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Gorakhpur News: साइबर ठगी की रकम खपाने के लिए खोले जाते थे फर्जी मर्चेंट खाते

Fri, 12 Jun 2026 02:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 02:33 AM IST
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Fake merchant accounts were opened to launder proceeds from cyber fraud.
गोरखपुर। दीवान बाजार से संचालित साइबर ठगी नेटवर्क की जांच में पुलिस को साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेन-देन के अहम सुराग मिले हैं। मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण में कई ऐसे खाते सामने आए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में साइबर शिकायतें दर्ज हैं। जांच एजेंसियां अब इन खातों के जरिये धन के प्रवाह और उससे जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही है।
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साइबर नोडल अधिकारी की जांच में एक बैंक खाते पर 38 शिकायतें और 3.82 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध धनराशि मिली। दूसरे खाते में 29 शिकायतों के साथ 3.29 लाख रुपये से अधिक का लेन-देन सामने आया। एक अन्य खाते में 16 शिकायतों के साथ करीब 90 हजार रुपये की संदिग्ध राशि दर्ज मिली। इसके अलावा दो खातों में क्रमश: 2.05 लाख और 43 हजार रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
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पूछताछ में संकेत राय ने बताया कि गिरोह विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर फर्जी पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर मर्चेंट खाते बनाता था। पहचान और पते के सत्यापन के लिए विशेष अनुप्रयोगों का इस्तेमाल किया जाता था। तैयार क्यूआर कोड बाद में संबंधित लोगों को उपलब्ध कराए जाते थे, जिनका इस्तेमाल धन के लेन-देन में होता था। यही नहीं, पुलिस ने भारत सरकार के समन्वय पोर्टल पर खातों को डाला तो 98 साइबर फ्रॉड की शिकायतें अलग-अलग शहरों से इन खातों के खिलाफ दर्ज थी। यह रकम लाखों में हैं।
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जांच में पता चला कि क्योंकि ये लोग मर्चेंट अकाउंट का इस्तेमाल करते थे, इस वजह से क्यूआर से रुपये गूगल पे या फोन पे के खाते में जाते और फिर म्यूल खाते में आते थे, इस वजह से साइबर पुलिस इन्हें फ्रीज भी नहीं कर पाती थी और आसानी से इस्तेमाल कर लेते थे।

मोबाइल और ई-मेल की संख्या बढ़ाकर छिपाते थे पहचान
जांच में सामने आया कि एक मोबाइल नंबर और एक ई-मेल पते से सीमित संख्या में ही मर्चेंट खाते बनाए जा सकते थे। इसी वजह से गिरोह बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और अलग-अलग ई-मेल पतों का उपयोग करता था। पहचान छिपाने के लिए कई उपकरणों का डाटा समय-समय पर मिटा दिया जाता था। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई समूहों और निजी संवादों के रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खातों, ई-मेल पतों और मर्चेंट क्यूआर कोड के आदान-प्रदान के प्रमाण मौजूद हैं। कई आवाज संदेशों में कामकाज से जुड़े निर्देश भी मिले हैं। जांच टीम ने इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया है।

हिस्ट्रीशीटर मकान मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में
पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया है कि जिस कमरे से नेटवर्क संचालित किया जा रहा था, उसके मकान मालिक कोतवाली थाने के हिस्ट्रीशीटर अभिषेक उर्फ पंकज राय को गतिविधियों की जानकारी थी। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है। उधर, इस पूरे गिरोह में महत्वपूर्ण कड़ी निभाने वाले हिमांशु सिंह व कुंदन की तलाश भी तेज कर दी गई है। इन लोगों की मदद से ही संकेत राय को काम मिलता था और फिर इन्हीं के जरिये ही संकेत क्यूआर बनाकर उसे भेजा करता था।



इनको बनाया गया नामजद आरोपी
बिहार के मेरवा निवासी हिमांशु सिंह, गोपालगंज, मीरगंज के शाहजात, सीवान के संदीप जायसवाल, कुंदन गुप्ता, पंकज राय, उज्ज्वल, राहुल मिश्रा,अनुज पंडित, अंकित गुप्ता, राज सिंह, संकेत राय, तौहिद आलम को आरोपी बनाया गया है।

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