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Gorakhpur News: युवाओं में अचानक मौत की वजह तलाशने पर जोर
Mon, 28 Sep 2026 03:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:04 AM IST
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गोरखपुर। युवा उम्र में बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होने वाली अचानक मौत के कारणों की पहचान के लिए क्लिनिकल जांच के साथ पोस्टमार्टम और पैथोलॉजिकल जांच का समन्वय जरूरी है। इसी विषय पर एम्स गोरखपुर में रविवार को अचानक होने वाली प्राकृतिक व कार्डियक मृत्यु पर सीएमई और हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें करीब 40 चिकित्सकों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
न्यायिक चिकित्सा व विष विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित ‘अनरैवलिंग सडन नेचुरल डेथ : ए मास्टर क्लास सीएमई विद हैंड्स-ऑन डिसक्शन’ में देश के विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अचानक होने वाली मृत्यु के क्लिनिकल, पैथोलॉजिकल और फोरेंसिक पहलुओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में मृत्यु का वास्तविक कारण जानने के लिए मेडिकल हिस्ट्री, ऑटोप्सी और जांच रिपोर्ट का एक साथ मूल्यांकन आवश्यक है। सीएमई में डॉ. अरविंद कुमार (यूसीएमएस एवं जीटीबी अस्पताल, दिल्ली), डॉ. निलेश तुमराम, डॉ. विकास श्रीवास्तव, डॉ. यशवंत कुमार सिंह, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी और डॉ. काजल हटगांवकर ने विभिन्न सत्रों में व्याख्यान दिए। युवा लोगों में अचानक कार्डियक मृत्यु के संभावित कारणों और हृदय से जुड़ी पैथोलॉजी पर विशेष चर्चा हुई।
कार्यशाला में डॉ. यशवंत कुमार सिंह, डॉ. मिम्ना, डॉ. दीपिका और डॉ. नवनीत अटेरिया ने प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों ने हृदय की विभिन्न संरचनाओं की पहचान और अचानक कार्डियक मृत्यु से जुड़े महत्वपूर्ण पैथोलॉजिकल निष्कर्षों को समझा। कार्यक्रम में युवा व्यक्तियों में अचानक कार्डियक मृत्यु पर बहुविषयक पैनल चर्चा भी हुई। डॉ. आशीष सराफ के संचालन में विशेषज्ञों ने क्लिनिकल इतिहास, ऑटोप्सी, हिस्टोपैथोलॉजी और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को जोड़कर मृत्यु के कारण तक पहुंचने की चुनौतियों पर चर्चा की।
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कार्यक्रम ईडी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता के मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन अध्यक्ष डॉ. मनोज बी. पारचके और आयोजन सचिव डॉ. नवनीत अटेरिया रहे।
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न्यायिक चिकित्सा व विष विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित ‘अनरैवलिंग सडन नेचुरल डेथ : ए मास्टर क्लास सीएमई विद हैंड्स-ऑन डिसक्शन’ में देश के विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अचानक होने वाली मृत्यु के क्लिनिकल, पैथोलॉजिकल और फोरेंसिक पहलुओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में मृत्यु का वास्तविक कारण जानने के लिए मेडिकल हिस्ट्री, ऑटोप्सी और जांच रिपोर्ट का एक साथ मूल्यांकन आवश्यक है। सीएमई में डॉ. अरविंद कुमार (यूसीएमएस एवं जीटीबी अस्पताल, दिल्ली), डॉ. निलेश तुमराम, डॉ. विकास श्रीवास्तव, डॉ. यशवंत कुमार सिंह, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी और डॉ. काजल हटगांवकर ने विभिन्न सत्रों में व्याख्यान दिए। युवा लोगों में अचानक कार्डियक मृत्यु के संभावित कारणों और हृदय से जुड़ी पैथोलॉजी पर विशेष चर्चा हुई।
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कार्यशाला में डॉ. यशवंत कुमार सिंह, डॉ. मिम्ना, डॉ. दीपिका और डॉ. नवनीत अटेरिया ने प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों ने हृदय की विभिन्न संरचनाओं की पहचान और अचानक कार्डियक मृत्यु से जुड़े महत्वपूर्ण पैथोलॉजिकल निष्कर्षों को समझा। कार्यक्रम में युवा व्यक्तियों में अचानक कार्डियक मृत्यु पर बहुविषयक पैनल चर्चा भी हुई। डॉ. आशीष सराफ के संचालन में विशेषज्ञों ने क्लिनिकल इतिहास, ऑटोप्सी, हिस्टोपैथोलॉजी और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को जोड़कर मृत्यु के कारण तक पहुंचने की चुनौतियों पर चर्चा की।
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कार्यक्रम ईडी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता के मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन अध्यक्ष डॉ. मनोज बी. पारचके और आयोजन सचिव डॉ. नवनीत अटेरिया रहे।