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Gorakhpur News: घर और स्कूल की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहीं महिला शिक्षिकाएं

Sat, 05 Sep 2026 02:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sat, 05 Sep 2026 02:20 AM IST
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Female teachers balancing the dual responsibilities of home and school.
गोरखपुर। आज के समय में शिक्षक की भूमिका सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। उस पर यदि शिक्षिका महिला हो तो चुनौती और भी बढ़ जाती है। विद्यालयों में तैनात महिला शिक्षिकाएं इस दोहरी चुनौती को बखूबी स्वीकार कर रही हैं। सुबह-तड़के घर संभालना, फिर स्कूल में पूरे दिन बच्चों को संभालना और शाम को फिर परिवार की जिम्मेदारी में जुट जाना, यही उनकी रोजमर्रा की हकीकत बन गई है।
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इन शिक्षिकाओं के अनुभव बताते हैं कि किस तरह नारी शक्ति अपने समर्पण, ममता और बेहतरीन समय प्रबंधन के दम पर घर और स्कूल की दोहरी भूमिका को एक साथ निभा रही है। प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रंजना सिंह बताती हैं कि एक महिला शिक्षिका होने के नाते जिम्मेदारी बहुत व्यस्त और चुनौती भरी होती है। जब वे स्कूल में होती हैं तो उनकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल के बच्चे होते हैं। बच्चों को पढ़ाना, उनकी उपस्थिति, मध्याह्न भोजन, साफ-सफाई से लेकर अभिभावकों से संवाद तक सब देखना पड़ता है। वहीं जब घर पर होती हैं तो पूरा घर, परिवार और अपने बच्चे उनकी जिम्मेदारी बन जाते हैं। वे कहती हैं, स्कूल में बच्चों का भविष्य और अच्छे संस्कार सिखाने की जिम्मेदारी है, वहीं घर लौटकर परिवार की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है। इसी तरह हम शिक्षिका होने के साथ-साथ मां, पत्नी, बेटी और बहू की जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा लेते हैं।
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घंटी बजते ही मां से बन जाती हैं कुशल शिक्षिका

वहीं शिक्षिका अंशु बताती हैं कि स्कूल की घंटी बजते ही वे ममतामयी मां से कुशल शिक्षिका बन जाती हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि बच्चों के मन से अज्ञानता का अंधेरा मिटाती हैं। अनुशासन, नैतिक मूल्य और आत्मविश्वास के बीज बोकर उन्हें कल का बेहतर नागरिक बनाने का प्रयास करती हैं। अंशु कहती हैं, स्कूल में मेरी प्राथमिकता बच्चे और उनका भविष्य होता है, जबकि घर लौटते ही पूरा ध्यान परिवार पर केंद्रित हो जाता है। मैं स्कूल के अगले दिन की तैयारी रात को ही कर लेती हूं, जिससे बच्चों को और बेहतर पढ़ा सकूं। समय का सही प्रबंधन ही इस दोहरी भूमिका को आसान बनाता है।
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घर परिवार की शक्ति तो विद्यालय कर्मभूमि

डॉ. रेखा श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह की पहली किरण से रात की अंतिम जिम्मेदारी तक उनका जीवन समय प्रबंधन, समर्पण और निरंतर प्रयास है। एक शिक्षिका, पत्नी और मां के रूप में वे घर और विद्यालय दोनों को संभाल रही हैं। घर की आवश्यकताओं को संभालते हुए विद्यालय के कार्यों की तैयारी, कक्षा में पूरी ऊर्जा से शिक्षण और विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन देना उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है। विद्यालय से लौटने के बाद फिर परिवार और अगले दिन की तैयारी ही जीवनशैली बन गई है।
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