Gorakhpur News: बाढ़-भूकंप में फंसे हैं तो भी इलाज का टेंशन नहीं...ड्रोन से झट पहुंचेंगी दवाएं
आरएमआरसी वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि पहला प्रयोग सफल होने के बाद अब आरएमआरसी इसका अन्य दुर्गम इलाकों में भी परीक्षण करेगा। हिमाचल की आठ अन्य पीएचसी पर भी दवाएं भेजी जाएंगी। इन पीएचसी की अपने जिला मुख्यालय से दूरी 40-45 किमी तक है। परीक्षण पूरी तरह से सफल होने के बाद इसे मैदानी इलाकों में भी लागू किया जाएगा।
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बाढ़-भूकंप सहित अन्य आपदाओं में जहां पहुंच पाना मुश्किल है, अब वहां ड्रोन से दवा, इंजेक्शन व इलाज से संबंधित अन्य सामान बड़ी आसानी से भेजे जा सकेंगे। यह संभव करके दिखाया है आरएमआरसी (रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर) गोरखपुर की हिमाचल प्रदेश स्थित फील्ड टीम ने।
इस टीम ने बुधवार को कीलांग से 18 किलोमीटर दूर 12000 फिट की ऊंचाई पर स्थित थोलांग पीएचसी में आठ मिनट में ही ड्रोन की मदद से टेबलेट व कफ सीरप भेज दिया। उसी ड्रोन से वापस ब्लड सैंपल मंगा लिए। इस सफल प्रयोग को दिल्ली आईसीएमआर के डीजी डॉ. राजीव बहल के साथ ही पूरे देश के डॉक्टरों ने देखा और सराहा।
पहाड़ों पर अक्सर ही भूस्खलन या तेज बारिश के चलते आवागमन बाधित हो जाता है। वहीं मैदानी इलाकों में भी बाढ़ के कारण कई इलाके सड़क मार्ग से कट जाते हैं। ऐसे इलाकों में बीमार लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में काफी दिक्कतें आती हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्थित आरएमआरसी (रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर) गोरखपुर को संकट में फंसे लोगों तक बिना सेना की मदद से जरूर दवाएं पहुंचाने का एक प्रोजेक्ट मिला था। इस प्रोजेक्ट का परीक्षण हिमाचल प्रदेश स्थित कीलांग में बुधवार को किया गया। इस दौरान ड्रोन से टेबलेट व सीरप, कीलांग जिला अस्पताल से 18 किमी दूर स्थित पीएचसी थोलांग पर सफलतापूर्वक भेजा गया।
उसी पीएचसी से ब्लड व स्पूटम सैंपल को जिला अस्पताल वापस मंगाया गया। जिला अस्पताल से पीएचसी तक दवा भेजने में केवल आठ मिनट का वक्त लगा। दवा भेजने व सैंपल मंगाने की पूरी प्रक्रिया केवल 26 मिनट में पूरी की गई। जिस पीएचसी पर ड्रोन से दवाएं भेजी गईं, वह लगभग 12000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ड्रोन ने इसके लिए लगभग 15000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरी।
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जहां यह परीक्षण किया गया, वहां तापमान माइनस 10 डिग्री से लेकर माइनस 15 डिग्री तक था। कीलांग मुख्यालय से थोलांग पीएचसी पर सामान्य दिनों में आने जाने में डेढ़ घंटे का वक्त लगता है। बारिश व बर्फबारी के दौरान 3 से 4 घंटे लग जाते हैं। कई बार सड़क बंद भी हो जाती है, जिसके चलते कई दिन तक लोग परेशान होते हैं।
इतनी ऊंचाई पर पहली बार किया गया परीक्षण
आरएमआरसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी ऊंचाई पर बिना सेना की मदद लिए यह पहला अवसर है। इस प्रयोग की सफलता के बाद दुर्गम इलाके में दवा पहुंचाने के काम में और नए प्रयोग किए जाएंगे। इस परीक्षण को डीजी आईसीएमआर डॉ. राजीव बहल ने दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से देखा। इसके अलावा आईसीएमआर के सभी संस्थान भी वर्चुअल जुड़े रहे।
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एसपी कीलांग मयंक चौधरी, डीएफओ स्पीती अनिकेत, मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज कीलांग डॉ. अजय ठाकुर व अन्य लोग उपस्थित रहे। परीक्षण सफल होने पर ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ. अनु नागर ने पूरी टीम को बधाई दी। इस दौरान आरएमआरसी गोरखपुर से डॉ. अशोक पांडेय, आईसीएमआर हेडक्वार्टर से डॉ सुमित अग्रवाल और आरएमआरसी कीलांग फील्ड स्टेशन डॉ. तनुजा मिश्रा मौजूद रहीं।