बिजली विभाग का गड़बड़झाला: मीटर बंद कराया हो तो पीडी नहीं आईडी जानिए, बिल के बकाया होने का खतरा
मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि बकाएदारों को आरसी भेजी जाती है। लेकिन अगर कनेक्शन पीडी होने के बाद भी आरसी जा रही है तो उपभोक्ता सीधे संबंधित अधिशासी अभियंता से संपर्क करें। उनकी समस्या दूर की जाएगी।
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अगर आपने घर का बिजली कनेक्शन स्थाई रूप बंद कराने के लिए परमानेंट डिस्कनेक्शन (पीडी) करा दिया है तो निश्चिंत मत रहिए। हो सकता है कि आपके घर दो-तीन साल बाद भारी भरकम बकाए का बिल पहुंच जाए। साथ ही वसूली के लिए एक नोटिस भी। बिजली निगम के जिम्मेदार परमानेंट डिस्कनेक्शन की औपचारिकताएं पूरी न करके लंबित फाइलों में रख देते हैं। ऐसे में बिजली निगम के ऑनलाइन आंकड़ों में कनेक्शन विच्छेदित नहीं होता और हर महीने बिजली बिल बनता रहता है।
साथ में बकाए का सरचार्ज भी जुड़ते जाता है। बाद वहीं अभियंता और लिपिक सेटिंग-गेटिंग करके मामले को निपटाने का ऑफर देते हैं। अगर चढ़ावे का ऑफर स्वीकार कर लेते हैं तो मामला निपट जाएगा वरना बकाए का बिल लेकर दौड़ते रह जाएंगे।
परमानेंट डिस्कनेक्शन में यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बिजली निगम के हर खंड में तमाम लोग परेशान हैं। लोग सारी औपचारिकताएं करके भूल जाते हैं और विभाग के लोग इसी का फायदा उठाते हैं। कुछ समय बाद बकाया बिल भेज देते हैं। साथ आरसी भी थमा दी जाती है। आरसी पाते ही लोगों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। लोग विभाग में जाते हैं तो फिर सौदेबाजी शुरू हो जाती है। दफ्तरों के आसपास मंडरा रहे दलाल पूछते हैं-कितना बकाया है, लाओ 10-20 परसेंट में मामला सेट करवा देंगे...।
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केस एक
जाफरा बाजार की वंदना अग्रवाल ने अपना मकान वर्ष 2019 में ही बेच दिया था। उन्होंने अपने बिजली कनेक्शन का भुगतान करने के बाद कनेक्शन का पीडी (परमानेंट डिस्कनेक्शन) भी करा दिया था। लेकिन अभी तक उनके नाम पर ही बिजली निगम के रिकॉर्ड में बिजली बिल बन रहा है। उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये की आरसी भी भेज दी गई। जब वसूली के लिए अमीन घर पहुंचा तो पता चला कि जिस मकान पर भारी भरकम बिल का बकाया है, वह बहुत पहले ही बेच दिया गया था, अब दूसरे नाम से कनेक्शन भी दे दिया गया है।
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केस दो
बड़हलगंज के विश्वामित्र शाही ट्रांसपोर्टनगर में रहते हैं। करीब दस वर्ष पहले उन्होंने पिता के नाम पर लिए गए बिजली कनेक्शन का पीडी करा दिया। विश्वामित्र ने बताया कि बकाए का भुगतान करने के बाद भी पिछले कुछ दिन पहले उन्हें आरसी भेज दी गई। बिजली दफ्तर जाकर पूछा ताे पता चला कि उस समय विभाग की ओर से पीडी की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। ऐसे में कनेक्शन खत्म होने के बाद भी उनके बिजली बिल का मीटर चल रहा था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पीडी करवाया था तो उस समय ही विभाग की ओर से मीटर हटाकर रसीद भी दी गई थी।
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केस तीन
मोहद्दीपुर के राजन ने अपने मकान के बिजली कनेक्शन कटवाने के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी कर पीडी करवा दिया। उस समय बिजलीकर्मियों ने उनके परिसर से कनेक्शन हटाने के साथ मीटर भी हटा लिए। लेकिन इधर कुछ दिन पहले फिर उनके पास बिजली बकाए की आरसी आ गई। राजेश ने बताया कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि जब पहले ही इसे निपटा दिया गया तो फिर से आरसी भेजकर इसे निपटाने की बात बोल रहे हैं।
19 हजार में निपटा दिया 1.38 लाख का बकाया
शहर के एक विद्युत खंड में अभियंता ने उपभोक्ता को एक लाख 38 हजार रुपये के बकाए में आरसी भेज दी। उपभोक्ता अब उस परिसर पर नहीं रहते हैं। बकाए बिल को कम करके 19 हजार रुपये में निपटा दिया गया। उपभोक्ता डर से खुलकर बोलने को राजी नहीं है।
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मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि बकाएदारों को आरसी भेजी जाती है। लेकिन अगर कनेक्शन पीडी होने के बाद भी आरसी जा रही है तो उपभोक्ता सीधे संबंधित अधिशासी अभियंता से संपर्क करें। उनकी समस्या दूर की जाएगी। पिछले महीने ऐसे लंबे समय से चल रहे आरसी के केसों को खत्म करवाया गया था। उपभोक्ता अपने पास से सारे कागज लेकर अभियंता दफ्तर जाएं। उन्हें परेशानी नहीं होगी।