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चिंताजनक: जानिए किस वजह से गोरखपुर में कहर बन रहा इंसेफेलाइटिस, इस साल नौ मरीजों की हो चुकी है मौत

Sat, 11 Sep 2021 10:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 11 Sep 2021 10:10 AM IST
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Encephalitis causing havoc due to scrub typhus in Gorakhpur
कुपोषण की वजह से फैल रहा दिमागी बुखार - फोटो : PTI
इस साल गोरखपुर जिले में अब तक मिले इंसेफेलाइटिस के 123 मरीजों में 60 प्रतिशत में स्क्रब टाइफस के लक्षण मिले हैं। लिहाजा, स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस बार स्क्रब टाइफस के बैक्टीरिया के कारण इंसेफेलाइटिस कहर बन रहा है। मौजूदा समय में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस के छह मरीज भर्ती भी हैं। इसके अलावा जिन नौ मरीजों की मौत हुई है, उनमें से भी पांच मरीजों में स्क्रब टाइफस के लक्षण मिले थे। गौरतलब है कि स्क्रब टाइफस के बैक्टीरिया पालतू जानवरों से फैलते हैं।


जानकारी के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल इंसेफेलाइटिस मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। उस पर बाढ़ ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ा दी है। चिंता इसलिए और भी ज्यादा कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। उनके प्रयासों से पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस की करीब-करीब रुखसती हो गई थी। इस बार यह फिर सिर उठाने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का पानी जैसे-जैसे घटेगा वैसे-वैसे जलजनित बीमारियां बढ़ेंगी। इन बीमारियों में इंसेफेलाइटिस प्रमुख है। यही वजह है कि पिछले साल सितंबर माह तक जहां 81 केस मिले थे और छह मरीजों की मौत हुई थी।
 
Encephalitis causing havoc due to scrub typhus in Gorakhpur
बीआरडी मेडिकल कॉलेज - फोटो : amar ujala
वहीं इस साल सितंबर तक जिले में 123 मरीज मिल चुके हैं जिनमें नौ की मौत हो चुकी है। वहीं गोरखपुर मंडल, बिहार और नेपाल के मरीजों को भी जोड़ लें तो बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस के 274 मरीज अब तक भर्ती हो चुके हैं। इनमें 24 की मौत हो चुकी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि इंसेफेलाइटिस के कारकों में स्क्रब टाइफस का बड़ा रोल है। इंसेफेलाइटिस के 60 प्रतिशत मरीज स्क्रब टाइफस के हैं। यह बेहद खतरनाक है। इसकी वजह से शरीर में प्लेटलेट्स तेजी से घटते हैं। साथ ही इसका असर मस्तिष्क पर होता है। ऐसे में मरीजों को झटके आने लगते हैं।
Encephalitis causing havoc due to scrub typhus in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
गाय, भैंस, बकरी और कुत्ते में मिले हैं स्क्रब टाइफस के बैक्टीरिया
गाय, भैस, बकरी और कुत्तों से भी इंसेफेलाइटिस का खतरा 80 से 90 प्रतिशत है। इनके शरीर पर चार तरह के एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के बैक्टीरिया मिले हैं। यह बैक्टीरिया इतने खतरनाक हैं कि शरीर के किसी भी अंग को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ मानसिक रूप से बीमार बना सकते हैं। आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी व सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि गाय, भैंस, कुत्ते और बकरी पर शोध किए गए हैं। इनमें चार तरह के बैक्टीरिया मिले हैं। यह बैक्टीरिया जूं (किलनी) में पाए गए हैं। इनमें बोफिलस माइक्रोप्लस, हायलोमा कुमारी रिफिसेफेलस, सैंग्वीनियस और डर्मासेंटर आरोटस नामक बैक्टीरिया मिले हैं। ये चारों बैक्टीरिया बेहद खतरनाक हैं। स्क्रब टाइफस इन्हीं बैक्टीरिया के कारण होता है।
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Encephalitis causing havoc due to scrub typhus in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
रिकेट्सिया बैक्टीरिया सबसे अधिक खतरनाक
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि रिकेट्सिया बैक्टीरिया सबसे अधिक खतरनाक है। यह बोफिलस माइक्रोप्लस में मौजूद रहते हैं। इस बैक्टीरिया के शरीर में पहुंचने से बुखार के साथ झटके आने शुरू हो जाते हैं। इससे एईएसए होने की संभावना 90 प्रतिशत तक हो जाती है। मौजूदा समय में इस तरह के केस भी मिल रहे हैं।
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Encephalitis causing havoc due to scrub typhus in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
इन अंगों को पहुंचाते हैं नुकसान
स्क्रब टाइफस की वजह से शरीर के कई अंगों में नुकसान पहुंचता है। बैक्टीरिया का शरीर में प्रवेश होते ही बुखार, जोड़ों में दर्द होने लगता है। अगर समय से इलाज नहीं हुआ तो यह लिवर, मस्तिष्क, किडनी तक को प्रभावित कर देता है। ऐसे में मरीज की जान भी चली जाती है।
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