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Gorakhpur Weather: खुशनुमा मौसम में किसानों की नींद उड़ी, आगे शहरियों की भी उड़ेगी

Mon, 03 Apr 2023 11:16 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 03 Apr 2023 11:16 AM IST
सार

कृषि वैज्ञानिक अजय सिंह ने कहा कि अगर तेज हवाओं के साथ बारिश होती है तो गेहूं की फसल को 60 प्रतिशत तक नुकसान होता है, लेकिन पिछले सप्ताह जितनी बारिश हुई है, उससे गेहूं की फसल को पांच से छह प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है।

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Farmer upset after change Gorakhpur Weather
weather news - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खुशनुमा मौसम ने किसानों की नींद उड़ा दी है। वह फसल बर्बाद होने से परेशान हैं। इसका असर शहरियों पर भी पड़ेगा। गेहूं, अरहर के साथ सब्जी महंगी होगी तो सबकी जेबों पर असर पड़ेगा।

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दरअसल, पिछले सप्ताह हुई बारिश से गेहूं, दलहन, तिलहन की फसल को नुकसान पहुंचा है। सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी नुकसान हुआ है। फूल गिरने से सब्जियां तैयार नहीं हो सकी हैं। उन्हें फिर से तैयार होने में कम से कम 10 दिन का समय और लगेगा। ऐसे में आने वाले समय में गेहूं, दाल, तेल महंगा होने का अनुमान है। क्षेत्र की सब्जियों के आवक में देरी से कुछ और दिनों तक महंगी सब्जियां खरीदनी पड़ेगी।
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अप्रैल की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने दस्तक दे दी। तापमान 37 डिग्री तक पहुंच चुका था, लेकिन जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई बर्फबारी से मौसम का मिजाज बदल गया। पहाड़ों में बर्फबारी के बाद चल रही पछुआ हवाएं मैदान के मौसम को सुहाना दिया है। दिन के तापमान में करीब आठ डिग्री की गिरावट आई है। दिन के सामान्य तापमान 36 डिग्री की तुलना में 28 डिग्री दर्ज किया गया।

इस खुशनुमा मौसम का लोग खूब लुत्फ भी उठा रहे हैं, लेकिन यह मौसम किसानों के लिए तकलीफदेह साबित हो रहा है। बारिश की हर बूंदों के साथ उनकी दिल की धड़कनें बढ़ जा रही है। अगर आने वाले 10-15 दिनों में बारिश हो जाती है तो किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ेगा।
 

बारिश से पांच से छह प्रतिशत गेहूं की फसल को नुकसान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर गेहूं की फसल मार्च के अंतिम सप्ताह से 15 अप्रैल तक पूरी तरह से पक जाता है। इसी दौरान गेहूं की कटाई भी हो जाती है। यह समय रबी फसल के खत्म होने और जायद (गर्मी की फसल) के लिए काफी संवेदनशील होता है। इस दौरान अगर बारिश हो जाए तो गेहूं की फसल को नुकसान होता है। पिछले सप्ताह हुई बेमौसम बारिश की वजह से किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ गेहूं की फसल में पांच से छह प्रतिशत नुकसान की आशंका है।

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दरअसल गोरखपुर जिले के दक्षिण इलाकों में पिछले सप्ताह करीब सात से नौ मिलीमीटर बारिश हुई। इसकी वजह से किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ा है। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुई है। गगहा के डांगीपार इलाके के रामदुलारे ने कहा कि पिछले सप्ताह दो दिन हुई हल्की बारिश की वजह से उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ा है। गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई है। दाने झड़ गए हैं। खेत में नमी भी है। इसलिए कंबाइन से कटाई नहीं हो पाएगी। प्रति बीघा कम से कम दो से तीन क्विंटल तक गेहूं का नुकसान होगा।

वहीं, भरोहिया ब्लॉक के करतहरी निवासी किसान राधेश्याम गिरी ने कहा कि बारिश के साथ चली पछुआ हवाओं की वजह से गेहूं के दाने पतले हो गए हैं। काले भी पड़ गए हैं। प्रति बीघा के हिसाब से उत्पादन की बात करें तो एक क्विंटल तक नुकसान की आशंका है। नमी होने की वजह से गेहूं को बहुत दिनों तक घर में रख भी नहीं सकते। जल्द बिक्री करनी पड़ेगी।

सब्जियों के फूलों के गिरने से आवक में होगी देरी

कृषि वैज्ञानिक अजय सिंह ने कहा कि अगर तेज हवाओं के साथ बारिश होती है तो गेहूं की फसल को 60 प्रतिशत तक नुकसान होता है, लेकिन पिछले सप्ताह जितनी बारिश हुई है, उससे गेहूं की फसल को पांच से छह प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है।

गोरखपुर में आसपास के इलाकों से भिंडी, करैला, लौकी, नेनुआ, तरबूज, खरबूज आदि सब्जियों और फल की खेती होती है, लेकिन बृहस्पतिवार और शुक्रवार को हुई बारिश की वजह से सब्जियों को भी नुकसान की आशंका है। कृषि विशेषज्ञ अजय सिंह ने बताया कि इस बारिश की वजह से काफी मात्रा में सब्जियों के फूल गिर गए हैं। इससे आवक में देरी होगी।

महेवा मंडी के थोक सब्जी विक्रेता शम्स तबरेज और अवध गुप्ता ने बताया कि इस समय मध्यप्रदेश, बंगाल से भिंडी, परवल आदि आ रही रही हैं। ऐसे में कीमत ज्यादा है। थोक भाव में करीब 40 रुपये की दर से भिंडी और 50 रुपये की दर से नेनुआ बिक रहा है। आसपास क्षेत्र से सब्जियों के आवक के बाद इनकी कीमतों में कमी आएगी। थोक भाव में सब्जियों की कीमतें आधी हो जाती है।
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