फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   trapped in flood earthquake medicines will reach you instantly through drones

Gorakhpur News: बाढ़-भूकंप में फंसे हैं तो भी इलाज का टेंशन नहीं...ड्रोन से झट पहुंचेंगी दवाएं

Fri, 20 Oct 2023 09:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर।
उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 20 Oct 2023 09:59 AM IST
सार

आरएमआरसी वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि पहला प्रयोग सफल होने के बाद अब आरएमआरसी इसका अन्य दुर्गम इलाकों में भी परीक्षण करेगा। हिमाचल की आठ अन्य पीएचसी पर भी दवाएं भेजी जाएंगी। इन पीएचसी की अपने जिला मुख्यालय से दूरी 40-45 किमी तक है। परीक्षण पूरी तरह से सफल होने के बाद इसे मैदानी इलाकों में भी लागू किया जाएगा।

विज्ञापन
trapped in flood earthquake medicines will reach you instantly through drones
आरएमआरसी की टीम ने दवाएं पहुंचाने का किया सफल ट्रायल।

विस्तार

बाढ़-भूकंप सहित अन्य आपदाओं में जहां पहुंच पाना मुश्किल है, अब वहां ड्रोन से दवा, इंजेक्शन व इलाज से संबंधित अन्य सामान बड़ी आसानी से भेजे जा सकेंगे। यह संभव करके दिखाया है आरएमआरसी (रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर) गोरखपुर की हिमाचल प्रदेश स्थित फील्ड टीम ने।

विज्ञापन


इस टीम ने बुधवार को कीलांग से 18 किलोमीटर दूर 12000 फिट की ऊंचाई पर स्थित थोलांग पीएचसी में आठ मिनट में ही ड्रोन की मदद से टेबलेट व कफ सीरप भेज दिया। उसी ड्रोन से वापस ब्लड सैंपल मंगा लिए। इस सफल प्रयोग को दिल्ली आईसीएमआर के डीजी डॉ. राजीव बहल के साथ ही पूरे देश के डॉक्टरों ने देखा और सराहा।
विज्ञापन


पहाड़ों पर अक्सर ही भूस्खलन या तेज बारिश के चलते आवागमन बाधित हो जाता है। वहीं मैदानी इलाकों में भी बाढ़ के कारण कई इलाके सड़क मार्ग से कट जाते हैं। ऐसे इलाकों में बीमार लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में काफी दिक्कतें आती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: पूर्वांचल एक्सप्रेस की बोगी से जीएसटी ने बरामद किए 74 पेटी अवैध माल

बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्थित आरएमआरसी (रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर) गोरखपुर को संकट में फंसे लोगों तक बिना सेना की मदद से जरूर दवाएं पहुंचाने का एक प्रोजेक्ट मिला था। इस प्रोजेक्ट का परीक्षण हिमाचल प्रदेश स्थित कीलांग में बुधवार को किया गया। इस दौरान ड्रोन से टेबलेट व सीरप, कीलांग जिला अस्पताल से 18 किमी दूर स्थित पीएचसी थोलांग पर सफलतापूर्वक भेजा गया।


 

उसी पीएचसी से ब्लड व स्पूटम सैंपल को जिला अस्पताल वापस मंगाया गया। जिला अस्पताल से पीएचसी तक दवा भेजने में केवल आठ मिनट का वक्त लगा। दवा भेजने व सैंपल मंगाने की पूरी प्रक्रिया केवल 26 मिनट में पूरी की गई। जिस पीएचसी पर ड्रोन से दवाएं भेजी गईं, वह लगभग 12000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ड्रोन ने इसके लिए लगभग 15000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरी।

इसे भी पढ़ें: बाढ़-भूकंप में फंसे हैं तो भी इलाज का टेंशन नहीं...ड्रोन से झट पहुंचेंगी दवाएं

जहां यह परीक्षण किया गया, वहां तापमान माइनस 10 डिग्री से लेकर माइनस 15 डिग्री तक था। कीलांग मुख्यालय से थोलांग पीएचसी पर सामान्य दिनों में आने जाने में डेढ़ घंटे का वक्त लगता है। बारिश व बर्फबारी के दौरान 3 से 4 घंटे लग जाते हैं। कई बार सड़क बंद भी हो जाती है, जिसके चलते कई दिन तक लोग परेशान होते हैं।
 

इतनी ऊंचाई पर पहली बार किया गया परीक्षण

आरएमआरसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी ऊंचाई पर बिना सेना की मदद लिए यह पहला अवसर है। इस प्रयोग की सफलता के बाद दुर्गम इलाके में दवा पहुंचाने के काम में और नए प्रयोग किए जाएंगे। इस परीक्षण को डीजी आईसीएमआर डॉ. राजीव बहल ने दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से देखा। इसके अलावा आईसीएमआर के सभी संस्थान भी वर्चुअल जुड़े रहे।

इसे भी पढ़ें: हनी ज्वेलर्स के स्टाफ की पिटाई पर विरोध, व्हाट्सएप ग्रुप पर पोस्ट से खलबली

एसपी कीलांग मयंक चौधरी, डीएफओ स्पीती अनिकेत, मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज कीलांग डॉ. अजय ठाकुर व अन्य लोग उपस्थित रहे। परीक्षण सफल होने पर ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ. अनु नागर ने पूरी टीम को बधाई दी। इस दौरान आरएमआरसी गोरखपुर से डॉ. अशोक पांडेय, आईसीएमआर हेडक्वार्टर से डॉ सुमित अग्रवाल और आरएमआरसी कीलांग फील्ड स्टेशन डॉ. तनुजा मिश्रा मौजूद रहीं।
 

अभी और आठ पीएचसी पर होगा परीक्षण

आरएमआरसी वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि पहला प्रयोग सफल होने के बाद अब आरएमआरसी इसका अन्य दुर्गम इलाकों में भी परीक्षण करेगा। हिमाचल की आठ अन्य पीएचसी पर भी दवाएं भेजी जाएंगी। इन पीएचसी की अपने जिला मुख्यालय से दूरी 40-45 किमी तक है। परीक्षण पूरी तरह से सफल होने के बाद इसे मैदानी इलाकों में भी लागू किया जाएगा। इसका सबसे अधिक फायदा उत्तर प्रदेश को होगा। हर साल बाढ़ आने पर कई इलाकों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। ऐसे इलाकों में ड्रोन से दवाएं भेजने में सुविधा होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed