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बाढ़ : उतरासोत गांव राप्ती के निशाने पर, ग्रामीणों में दहशत
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तेजी से बढ़ रहा राप्ती नदी का जलस्तर,राजघाट बैकुंण्ठ धाम के पास भरा पानी । संवाद
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- खतरे के निशान पर पहुंची राप्ती, सरयू 90 सेमी, रोहिन 80 सेमी ऊपर पहुंची
- गाहासाड़-कोलिया बांध के स्पर नंबर छह से आठ के बीच करीब 400 मीटर दूरी में हो रहा है कटान
- सीएम ने लिया संज्ञान, बंधे को बचाने के बाढ़ खंड के अफसर पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। करीब 15 साल बाद अचानक राप्ती की धारा कालेसर से डोमिनगढ़ की तरफ मुड़ गई है। इससे गीडा के नजदीक बसे गांव उतरासोत के सामने नदी तेजी से बांध की तरफ कटान करने लगी है। 24 घंटे में ही कटान करीब 400 मीटर लंबाई में शुरू हो गया है। इससे गाहासाड़-कोलिया तटबंध की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इससे आसपास के ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। मामले की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री तक पहुंची तो उनके निर्देश पर बाढ़ खंड के अफसर बंधे को बचाने की कवायद में जुट गए हैं।
इसके बाद बाढ़ खंड ने मौके पर रात-दिन बचाव कार्य शुरू कराया है। उधर, राप्ती नदी इस सीजन में पहली बार खतरे के निशान पर पहुंची है। वहीं रोहिन नदी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर और सरयू 90 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। इससे जिले में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बड़हलगंज इलाके में आठ गांव बाढ़ से घिर गए हैं। कैंपियरगंज इलाके में भी बांध का ड्रोन सर्वे कराया गया है।
राप्ती नदी बीते सप्ताह खतरे के निशान से साढ़े तीन मीटर नीचे थे। सोमवार से नेपाल में हो रही बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। शुक्रवार शाम चार बजे नदी खतरे के निशान से मात्र चार सेमी नीचे बह रही थी। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बताया देर शाम नदी खतरे के निशान से ऊपर पहंच गई। संतकबीरनगर जिले से गोरखपुर में प्रवेश कर रही राप्ती नदी कालेसर से डोमिनगढ़ की तरफ मुड़ जाती है। डोमिनगढ़ पुल के पास रोहिन नदी इसमें मिलती है। इसके बाद नदी फिर नौसड़ की तरफ आती है। कालेसर से नौसड़ के बीच नदी अंग्रेजी के अक्षर एस के आकार में बहती है।
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ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2012 के बाद पहली बार नदी में कालेसर से डोमिनगढ़ की तरफ बहाव तेज हुआ है। इसके चलते ही उतरासोत गांव के सामने बृहस्पतिवार को ठोकर नंबर 6 के सामने कटान शुरू हुआ था। शुक्रवार को कटान बढ़कर ठोकर नंबर सात व आठ के बीच तक फैल गया। गाहासाड़-कोलिया तटबंध के समीप बसे उतरासोत गांव के पास नदी ने कटान शुरू किया तो इसकी सूचना सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी जाने के बाद प्रशासनिक अमला भी हरकत में आ गया। सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं। वहां बांस, पेड़ की टहनी के अलावा ईंट के टुकड़ों को लोहे की जाली में भरकर कटान वाली जगह पर गिराया जा रहा है, जिससे कि कटान को रोका जा सके। बंधे पर दो दो जनरेटर लगाकर रात में भी कार्य कराया जा रहा है। विभाग का दावा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
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रोहिन-सरयू का पानी भी भर रहा है निचले इलाकों में
सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। बरहज में नदी खतरे के निशान से 90 सेमी ऊपर बह रही है। वहीं रोहिन नदी तिनमुहानी घाट पर खतरे के निशान से 80 सेमी जबकि भौराबारी में 18 सेमी ऊपर पहुुच गई है। राप्ती की सहयोगी गोर्रा नदी भी बढ़ने लगी है।
वर्जन
