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चुनावी फ्लैश बैक: गोरखपुर की इन तीन विधानसभा सीटों से नहीं जीत पाए निर्दलीय, मुख्य लड़ाई में भी कभी नहीं रहे
Sun, 23 Jan 2022 02:59 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 23 Jan 2022 02:59 PM IST
सार
निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बांसगांव विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2012 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर हिंदु युवा वाहिनी के प्रदेश स्तर पर पदाधिकारी रहे, राम लक्ष्मण ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Social media
विस्तार
गोरखपुर जिले की तीन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां निर्दलीय उम्मीदवार कभी चुनाव नहीं जीत सके हैं। ये सीटें हैं गोरखपुर शहर, मुंडेरा बाजार (अब चौरीचौरा) और बांसगांव। खास बात यह है कि इन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार कभी मुख्य लड़ाई तक में भी नहीं रहे हैं।
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निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बांसगांव विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2012 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर हिंदु युवा वाहिनी के प्रदेश स्तर पर पदाधिकारी रहे, राम लक्ष्मण ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाया। उन्हें 4,017 मतों से ही संतोष करना पड़ा था। वहीं, 2017 में निर्दलीय रामधारी को 1,496 मत मिले। इसी तरह शहर विधानसभा से 2017 में निर्दल प्रबल प्रताप शाही को केवल 851 मत मिले थे। वर्ष 2017 में चौरीचौरा विधानसभा (पहले मुंडेरा बाजार) से राकेश निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरे थे, उन्हें मात्र 1,268 मत मिले थे।
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इसके उलट पिपराइच से जितेंद्र जायसवाल ने लगाई है हैट्रिक
गोरखपुर शहर, चौरीचौरा और बांसगांव के उल्टे, जिले की पिपराइच विधानसभा सीट से जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू भईया निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। वह 1993, 1996 व 2002 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते और प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने।
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चिल्लूपार से हरिशंकर तिवारी के बाद निर्दलीय नहीं जीते
चिल्लूपार विधानसभा सीट से हरिशंकर तिवारी के बाद कोई भी निर्दल प्रत्याशी नहीं जीत सका। 1985 में जेल में रहते हुए हरिशंकर तिवारी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस प्रत्याशी मारकंडेय चंद को पराजित किया था। इसी प्रकार कौड़ीराम में अंबिका सिंह ने 1993 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी।उन्होंने जनता दल से चुनाव मैदान में उतरीं गौरी देवी को हराया था। मानीराम (अब कैंपियरगंज) से महंत अवेद्यनाथ भी निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते थे। इसके बाद 1993 में ओम प्रकाश पासवान ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी।