है, जो हाल ही में कम हुआ है। आईपीएल के प्रदर्शन के आधार पर टेस्ट खिलाड़ियों का चयन नहीं करना चाहिए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को टेस्ट में और आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने वालों को टी-20 में मौका मिलना चाहिए। 50 ओवर के प्रारूप में खिलाड़ियों को यह समझने में दिक्कत होती है कि इसे कैसे खेलना है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह सुनकर अच्छा लगता है कि हार्दिक पांडया ने उन्हें अपना रोल मॉडल बताया है। वर्ष 2013 में भी उन्होंने मुझे अपना रोल मॉडल बताया था, इतने सालों बाद भी अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें वनडे में केवल दो मैच खेलने का मौका मिला, वह भी साउथ अफ्रीका की मुश्किल सीरीज में जहां भारतीय टीम 5-0 से प्रतियोगिता हार गई थी। उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उनकी पहचान टेस्ट क्रिकेट से थी।
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- क्रिकेट के कई मुद्दों पर खुलकर रखे विचार, कहा, टी-20 से टेस्ट नहीं वनडे क्रिकेट को है खतरा
गोरखपुर। क्रिकेट की दुनिया आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहां टी-20 की चकाचौंध और क्रिकेट के पारंपरिक खेल टेस्ट मैच के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। आईपीएल की शुरुआत ने खिलाड़ियों के कॅरिअर और प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या टी-20 की वजह से टेस्ट मैच और वनडे क्रिकेट अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। इन्हीं मुद्दों पर अमर उजाला संवाददाता ने भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज वसीम जाफर से खास बातचीत की। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को ही खिलाड़ी की असली कसौटी बताया। उन्होंने न केवल हार्दिक पांडया की ओर से उन्हें रोल मॉडल माने जाने पर खुशी जताई, बल्कि भारतीय टीम के भविष्य, चयन प्रक्रिया और टेस्ट मैचों में घरेलू मैदानों पर गिरते दबदबे पर भी अपनी बेबाक राय साझा की।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट का मूल स्वरूप टेस्ट क्रिकेट है, जो खिलाड़ी के कौशल, स्वभाव और फिटनेस की असली पहचान कराता है। यदि टेस्ट मैच रोमांचक हों और परिणाम दें तो दर्शक इसे पसंद करते रहेंगे। टी-20 क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ रही है क्योंकि यह कम समय में परिणाम देता है। 50 ओवर का प्रारूप सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि यह टेस्ट और टी-20 के बीच का संतुलन मांगता है और इसे जीवित रखना मुश्किल हो सकता है।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आईपीएल जैसे टी-20 लीग में मिलने वाला पैसा, पहचान और मंच युवा खिलाड़ियों को आकर्षित करता है। कई खिलाड़ी आईपीएल के माध्यम से भारतीय टीम में जगह बना चुके हैं। युवा खिलाड़ियों को टी-20 को प्राथमिकता देते हुए भी टेस्ट और वनडे क्रिकेट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्हें खुद को क्रिकेट के तीनों प्रारूपों के अनुसार तैयार करना होगा।
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उन्होंने कहा कि भारत के पास 25-30 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का एक बड़ा पूल है, खासकर टी-20 प्रारूप में भारत आसानी से दो टीमें मैदान में उतार सकती है। भारत को घरेलू मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में अपना दबदबा वापस लाने की जरूरत है, जो हाल ही में कम हुआ है। आईपीएल के प्रदर्शन के आधार पर टेस्ट खिलाड़ियों का चयन नहीं करना चाहिए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को टेस्ट में और आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने वालों को टी-20 में मौका मिलना चाहिए। 50 ओवर के प्रारूप में खिलाड़ियों को यह समझने में दिक्कत होती है कि इसे कैसे खेलना है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह सुनकर अच्छा लगता है कि हार्दिक पांडया ने उन्हें अपना रोल मॉडल बताया है। वर्ष 2013 में भी उन्होंने मुझे अपना रोल मॉडल बताया था, इतने सालों बाद भी अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें वनडे में केवल दो मैच खेलने का मौका मिला, वह भी साउथ अफ्रीका की मुश्किल सीरीज में जहां भारतीय टीम 5-0 से प्रतियोगिता हार गई थी। उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उनकी पहचान टेस्ट क्रिकेट से थी।