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Gorakhpur News: गोल्डन कार्ड न बनने से इलाज में परेशानी, भटक रहे मरीज
Fri, 18 Oct 2024 03:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 18 Oct 2024 03:04 AM IST
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महराजगंज। आयुष्मान योजना के तहत अभी भी कुछ ही मरीजों का इलाज हो पा रहा है। गोल्डन कार्ड नहीं होने से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
परतावल ब्लाॅक के ग्राम सभा पचदेऊरी निवासी गोविंद के 12 वर्षीय बेटे अमरेंद्र को हार्ट की बीमारी है। उनके अलावा परिवार में तीन लोगों का गोल्डन कार्ड बना है, लेकिन उनके बेटे अमरेंद्र का गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। वह गोल्डन कार्ड के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं। कार्ड नहीं होने से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
परिवार में गोविंद, उनकी पत्नी राजकुमारी व बेटी खुश्बू का गोल्डन कार्ड बना है जबकि बेटे अमरेंद्र व रिकीन का नहीं है। गोविंद ने बताया कि सीएचसी में तैनात आयुष्मान मित्र ने बताया कि सूची में रिकीन का नाम रिकीला हो गया है, जिससे कार्ड नहीं बन पा रहा है, जबकि अमरेंद्र का नाम सूची में नहीं है। गोविंद ने बताया अमरेंद्र को इलाज की सख्त आवश्यकता है। यदि समय रहते उसका ऑपरेशन नहीं कराया गया तो उसकी जान नहीं बचेगी।
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यही हाल धनहा नायक निवासी सावित्री का भी है। गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए वह सीएचसी परतावल का चक्कर लगा रही हैं। सूची में उनका नाम सावित्री की जगह सुमित्रा हो गया है जबकि आधार कार्ड समेत सभी दस्तावेजों में नाम सावित्री है। उनके पति घुरऊ प्रसाद का कार्ड बना है। पेट में दर्द की समस्या से जूझ रही सावित्री को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अल्ट्रासाउंड के अलावा अन्य जांच व इलाज के लिए उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
डिप्टी सीएमओ नीरज कन्नौजिया ने बताया कि ज्यादातर लाभार्थियों का नाम गलत होने के कारण आयुष्मान कार्ड बनाने में दिक्कत हो रही है। बायोमेट्रिक मशीन में अंगूठा लगाने में फिंगर नहीं पा रहा है। इस वजह से थोड़ी परेशानी हो रही है।
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परतावल ब्लाॅक के ग्राम सभा पचदेऊरी निवासी गोविंद के 12 वर्षीय बेटे अमरेंद्र को हार्ट की बीमारी है। उनके अलावा परिवार में तीन लोगों का गोल्डन कार्ड बना है, लेकिन उनके बेटे अमरेंद्र का गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। वह गोल्डन कार्ड के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं। कार्ड नहीं होने से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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परिवार में गोविंद, उनकी पत्नी राजकुमारी व बेटी खुश्बू का गोल्डन कार्ड बना है जबकि बेटे अमरेंद्र व रिकीन का नहीं है। गोविंद ने बताया कि सीएचसी में तैनात आयुष्मान मित्र ने बताया कि सूची में रिकीन का नाम रिकीला हो गया है, जिससे कार्ड नहीं बन पा रहा है, जबकि अमरेंद्र का नाम सूची में नहीं है। गोविंद ने बताया अमरेंद्र को इलाज की सख्त आवश्यकता है। यदि समय रहते उसका ऑपरेशन नहीं कराया गया तो उसकी जान नहीं बचेगी।
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यही हाल धनहा नायक निवासी सावित्री का भी है। गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए वह सीएचसी परतावल का चक्कर लगा रही हैं। सूची में उनका नाम सावित्री की जगह सुमित्रा हो गया है जबकि आधार कार्ड समेत सभी दस्तावेजों में नाम सावित्री है। उनके पति घुरऊ प्रसाद का कार्ड बना है। पेट में दर्द की समस्या से जूझ रही सावित्री को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अल्ट्रासाउंड के अलावा अन्य जांच व इलाज के लिए उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
डिप्टी सीएमओ नीरज कन्नौजिया ने बताया कि ज्यादातर लाभार्थियों का नाम गलत होने के कारण आयुष्मान कार्ड बनाने में दिक्कत हो रही है। बायोमेट्रिक मशीन में अंगूठा लगाने में फिंगर नहीं पा रहा है। इस वजह से थोड़ी परेशानी हो रही है।