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गोरखपुर कचहरी परिसर: फैजाबाद की टीम बिछाएगी पेड़ों के नीचे जाल, वन विभाग करेगा पक्षियों की सुरक्षा का प्रबंध
Wed, 22 Sep 2021 02:01 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 22 Sep 2021 02:01 PM IST
सार
इनकी सुरक्षा के लिए टहनियों के नीचे जाल लगवाया जाएगा। कुछ समय बाद पक्षी खुद आशियाना बदल लेंगे।
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कचहरी परिसर में मौजूद पक्षी।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर कचहरी परिसर को अपना आशियाना बनाने वाले पक्षियों और उनके अंडों की सुरक्षा के लिए वन विभाग फैजाबाद से टीम बुलाकर पेड़ों की टहनियों के नीचे जाली लगवाएगा। डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पक्षियों को किसी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। यह समय उनके प्रजनन का है। बारिश-हवा के चलते कई पक्षियों के अंडे नीचे गिर जा रहे हैं। इनकी सुरक्षा के लिए टहनियों के नीचे जाल लगवाया जाएगा। कुछ समय बाद पक्षी खुद आशियाना बदल लेंगे।
प्राणि उद्यान के पशु चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि कचहरी परिसर के घने पेड़ों पर मुख्य रूप से नाइट हैरॉन (अंजन पक्षी), लिटिल कारर्मोरेंट (जलकाक-पनकौवा), कैटल एग्रेट (सफेद बगुला-गाय बगुला) पक्षियों ने अपना आशियाना बनाया है। इनकी उम्र 15 से 20 वर्ष के बीच होती है। कचहरी परिसर में आम, जामुन, पाकड़, बरगद, पीपल, गूलर समेत अन्य प्रजातियों के करीब 250 पेड़ हैं। इनमें कुछ 80 से सौ साल के पेड़ हैं। डॉ. योगेश प्रताप के अनुसार इन पक्षियों के शिकार का तरीका अलग-अलग होता है। कुछ पानी के अंदर डुबकी मारकर छोटी मछलियों का शिकार करते हैं तो कुछ रात के अंधेरे में शिकार करते हैं।
समस्या-गंदगी बढ़ी, प्रशासन जल्द करे समाधान
बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री प्रियनांद सिंह का कहना है कि पक्षियों की वजह से पूरा परिसर गंदगी की भेंट चढ़ गया है। प्रशासन को चाहिए कि जल्दी से जल्दी समस्या का समाधान करे। मंगलवार सुबह हुई बारिश के बाद कई अधिवक्ताओं के कपड़ों और सिर पर अंडे और मछलियां गिरीं। ऐसे माहौल में कार्य कर पाना मुश्किल हो रहा है।
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प्राणि उद्यान के पशु चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि कचहरी परिसर के घने पेड़ों पर मुख्य रूप से नाइट हैरॉन (अंजन पक्षी), लिटिल कारर्मोरेंट (जलकाक-पनकौवा), कैटल एग्रेट (सफेद बगुला-गाय बगुला) पक्षियों ने अपना आशियाना बनाया है। इनकी उम्र 15 से 20 वर्ष के बीच होती है। कचहरी परिसर में आम, जामुन, पाकड़, बरगद, पीपल, गूलर समेत अन्य प्रजातियों के करीब 250 पेड़ हैं। इनमें कुछ 80 से सौ साल के पेड़ हैं। डॉ. योगेश प्रताप के अनुसार इन पक्षियों के शिकार का तरीका अलग-अलग होता है। कुछ पानी के अंदर डुबकी मारकर छोटी मछलियों का शिकार करते हैं तो कुछ रात के अंधेरे में शिकार करते हैं।
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समस्या-गंदगी बढ़ी, प्रशासन जल्द करे समाधान
बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री प्रियनांद सिंह का कहना है कि पक्षियों की वजह से पूरा परिसर गंदगी की भेंट चढ़ गया है। प्रशासन को चाहिए कि जल्दी से जल्दी समस्या का समाधान करे। मंगलवार सुबह हुई बारिश के बाद कई अधिवक्ताओं के कपड़ों और सिर पर अंडे और मछलियां गिरीं। ऐसे माहौल में कार्य कर पाना मुश्किल हो रहा है।
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