{"_id":"657be5d320ce796489050b1b","slug":"even-doctors-shocked-to-see-sugar-and-blood-pressure-levels-of-youth-2023-12-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रखें ख्याल: डॉक्टर भी चौंक जा रहे युवाओं का शुगर और ब्लड प्रेशर लेवल देखकर, तेजी से आ रहे चपेट में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रखें ख्याल: डॉक्टर भी चौंक जा रहे युवाओं का शुगर और ब्लड प्रेशर लेवल देखकर, तेजी से आ रहे चपेट में
Fri, 15 Dec 2023 11:06 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 15 Dec 2023 11:06 AM IST
सार
डीडीयू एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गिरिजेश कुमार यादव ने कहा कि दबाव की स्थिति में मनोदशा असामान्य हो जाती है। इससे दिनचर्या, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। अत्यधिक चिंता व तनाव से बेचैनी और डिप्रेशन होता है। इसलिए खुद को दबाव से मुक्त रखने का प्रयास करें। समस्या को लेकर चिंतित होने की बजाय समाधान खोजना बेहतर विकल्प है।
विज्ञापन
(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोई कॅरिअर को लेकर चिंताग्रस्त है तो कोई रिश्ते-नातों के लिए। इस तनाव ने 30 साल से कम उम्र के नौजवानों को भी शुगर, ब्लड प्रेशर और हार्ट का मरीज बना दिया है। बीमार युवा जब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं तो उनका शुगर-ब्लड प्रेशर लेवल देखकर डॉक्टर भी चौंक जा रहे हैं। एक बार जो इन गंभीर बीमारियों की चपेट में आता है तो उसे दवाओं के सहारे बाकी का जीवन काटना पड़ता है।
विज्ञापन
फिजिशियन डॉ. अखिलेश कुमार सिंह बताते हैं कि लाइफ स्टाइल में परिवर्तन ने हर उम्र के लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। शहरी क्षेत्र की बात करें तो देर रात तक जागना और सुबह देर से सोकर उठना अब सामान्य बात हो गई है। खानपान को लेकर भी आदतें बहुत बदली हैं। कम उम्र के युवाओं की पार्टियां नाॅनवेज और एल्कोहल के ओवरडोज वाली होती हैं।
विज्ञापन
शारीरिक व्यायाम भी नियमित और संतुलित नहीं है। इसके अलावा परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता भी घटी है। अब छोटी-छोटी बात पर झगड़े होने लगे हैं, हत्या और आत्महत्याएं होने लगी हैं। इन सबके पीछे मूल कारण यही है कि लोगों का खुद पर नियंत्रण कमजोर पड़ने लगा है। इसलिए अगर कोई घटना आपके पक्ष में या आपकी इच्छा के अनुसार नहीं है तो उसे लेकर आप तनावग्रस्त हो जाते हैं। अगर आपके पास इस तनाव से उबरने का विकल्प नहीं है तो इससे चिंता, कुंठा आदि मनोविकार बढ़ेंगे, जिसका असर आपके शरीर में स्रावित होने वाले हार्मोंस पर पड़ेगा। इससे शरीर का पूरा सिस्टम प्रभावित हो जाएगा।
विज्ञापन
इसे भी पढ़ें: इंतजार खत्म...आज से लीजिए रामगढ़ताल में क्रूज का मजा
युवा बोले
भविष्य की चिंता कभी-कभी बहुत परेशान कर देती है। इसके कारण स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगता है। पहले मैं इसे समझ नहीं पाता था और बीमार पड़ता था। अब तनाव होता है मैं बाहर घूमने निकल जाता हूं।-अरुण पांडेय, रुस्तमपुर।
समय पर काम करने का दबाव बना रहता है। दबाव के कारण तनाव और मानसिक उलझनें होने लगती हैं। जब बहुत परेशान हो जाता हूं तो कुछ देर काम बंद कर दोस्तों से बातचीत करके तनाव कम करता हूं।-रोमी, कुस्मही बाजार।
इसे भी पढ़ें: लालजी टंडन ने पुलिस से खाली करवाए..सपाई राज में करा दिए पक्के कब्जे
कंपटीशन अब बहुत बढ़ गया है। कम समय में बहुत सारे कार्य करने होते हैं। परिवार भी साथ नहीं रहता है, जिससे कि सब कुछ साझा कर लूं। इसलिए संगीत सुनकर खुद को शांत कर लेती हूं।-मनीषा मौर्या, गोरखनाथ।
काम की थकान और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताएं परेशान करती हैं। इस कारण सर्वाइकल हो गया था। नियमित योगा करके मैंने खुद की सेहत में सुधार किया है। दिनचर्या नियमित करके हम स्वस्थ रह सकते हैं।-सृष्टि शुक्ला, बशारतपुर।
डीडीयू एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गिरिजेश कुमार यादव ने कहा कि दबाव की स्थिति में मनोदशा असामान्य हो जाती है। इससे दिनचर्या, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। अत्यधिक चिंता व तनाव से बेचैनी और डिप्रेशन होता है। इसलिए खुद को दबाव से मुक्त रखने का प्रयास करें। समस्या को लेकर चिंतित होने की बजाय समाधान खोजना बेहतर विकल्प है।
भविष्य की चिंता कभी-कभी बहुत परेशान कर देती है। इसके कारण स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगता है। पहले मैं इसे समझ नहीं पाता था और बीमार पड़ता था। अब तनाव होता है मैं बाहर घूमने निकल जाता हूं।-अरुण पांडेय, रुस्तमपुर।
समय पर काम करने का दबाव बना रहता है। दबाव के कारण तनाव और मानसिक उलझनें होने लगती हैं। जब बहुत परेशान हो जाता हूं तो कुछ देर काम बंद कर दोस्तों से बातचीत करके तनाव कम करता हूं।-रोमी, कुस्मही बाजार।
इसे भी पढ़ें: लालजी टंडन ने पुलिस से खाली करवाए..सपाई राज में करा दिए पक्के कब्जे
कंपटीशन अब बहुत बढ़ गया है। कम समय में बहुत सारे कार्य करने होते हैं। परिवार भी साथ नहीं रहता है, जिससे कि सब कुछ साझा कर लूं। इसलिए संगीत सुनकर खुद को शांत कर लेती हूं।-मनीषा मौर्या, गोरखनाथ।
काम की थकान और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताएं परेशान करती हैं। इस कारण सर्वाइकल हो गया था। नियमित योगा करके मैंने खुद की सेहत में सुधार किया है। दिनचर्या नियमित करके हम स्वस्थ रह सकते हैं।-सृष्टि शुक्ला, बशारतपुर।
डीडीयू एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गिरिजेश कुमार यादव ने कहा कि दबाव की स्थिति में मनोदशा असामान्य हो जाती है। इससे दिनचर्या, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। अत्यधिक चिंता व तनाव से बेचैनी और डिप्रेशन होता है। इसलिए खुद को दबाव से मुक्त रखने का प्रयास करें। समस्या को लेकर चिंतित होने की बजाय समाधान खोजना बेहतर विकल्प है।