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147 किलो की गर्भवती मछली: त्रिवेणी नदी से भटककर नहर में फंसी, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर राप्ती में छोड़ी गई डॉल्फिन
Tue, 21 Jul 2026 02:39 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, महाराजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, महाराजगंज
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 21 Jul 2026 02:39 PM IST
सार
महाराजगंज में तीन दिन से नहर में फंसी गर्भवती गंगा डॉल्फिन को बचाने में आखिरकार सफलता मिल गई। डॉल्फिन का वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग समेत कई विभागों की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन किया। नहर से डॉल्फिन को निकालने के तत्काल बाद भटहट से राजघाट तक 52 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया। सख्त निगरानी में महज एक घंटा पांच मिनट में उसे राप्ती नदी में सुरक्षित पहुंचाया।
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dolphin trapped
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महराजगंज की एक नहर में तीन दिन से फंसी गंगा डॉल्फिन को आखिरकार सोमवार को बचा लिया गया। वन विभाग की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे बचाने में सफलता हासिल की। नहर से निकालने के बाद उसे एक घंटा पांच मिनट में राप्ती नदी में छोड़ दिया गया। इस दौरान भटहट से राजघाट तक का 52 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया गया था।
जानकारी के मुताबिक, त्रिवेणी नदी से भटककर एक गर्भवती डॉल्फिन शनिवार को देवरिया कैनाल के रास्ते महाराजगंज में धरमौली बाजार के पास नहर तक पहुंच गई थी। काफी लंबी व भारी होने के कारण वह वहां से निकल नहीं पा रही थी और तीन दिन तक फंसी रही। शनिवार को इसका वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी अमला सक्रिय हुआ।
गोरखपुर पुलिस, सिंचाई विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर और लखनऊ से आए विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर रविवार को बचाव अभियान शुरू किया पर सफलता नहीं मिली। सोमवार को दोबारा अभियान शुरू किया गया और कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्राम सभा के पास डॉल्फिन का रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित राप्ती में छोड़ दिया गया। डीएफओ गोरखपुर शुभम सिंह ने बताया कि डॉल्फिन पूरी तरह सुरक्षित है।
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जानकारी के मुताबिक, त्रिवेणी नदी से भटककर एक गर्भवती डॉल्फिन शनिवार को देवरिया कैनाल के रास्ते महाराजगंज में धरमौली बाजार के पास नहर तक पहुंच गई थी। काफी लंबी व भारी होने के कारण वह वहां से निकल नहीं पा रही थी और तीन दिन तक फंसी रही। शनिवार को इसका वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी अमला सक्रिय हुआ।
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गोरखपुर पुलिस, सिंचाई विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर और लखनऊ से आए विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर रविवार को बचाव अभियान शुरू किया पर सफलता नहीं मिली। सोमवार को दोबारा अभियान शुरू किया गया और कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्राम सभा के पास डॉल्फिन का रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित राप्ती में छोड़ दिया गया। डीएफओ गोरखपुर शुभम सिंह ने बताया कि डॉल्फिन पूरी तरह सुरक्षित है।
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वजन 147 किलो, लंबाई सात फीट दो इंच, जांच में पता चला गर्भवती है
नहर से निकाली गई डॉल्फिन का विशेष एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार किया गया। उसके स्वास्थ्य की जांच की गई तो पता चला कि वह सात फीट दो इंच लंबी है। वजन 147 किलोग्राम है और वह गर्भवती है। विशेषज्ञों ने तत्काल उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ने की सलाह दी। इसी के बाद ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया गया।
नहर से निकाली गई डॉल्फिन का विशेष एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार किया गया। उसके स्वास्थ्य की जांच की गई तो पता चला कि वह सात फीट दो इंच लंबी है। वजन 147 किलोग्राम है और वह गर्भवती है। विशेषज्ञों ने तत्काल उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ने की सलाह दी। इसी के बाद ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया गया।
तेज बहाव, अधिक जलस्तर व लगातार स्थान बदलती डॉल्फिन
एसडीओ विनीत सिंह ने बताया कि नहर में पानी का तेज बहाव और डॉल्फिन के लगातार स्थान बदलने के कारण अभियान काफी कठिन रहा। नहर का जलस्तर भी ज्यादा था। इसी कारण रविवार को टीम विफल हो गई। इसके बाद संयुक्त रमनीति बनाई गई। सिंचाई विभाग से नहर के जलस्तर को कम करने के लिए कहा गया।
एसडीओ विनीत सिंह ने बताया कि नहर में पानी का तेज बहाव और डॉल्फिन के लगातार स्थान बदलने के कारण अभियान काफी कठिन रहा। नहर का जलस्तर भी ज्यादा था। इसी कारण रविवार को टीम विफल हो गई। इसके बाद संयुक्त रमनीति बनाई गई। सिंचाई विभाग से नहर के जलस्तर को कम करने के लिए कहा गया।
रविवार को पूरे दिन संयुक्त टीम ने चौपरिया, अहिरौली, धरमौली, सिसवा शुक्ल, सुम्हाखोर, मेहाबार, देवीपुर और धनगड़ा के सिवान तक नहर में तलाशी अभियान चलाया। तेज जल प्रवाह और अधिक पानी के कारण डॉल्फिन को पकड़ने में सफलता नहीं मिल सकी। डॉल्फिन लगातार अपना स्थान बदल रही थी, जिससे अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया था। डॉल्फिन शनिवार को मछुआरों के जाल में फंसने के बाद चर्चा में आई थी। हालांकि ग्रामीणों ने उसे जाल से निकालकर दोबारा नहर में छोड़ दिया था लेकिन उसके बाद से वन विभाग लगातार उसकी निगरानी और रेस्क्यू अभियान में जुटा रहा।
सफल अभियान में इनका योगदान
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर डॉ. बीसी ब्रह्मा के निर्देशन में चले अभियान में गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह, टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। हाटा वन विभाग की अधिकारी अमृता सिंह भी शामिल रहीं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर डॉ. बीसी ब्रह्मा के निर्देशन में चले अभियान में गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह, टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। हाटा वन विभाग की अधिकारी अमृता सिंह भी शामिल रहीं।
प्राकृतिक रास्ता बाधित होने पर बनाते हैं ग्रीन कॉरिडोर
डॉल्फिन (विशेषकर गंगा डॉल्फिन) के संरक्षण के लिए ग्रीन कॉरिडोर या ''वन्यजीव गलियारा'' मुख्यतः उन क्षेत्रों में बनाया जाता है, जहां मानवीय हस्तक्षेप, बांधों, या नहरों के कारण उनका प्राकृतिक रास्ता बाधित हो जाता है। गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। इनके संरक्षण के लिए पूरे देश में ''प्रोजेक्ट डॉल्फिन'' भी चलाया जा रहा है।
डॉल्फिन (विशेषकर गंगा डॉल्फिन) के संरक्षण के लिए ग्रीन कॉरिडोर या ''वन्यजीव गलियारा'' मुख्यतः उन क्षेत्रों में बनाया जाता है, जहां मानवीय हस्तक्षेप, बांधों, या नहरों के कारण उनका प्राकृतिक रास्ता बाधित हो जाता है। गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। इनके संरक्षण के लिए पूरे देश में ''प्रोजेक्ट डॉल्फिन'' भी चलाया जा रहा है।