Gorakhpur News: जोन में 99 हजार उपभोक्ताओं के बिजली मीटर खराब, मुख्य अभियंता ने जताई नाराजगी
आरडीएफ में उपभोक्ताओं के बिल पर गलत बिलिंग हो जाती है। यह गलत बिलिंग दो तरह से होती है। यह बिल उपभोक्ताओं और निगम, दोनों की गलती से होता है। इसमें या तो उपभोक्ता के द्वारा ही गलत रीडिंग बताई जाती है या तो बिलिंग कंपनी के कर्मचारी गलत रीडिंग दर्ज कर बिल बना देते हैं।
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गलत बिजली बिल के साथ मीटर गड़बड़ी जोन के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। इससे निगम को राजस्व की क्षति हो रही है तो उपभोक्ता बिना गलती के बिजली दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं। फिलहाल जोन में 99,170 मीटर खराब हैं तो 22,398 उपभोक्ताओं के बिल गड़बड़ मिले हैं।
आरडीएफ के सबसे ज्यादा जोन में 7,939 मामले कुशीनगर के हैं। सबसे कम 750 मामले देवरिया जिले के हैं। आईडीएफ के सबसे ज्यादा 46,612 मामले कुशीनगर के हैं। सबसे कम 8,175 मामले गोरखपुर ग्रामीण सर्किल प्रथम के हैं।
मुख्य अभियंता आशू कालिया ने कहा कि सभी अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वह जल्द से जल्द आरडीएफ और आईडीएफ के मामलों का समाधान करें। इतने बिल गड़बड़ होने से निगम के राजस्व की क्षति होती है वहीं उपभोक्ताओं को भी परेशानी उठानी पड़ती। इसकी रोजाना समीक्षा भी हो रही है। कुछ दिन पहले चेयरमैन की तरफ से इन बिलों के मामलों के लिए अधिशासी अभियंताओं से स्पष्टीकरण तलब किया गया था।
क्या होता आरडीएफ
आरडीएफ में उपभोक्ताओं के बिल पर गलत बिलिंग हो जाती है। यह गलत बिलिंग दो तरह से होती है। यह बिल उपभोक्ताओं और निगम, दोनों की गलती से होता है। इसमें या तो उपभोक्ता के द्वारा ही गलत रीडिंग बताई जाती है या तो बिलिंग कंपनी के कर्मचारी गलत रीडिंग दर्ज कर बिल बना देते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर आरडीएफ बिल बन जाता है।
क्या होता ही सीडीएफ
इसमें कंपनी के कर्मचारी घर बैठे बिलिंग से उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिल बनाकर भेज रहे हैं। नतीजतन सीडीएफ (सीलिंग डिफेक्टिव) या आईडीएफ (आईडेंटीफाइढ डिफेक्टिव) बिल बन जाते हैं।