कभी चावल की मंडी से गुलजार होता था फरेंदा का चौरहिया गोला, बैलगाड़ी पर चावल लादकर मंडी में पहुंचते थे किसान
महराजगंज जिले के फरेंदा कस्बे का चौरहिया गोला कभी चावल की महक से गुलजार रहता था। जहां पर पड़ोस के दर्जनों जिलों के किसान व व्यापारी अपने अनाज को बेचने व खरीदने के लिए पहुंचते थे। आजादी के पहले से ही फरेंदा के चावल मंडी का अपना अलग महत्व हुआ करता था। वह अब गल्ला मंडी के निर्माण के बाद से चौरहिया गोला अनाज का बाजार पूरी तरह से खतम हो गया।
महराजगंज जिले के फरेंदा कस्बे के वार्ड नंबर चार वर्तमान में चौरहिया गोला के नाम से जाना जाता है। भले ही आज वहां पर चावल न बिकता हो लेकिन कभी सिद्धार्थनगर के बर्डपुर, नौगढ़ व संतकबीरनगर, गोरखपुर, बस्ती, देवरिया सहित कई अन्य जिलो के किसान अपने अनाज का वाजिब दाम मिले इसके लिए फरेंदा पहुंचते थे।
आजादी के पहले करीब 200 किसान अपने बैलगाड़ी पर चावल लाद कर मंडी में पहुंचते थे। बर्डपुर व नौगढ़ के कालानमक की खूश्बू से पूरा क्षेत्र महकता था। वही गेंहू व अरहर, मसूर की बड़ी खेप लेकर बुधवार के दिन बाजार में बेचने के लिए पहुंचते थे।
बुधवार का बाजार आज भी फरेंदा के लिए चर्चित बाजारो में सुमार किया जाता है। 1970 के बाद चौरहिया गोला की देखभाल कस्बे के मूलचंद व ओमप्रकाश उर्फ लल्ला गल्ला वाले देखते थे। मंडी समिति का निर्माण तो करीब 1976 में होने के बाद भी चावल की मंडी चौरहिया गोला में ही लगती थी। बाद में काफी प्रयास के बाद 1990 के करीब चावल की मंडी को गल्ला मंडी समिति में स्थानान्तरित किया गया।
फरेंदा में वर्तमान में भी चावल, सब्जी व गुड़ की बड़ी मंडी बुधवार को लगती है। जहां पर कई जिले के लोग पहुंचते हैं। मूलचंद ने बताया कि चावल की बड़ी मंडी लगने के कारण वार्ड का नाम भी चौरहिया गोला के नाम से जाना जाने लगा।
नगर पंचायत अध्यक्ष राजेश जायसवाल ने कहा कि चौरहिया गोला चावल की मंडी के लिए मशहूर हुआ करता था। गुजरे वक्त एवं वर्तमान में बहुत अंतर हो गया है।