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Gorakhpur News: डीडीयू में अब मिलेगी डीलिट, डीएससी और एलएलडी की उपाधि

Mon, 24 Nov 2025 12:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 12:00 AM IST
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D.Litt., D.Sc. and L.L.D. degrees will now be available at DDU
40 वर्ष बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने दी औपचारिक स्वीकृति
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डिग्रियों के लिए स्पष्ट, पारदर्शी, कठोर और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला ढांचा तैयार

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने शोध कार्य को नई दिशा और गति देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। लगभग 40 वर्ष बाद विश्वविद्यालय को राजभवन से डीएससी (डॉक्टर ऑफ साइंस), डीलिट (डॉक्टर ऑफ लिटरेचर) और एलएलडी (डॉक्टर ऑफ लॉ) कार्यक्रम संचालित करने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है।
राजभवन ने संबंधित अध्यादेश को मंजूरी प्रदान कर दी, जिसके साथ ही 1985 के पुराने अध्यादेश को पूरी तरह प्रतिस्थापित करते हुए नया अध्यादेश लागू कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, नया अध्यादेश पहले की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित, विस्तृत और पारदर्शी है। पात्रता से लेकर प्रवेश, मूल्यांकन और शोधप्रबंध की रूपरेखा तक, हर प्रक्रिया को स्पष्ट और कठोर मानकों के साथ निर्धारित किया गया है।
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पीएचडी डिग्री अनिवार्य होने के साथ ही अभ्यर्थियों के लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्ष का शिक्षण या शोध अनुभव और प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 15 उच्च स्तरीय शोध प्रकाशन अनिवार्य किए गए हैं। कुलपति की अध्यक्षता में गठित पोस्ट-डाक्टोरल शोध समिति पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। शोध पूर्ण करने की अवधि न्यूनतम दो और अधिकतम चार वर्ष तय की गई है।
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हिंदी और अंग्रेजी में प्रस्तुति देने की सुविधा
प्रवेश प्रक्रिया को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। आवेदनकर्ताओं को 1500-3000 शब्द का शोध-सार, 1000 शब्द का शोध-विवरण और सभी प्रकाशनों के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। यूजीसी प्लेगरिज्म नियमों का पालन, खुला सेमिनार और प्रमाणित प्लेगरिज्म रिपोर्ट अनिवार्य होंगे। सभी दस्तावेज हार्ड व सॉफ्ट कॉपी में जमा करना आवश्यक होगा। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रस्तुति की सुविधा दी गई है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू है मूल्यांकन प्रणाली, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित किया गया है। छह परीक्षकों के पैनल में दो विदेशी विशेषज्ञों की अनिवार्य भागीदारी होगी। यदि दो परीक्षक शोध को अस्वीकार करते हैं, तो शोधप्रबंध सीधे निरस्त कर दिया जाएगा।

पहली बार एलएलडी में होगा प्रवेश
एलएलडी को पहली बार विश्वविद्यालय के अध्यादेश में शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पहली बार आवेदन आमंत्रित करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे कानून विषय में उन्नत शोध को नई दिशा मिलेगी और विधि संकाय के लिए व्यापक अवसर खुलेंगे।


वर्जन
नए अध्यादेश में पहली बार एलएलडी शामिल किया गया है, जिससे विधि विषय में उन्नत शोध के नए अवसर खुलेंगे। लगभग चार दशकों बाद संशोधित अध्यादेश का लागू होना विश्वविद्यालय के लिए नई शुरुआत है और शोध को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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