उतरासोत गांव के पास नदी जहां कटान कर रही थी, उसका दायरा कुछ बढ़ गया है। 400 मीटर के दायरे में कटान निरोधक कार्य कराया जा रहा है। रात में कार्य कराने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए दो जनरेटर लगाया गया है।
केपी सिंह, अधीक्षण अभियंता- सिंचाई विभाग
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- गाहासाड़-कोलिया बांध के स्पर नंबर छह से आठ के बीच करीब 400 मीटर दूरी में हो रहा है कटान
- सीएम ने लिया संज्ञान, बंधे को बचाने के बाढ़ खंड के अफसर पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। करीब 15 साल बाद अचानक राप्ती की धारा कालेसर से डोमिनगढ़ की तरफ मुड़ गई है। इससे गीडा के नजदीक बसे गांव उतरासोत के सामने नदी तेजी से बांध की तरफ कटान करने लगी है। 24 घंटे में ही कटान करीब 400 मीटर लंबाई में शुरू हो गया है। इससे गाहासाड़-कोलिया तटबंध की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इससे आसपास के ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। मामले की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री तक पहुंची तो उनके निर्देश पर बाढ़ खंड के अफसर बंधे को बचाने की कवायद में जुट गए हैं।
इसके बाद बाढ़ खंड ने मौके पर रात-दिन बचाव कार्य शुरू कराया है। उधर, राप्ती नदी इस सीजन में पहली बार खतरे के निशान पर पहुंची है। वहीं रोहिन नदी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर और सरयू 90 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। इससे जिले में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बड़हलगंज इलाके में आठ गांव बाढ़ से घिर गए हैं। कैंपियरगंज इलाके में भी बांध का ड्रोन सर्वे कराया गया है।
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राप्ती नदी बीते सप्ताह खतरे के निशान से साढ़े तीन मीटर नीचे थे। सोमवार से नेपाल में हो रही बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। शुक्रवार शाम चार बजे नदी खतरे के निशान से मात्र चार सेमी नीचे बह रही थी। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बताया देर शाम नदी खतरे के निशान से ऊपर पहंच गई। संतकबीरनगर जिले से गोरखपुर में प्रवेश कर रही राप्ती नदी कालेसर से डोमिनगढ़ की तरफ मुड़ जाती है। डोमिनगढ़ पुल के पास रोहिन नदी इसमें मिलती है। इसके बाद नदी फिर नौसड़ की तरफ आती है। कालेसर से नौसड़ के बीच नदी अंग्रेजी के अक्षर एस के आकार में बहती है।
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ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2012 के बाद पहली बार नदी में कालेसर से डोमिनगढ़ की तरफ बहाव तेज हुआ है। इसके चलते ही उतरासोत गांव के सामने बृहस्पतिवार को ठोकर नंबर 6 के सामने कटान शुरू हुआ था। शुक्रवार को कटान बढ़कर ठोकर नंबर सात व आठ के बीच तक फैल गया। गाहासाड़-कोलिया तटबंध के समीप बसे उतरासोत गांव के पास नदी ने कटान शुरू किया तो इसकी सूचना सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जानकारी मांगी जाने के बाद प्रशासनिक अमला भी हरकत में आ गया। सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं। वहां बांस, पेड़ की टहनी के अलावा ईंट के टुकड़ों को लोहे की जाली में भरकर कटान वाली जगह पर गिराया जा रहा है, जिससे कि कटान को रोका जा सके। बंधे पर दो दो जनरेटर लगाकर रात में भी कार्य कराया जा रहा है। विभाग का दावा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
रोहिन-सरयू का पानी भी भर रहा है निचले इलाकों में
सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। बरहज में नदी खतरे के निशान से 90 सेमी ऊपर बह रही है। वहीं रोहिन नदी तिनमुहानी घाट पर खतरे के निशान से 80 सेमी जबकि भौराबारी में 18 सेमी ऊपर पहुुच गई है। राप्ती की सहयोगी गोर्रा नदी भी बढ़ने लगी है।
वर्जन
उतरासोत गांव के पास नदी जहां कटान कर रही थी, उसका दायरा कुछ बढ़ गया है। 400 मीटर के दायरे में कटान निरोधक कार्य कराया जा रहा है। रात में कार्य कराने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए दो जनरेटर लगाया गया है।
केपी सिंह, अधीक्षण अभियंता- सिंचाई विभाग