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Gorakhpur News: पहले मूल्यांकन फिर धुरियापार चीनी मिल पर अदाणी की सीमेंट फैक्टरी

Wed, 31 Jul 2024 07:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jul 2024 07:07 AM IST
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First evaluation then Adani's cement factory at Dhuriyapar sugar mill
गोरखपुर। अदाणी समूह को सीमेंट फैक्टरी लगाने के लिए दी जाने वाली धुरियापार चीनी मिल की जमीन व कल-पुर्जाें का अलग-अलग मूल्यांकन होगा। जमीन का मुआवजा आसपास के सर्किल रेट के चार गुना होगा, जबकि कल-पुर्जों का मूल्यांकन उनकी वर्तमान स्थिति के अनुसार किया जाएगा।
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गन्ना विभाग की सहमति के बाद अब शासन से मूल्यांकन की अनुमति मिलने का इंतजार है। इसके बाद कैबिनेट की बैठक में चीनी मिल परिसर को गीडा प्रशासन के अधीन आने वाले धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में शामिल कर लिया जाएगा। इसके बाद इसे अदाणी समूह को हस्तांतरित किया जाएगा।
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धुरियापार औद्योगिक इलाके में अदाणी समूह ने सीमेंट फैक्टरी लगाने के लिए जगह मांगी थी। इसके लिए बंद पड़ी चीनी मिल के परिसर को ही प्रस्तावित किया गया है। यह जमीन करीब 55 एकड़ है। अदाणी समूह ने भी इतनी ही जमीन की डिमांड की थी। गीडा प्रशासन ने लोकसभा चुनाव से पहले इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। शासन ने यह जमीन गन्ना विभाग की होने के चलते उनसे सहमति मांगी थी। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद गन्ना विभाग ने भी एनओसी दे दी है।
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चीनी मिल की खाली पड़ी जमीन के लिए अगल-बगल के सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा बनाया जाएगा। वहीं मकान और फैक्टरी में लगे उपकरणों को उनकी वर्तमान स्थिति व भविष्य की संभावना को देखते हुए अलग रेट तय होगा। फिर सभी को एकत्रित कर राजस्व विभाग की तरफ से डिमांड भेजी जाएगी। उसके आधार पर गीडा प्रशासन गन्ना विभाग के खाते में रुपये भेज देगा। इसके बाद गीडा प्रशासन इस पूरी जमीन का अधिग्रहण कर अदाणी समूह को आवंटित करेगा।



किसानों से सहमति के लिए आज होगी बैठक



अदाणी समूह को आवंटित होने वाली धुरियापार चीनी मिल की जमीन को लेकर कुछ किसानों को आपत्तियां हैं। बताया जा रहा है कि आपत्ति करने वाले किसानों की जमीन धुरियापार चीनी मिल परिसर से सटे ही है। अदाणी समूह को जमीन आवंटित किए जाने पर ये किसान सीधे प्रभावित होंगे। इसलिए प्रशासन पहले ही इन किसानों से बात कर लेना चाहता है। इसके लिए बुधवार को एसडीएम गोला की अध्यक्षता में किसानों की बैठक होगी। इस बैठक में अदाणी समूह की तरफ से भी एक प्रतिनिधि के आने की संभावना है। प्रयास होगा कि किसानों से भी भूमि अधिग्रहण की सहमति मिल जाए, ताकि शासन की सहमति मिलने पर कैबिनेट को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में उन किसानों को भी शामिल किया जा सके।


वर्जन



गीडा के प्रस्ताव पर गन्ना विभाग की सहमति मिल चुकी है। अब शासन स्तर से चीनी मिल व परिसर के मूल्यांकन के लिए निर्देश मिलना बाकी है। यहां जमीन की कीमत सर्किल रेट से चार गुना अधिक दी जा रही है। कल-पुर्जों और भवन आदि की कीमत तय होने पर गन्ना विभाग को उतने रुपये भेज दिए जाएंगे। इसके बाद यह जमीन गीडा प्रशासन अदाणी समूह को दे देगा।



- अनुज मलिक, सीईओ गीडा
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