150 साल पुरानी अंग्रेजों की पद्धति पर आज भी अमल करता है रेलवे, ऐसे होता है काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तकरीबन डेढ़ सौ साल अंग्रेजों ने इंजन और सैलून को विपरीत दिशा में घुमाने के लिए जिस पद्धति का इस्तेमाल शुरू किया था, गोरखपुर कारखाना में आज भी उस पर अमल किया जाता है। यह जानकर आश्चर्य होगा कि इंजन और सैलून को टर्न टेबल (घुमाने वाला टेबल) पर रखकर रेलकर्मी हैंडल से घुमाते हैं। इसे घुमाते देखना भी बहुत रोमांचकारी होता है।
तकनीक विकसित होने के साथ ही अब यह तरीका चलन से बाहर हो गया। लेकिन गोरखपुर कारखाना में इसे धरोहर के तौर पर रखा गया है और इस्तेमाल भी किया जाता है। यह अलग बात है कि अब सिर्फ सैलून, निरीक्षण यान और कुछ इंजन को ही इस पद्धति से घुमाया जाता है।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह कहते हैं, धरोहर के तौर पर इसे संरक्षित किया गया है। निरीक्षण यान और इंजन को आज भी टर्न टेबल से घुमाते हैं। हालांकि अब ऐसे इंजन इस्तेमाल में हैं जो दोनों तरफ चल सकते हैं।
पहले एक तरफ चलता था इंजन
पहले इंजन एक ही तरफ चलता था। इसलिए इंजन को घुमाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। लेकिन अब इंजन दोनों तरफ घुमते हैं, लिहाजा इसकी जरूरत अब नहीं पड़ती है।
घुमाने में लगता है 25 मिनट, चार रेलकर्मी लगते हैं
हैंडल से सैलून या इंजन घुमाने में 25 मिनट का समय लगता है। चार से पांच रेलकर्मी इसमें लगाए जाते हैं। हैंडिल घुमाने में काफी ताकत लगानी पड़ती है। इसे घुमाते हुए देखना भी काफी रोमांचकारी है। जब इसे घुमाया जाता है तो अजीब सी आवाज आती है।
सप्ताह में दो से तीन बार घुमाई जाती हैं बोगियां
कोचिंग डिपो में स्थित टर्न टेबल पर सप्ताह में दो से तीन बार ऐसा होता है जब बोगियों को घुमाया जाता है तो कुछ अलग सी आवाज होती जिसे देखना ही रोमांच पैदा करता है।