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Gorakhpur News: जेई के अभाव में बिजली उपकरणों की नहीं हो रही जांच
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- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आग लगने का मामला
- प्राचार्य ने डीएम को पत्र भेजकर की थी बिजली निगम से जेई को संबद्ध करने की मांग
- अब तक नहीं की कार्रवाई, प्राचार्य अब शासन को भेजेंगे पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में विद्युत अभियंता का पद लंबे समय से रिक्त है। बीते 28 जुलाई को हुई आग लगने की घटना के बाद जिला प्रशासन की तरफ से गठित जांच समिति ने भी एक अभियंता की तैनाती की सिफारिश की थी। प्राचार्य ने डीएम को पत्र भी दिया था, लेकिन अब तक तैनाती नहीं हो पाई। अब कॉलेज खुद ही अभियंता की तैनाती के लिए प्रयास में जुटा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज, नेहरू अस्पताल, बाल रोग संस्थान और सुपर स्पेशयिलिटी ब्लॉक में तमाम उपकरण बिजली आधारित हैं। इसके अलावा पूरे परिसर में नौ लिफ्ट भी हैं। आवासीय परिसर, कॉलेज व अस्पताल के बिजली संबंधी कार्यों की निगरानी के लिए विद्युत अभियंता का पद भी स्वीकृत है, लेकिन यह लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
इस पद पर नियुक्ति के लिए कई बार कॉलेज प्रशासन पत्र भी भेज चुका है। बीते 28 जुलाई को आग लगने की घटना के बाद जिला प्रशासन की तरफ से गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था कि मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा के लिए सभी उपकरणों की नियमित जांच जरूरी है। अभी जो उपकरण खराब हैं या उन पर क्षमता से अधिक लोड हैं, उनकी भी जांच कर बदलाव किया जाना है।
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प्राचार्य की मांग पर डीएम ने बिजली निगम के एक अभियंता को कॉलेज से संबद्ध करने की बात कही थी, लेकिन यह आदेश आज तक क्रियान्वित नहीं हो पाया। शुक्रवार की रात फिर मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 12 के बाद एक बंद कमरे में एसी में ओवरहीट होने की वजह से आग लग गई थी। इसके बाद एक बार फिर जेई की तैनाती का प्रकरण चर्चा में आया है। अब कॉलेज प्रशासन जेई की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजकर अनुरोध करेगा।
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प्राचार्य ने कर्मियों को दिए सतर्कता के निर्देश
बीआरडी के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने शनिवार को उस कमरे का निरीक्षण किया, जहां ओवरहीट होने की वजह से एसी में आग लगी थी। कर्मियों ने बताया कि गलती से एसी का स्विच ऑन होने के चलते वह लगातार चलता रहा, जिस वजह से यह दुर्घटना हुई। प्राचार्य ने सभी कर्मचारियों को बिजली उपकरणों के प्रयोग में सावधानी बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने एसआईसी डॉ. राजेश कुमार राय को निर्देश दिया कि परिसर में जहां भी शॉर्ट सर्किट की संभावना हो, उन उपकरणों को चिह्नित कराकर जांच करा लें और अगर बदलने की आवश्यकता है तो बदलवा दें।
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- प्राचार्य ने डीएम को पत्र भेजकर की थी बिजली निगम से जेई को संबद्ध करने की मांग
- अब तक नहीं की कार्रवाई, प्राचार्य अब शासन को भेजेंगे पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में विद्युत अभियंता का पद लंबे समय से रिक्त है। बीते 28 जुलाई को हुई आग लगने की घटना के बाद जिला प्रशासन की तरफ से गठित जांच समिति ने भी एक अभियंता की तैनाती की सिफारिश की थी। प्राचार्य ने डीएम को पत्र भी दिया था, लेकिन अब तक तैनाती नहीं हो पाई। अब कॉलेज खुद ही अभियंता की तैनाती के लिए प्रयास में जुटा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज, नेहरू अस्पताल, बाल रोग संस्थान और सुपर स्पेशयिलिटी ब्लॉक में तमाम उपकरण बिजली आधारित हैं। इसके अलावा पूरे परिसर में नौ लिफ्ट भी हैं। आवासीय परिसर, कॉलेज व अस्पताल के बिजली संबंधी कार्यों की निगरानी के लिए विद्युत अभियंता का पद भी स्वीकृत है, लेकिन यह लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
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इस पद पर नियुक्ति के लिए कई बार कॉलेज प्रशासन पत्र भी भेज चुका है। बीते 28 जुलाई को आग लगने की घटना के बाद जिला प्रशासन की तरफ से गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था कि मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा के लिए सभी उपकरणों की नियमित जांच जरूरी है। अभी जो उपकरण खराब हैं या उन पर क्षमता से अधिक लोड हैं, उनकी भी जांच कर बदलाव किया जाना है।
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प्राचार्य की मांग पर डीएम ने बिजली निगम के एक अभियंता को कॉलेज से संबद्ध करने की बात कही थी, लेकिन यह आदेश आज तक क्रियान्वित नहीं हो पाया। शुक्रवार की रात फिर मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 12 के बाद एक बंद कमरे में एसी में ओवरहीट होने की वजह से आग लग गई थी। इसके बाद एक बार फिर जेई की तैनाती का प्रकरण चर्चा में आया है। अब कॉलेज प्रशासन जेई की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजकर अनुरोध करेगा।
प्राचार्य ने कर्मियों को दिए सतर्कता के निर्देश
बीआरडी के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने शनिवार को उस कमरे का निरीक्षण किया, जहां ओवरहीट होने की वजह से एसी में आग लगी थी। कर्मियों ने बताया कि गलती से एसी का स्विच ऑन होने के चलते वह लगातार चलता रहा, जिस वजह से यह दुर्घटना हुई। प्राचार्य ने सभी कर्मचारियों को बिजली उपकरणों के प्रयोग में सावधानी बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने एसआईसी डॉ. राजेश कुमार राय को निर्देश दिया कि परिसर में जहां भी शॉर्ट सर्किट की संभावना हो, उन उपकरणों को चिह्नित कराकर जांच करा लें और अगर बदलने की आवश्यकता है तो बदलवा दें।