गोरखपुर विश्वविद्यालय: छोटे उद्याोग के रूप में विकसित होंगे अचार, जैम, पापड़ के घरेलू व्यवसाय, चार विभागों को मिलाकर बनाई जाएगी टीम
गोरखपुर, बुंदेलखंड समेत प्रदेश के चार विश्वविद्यालयों को मिली जिम्मेदारी। सुक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत बढ़ावा देगा गोविवि।
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खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने योजना के तहत गोरखपुर विश्वविद्यालय के अलावा बुंदेलखंड विवि झांसी, एसवीबीपी विवि मेरठ और एनडीयूएटी अयोध्या को जिम्मेदारी दी है। इसके तहत गोरखपुर विश्वविद्यालय पहले खाद्य प्रसंस्करण का व्यवसाय करने वाले पुरुष और महिलाओं से संपर्क कर उनकी सूची तैयार करेगा। इसके बाद प्रशिक्षण की व्यवस्था करेगा।
प्रशिक्षित होने के बाद व्यवसाय को उद्योग के रूप में विकसित किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर फंडिंग की व्यवस्था भी करेगा और तैयार खाद्य पदार्थ को बाजार तक पहुंचाने में मदद भी करेगा। इच्छुक लोगों को स्टार्टअप योजना के तहत भी मदद करने की विश्वविद्यालय ने योजना बनाई है।
चार विभागों को मिलाकर बनाई जाएगी टीम
विश्वविद्यालय प्रशासन ने योजना की सफलता के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाने का निर्णय लिया है। जिसमें गृह विज्ञान और वाणिज्य विभाग के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। योजना को सफल बनाने की अंतिम जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के इंन्क्यूबेशन और स्टार्टअप सेंटर की होगी।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि सात प्रतिशत लोगों का ही व्यवसाय ही पंजीकृत है। अपंजीकृत व्यवसायियों में 80 फीसदी महिलाएं हैं, जो घर में ही व्यवसाय को संचालित करती हैं, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। इससे शासन स्तर पर होने वाली आय का आकलन नहीं हो पाता है। इन्हीं दिक्कतों के समाधान के लिए सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की शुरुआत की गई है। योजना को सफल बनाने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है।