फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   DNA test started in gorakhpur forensic lab

जरूरी खबर: गोरखपुर फोरेंसिक लैब में डीएनए की जांच शुरू, 18 जिलों से आए नमूनों की होगी जांच

Sat, 17 Jul 2021 10:18 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 17 Jul 2021 10:18 AM IST
सार

शुरुआत में आए 21 नमूने। अभी तक लखनऊ भेजे जाते थे नमूने, रिपोर्ट आने में लगता था काफी समय।

विज्ञापन
DNA test started in gorakhpur forensic lab
Gorakhpur forensic lab - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर जिले के फोरेंसिक लैब में अब डीएनए (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल) जांच की भी शुरुआत हो गई है। जिस रिपोर्ट के लिए पहले दो साल से भी अधिक समय तक इंतजार करना होता था, वह अब अधिकतम छह से सात महीने में ही आ जाएगी। इससे वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर सजा दिलाना आसान हो जाएगा। लैब में गोरखपुर के अलावा वाराणसी जोन के कुल 18 जिलों से आए नमूनों की भी जांच की जाएगी।
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में  डीएनए के परीक्षण के लिए यहां गोरखपुर-वाराणसी जोन के 21 सैंपल भी सामने आ चुके हैं। हालांकि, अभी पर्याप्त स्टाफ न होने से रफ्तार धीमी है, लेकिन जल्द ही इसमें तेजी आने की उम्मीद है। 
विज्ञापन


जिले में कई ऐसे बड़े मामले हैं, जिसमें पुलिस के पास दुष्कर्म की पुष्टि के कुछ सबूत हैं और इस आधार पर आरोपी जेल भी भेजे गए, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य ना होने का फायदा आरोपियों को मिल गया। लेकिन, अब आसानी से जल्द रिपोर्ट मिल जाएगी, जिसके बाद सजा दिलवाना सुनिश्चित हो सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


गोरखपुर विधि विज्ञान प्रयोगशाला के उप निदेशक सुरेश चंद्रा ने बताया कि डीएनए जांच की शुरुआत हो गई है। 18 जिले के नमूने यहां पर आ रहे हैं। जांच के लिए अभी दो ही वैज्ञानिक है, जल्द ही चार से पांच वैज्ञानिक और आ जाएंगे जिसके बाद तेजी से जांच होगी। 

यह होता है डीएनए

डीएनए शरीर की जन्मकुंडली की भांति होता है। इसकी जांच से जाना जा सकता है कि अपराध करने के दौरान व्यक्ति की मौजूदगी थी या नहीं। अपराधी के जैविक हिस्से (जैसे बाल, नाखून, वीर्य, थूक, खून आदि) के जरिये उसकी मौजूदगी की पुष्टि होती है। उस आधार पर अपराधी पकड़े जाते हैं। इसके अलावा भी कई राज खुलते हैं।

जांच में देरी से अपराधियों को पकड़ने में होती थी कठिनाई
पहले इसकी जांच की व्यवस्था सिर्फ एफएसएल लखनऊ के पास थी। वहां पूरे प्रदेश से नमूने जांच के लिए जाते थे, इससे जांच में काफी वक्त लगता था। जांच में अधिक समय लगने से कई बार अपराधियों का पकड़ा जाना और दंड दिलवाना कठिन होता था।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed