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Exclusive: सैन्य और अर्द्धसैनिक बल के शहीदों के आश्रितों को मिली सरकारी नौकरी, लोगों ने कहा- धन्यवाद सीएम योगी
Thu, 24 Jun 2021 03:46 PM IST
vivek shukla
रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 24 Jun 2021 03:46 PM IST
सार
साल 2017 से पहले आश्रितों को नहीं मिलती थी सरकारी नौकरी, योगी सरकार ने लिया फैसला। बलिया व कुशीनगर के दो शहीद जवानों के आश्रितों को दिया गया है सरकारी नौकरी का अवसर।
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नियुक्ति पत्र लेतीं शहीद सूरज सिंह की पत्नी शालू सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सैन्य व अर्द्धसैनिक बलों के बलिया और कुशीनगर के दो शहीद जवानों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी में अवसर दिया गया है। योगी सरकार के एक अप्रैल 2017 को लिए गए फैसले के तहत, गोरखपुर मंडल में एक शहीद आश्रित को देवरिया तो दूसरे को गोरखपुर सैनिक कल्याण व पुनर्वास केंद्र में तैनाती दी जा चुकी है। साल 2017 से पूर्व शहीद के आश्रितों को सरकारी नौकरी में लिए जाने का प्रावधान नहीं था।
देश की सीमाओं की रक्षा करने और आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए जवानों के आश्रितों को प्रदेश सरकार की ओर से अब आर्थिक सहायता के साथ राज्य गठन के बाद पहली बार शासकीय सेवाओं में मौका भी दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने एक अप्रैल 2017 से सशस्त्र सेना की तीनों सेनाओं (थल, नौ और वायुसेना) व अर्द्धसैनिक बलों में कार्यरत शहीदों के आश्रितों को शासकीय सेवा देने का फैसला लिया था।
इसी फैसले के तहत वायुसेना में कार्यरत बलिया के मूल निवासी शहीद सूरज सिंह की पत्नी शालू सिंह को 17 मई 2021 को जिला सैनिक कल्याण पुनर्वास केंद्र गोरखपुर में में कनिष्ठ सहायक पद पर नियुक्ति मिली है। उन्होंने इस अवसर पर सीएम योगी का धन्यवाद करते हुए आभार व्यक्त किया। सेना के एक अभियान के दौरान सूरज सिंह का प्लेन क्रैश कर गया था जिसमें वह शहीद हो गए थे। इसी आदेश के तहत कुशीनगर के शहीद चंद्रभान चौरसिया की पत्नी पिंकी चौरसिया को देवरिया सैनिक कल्याण व पुनर्वास केंद्र में तैनाती दी गई है। चंद्रभान की तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में थी। एक ऑपरेशन के दौरान वे शहीद हो गए थे।
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देश की सीमाओं की रक्षा करने और आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए जवानों के आश्रितों को प्रदेश सरकार की ओर से अब आर्थिक सहायता के साथ राज्य गठन के बाद पहली बार शासकीय सेवाओं में मौका भी दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने एक अप्रैल 2017 से सशस्त्र सेना की तीनों सेनाओं (थल, नौ और वायुसेना) व अर्द्धसैनिक बलों में कार्यरत शहीदों के आश्रितों को शासकीय सेवा देने का फैसला लिया था।
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इसी फैसले के तहत वायुसेना में कार्यरत बलिया के मूल निवासी शहीद सूरज सिंह की पत्नी शालू सिंह को 17 मई 2021 को जिला सैनिक कल्याण पुनर्वास केंद्र गोरखपुर में में कनिष्ठ सहायक पद पर नियुक्ति मिली है। उन्होंने इस अवसर पर सीएम योगी का धन्यवाद करते हुए आभार व्यक्त किया। सेना के एक अभियान के दौरान सूरज सिंह का प्लेन क्रैश कर गया था जिसमें वह शहीद हो गए थे। इसी आदेश के तहत कुशीनगर के शहीद चंद्रभान चौरसिया की पत्नी पिंकी चौरसिया को देवरिया सैनिक कल्याण व पुनर्वास केंद्र में तैनाती दी गई है। चंद्रभान की तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में थी। एक ऑपरेशन के दौरान वे शहीद हो गए थे।
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प्रदेश में 20 शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिल चुकी है सरकारी नौकरी
देश की रक्षा करते शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों के लिए पांच जनवरी 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार सरकारी नौकरी में अवसर देने का एलान किया था। सभी को सैनिक कल्याण विभाग में लिपिक के पद या उनकी शिक्षा के अनुसार नौकरी दी गई। सीएम ने अपने सरकारी आवास कालीदास मार्ग पर इन सभी आश्रितों को नियुक्ति पत्र सौंपा था। अभी तक प्रदेश में 20 शहीद सैनिकों के परिवारों को इसका लाभ दिया जा चुका है।
मुकेश तिवारी (विंग कमांडर) जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी ने बताया कि शहीद के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने का फैसला योगी सरकार का है। इसके तहत शहीदों के आश्रितों को 50 लाख रुपये और एक आश्रित को शासकीय सेवा में लिया जाना है। गोरखपुर और देवरिया में सेना के दो आश्रितों को नौकरी दी गई है। सरकार की तरफ से सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
मुकेश तिवारी (विंग कमांडर) जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी ने बताया कि शहीद के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने का फैसला योगी सरकार का है। इसके तहत शहीदों के आश्रितों को 50 लाख रुपये और एक आश्रित को शासकीय सेवा में लिया जाना है। गोरखपुर और देवरिया में सेना के दो आश्रितों को नौकरी दी गई है। सरकार की तरफ से सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
अन्य प्रदेशों में अर्द्ध सैनिकों के लिए योजना प्रभावी
सेना या अर्द्धसैनिक बल में कहीं भी तैनात उत्तर प्रदेश के मूल निवासी की शहादत पर आश्रितों को यह लाभ मिलेगा। मान लें, उप्र के किसी जिले का जवान छत्तीसगढ़ के अर्द्धसैनिक बल में कार्यरत है। सेवा के दौरान वह शहीद हो गया तो उनके परिजन, आश्रित, को भी इसी योजना के तहत शासकीय सेवा और आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।
ओएसडी गृह विभाग एके सिंह ने बताया कि अप्रैल से सरकार ने पहली बार सेना और अर्द्धसैनिक बलों के शहीद के आश्रितों को तत्काल सहायता देना शुरू किया है। इसके तहत पहली बार 24 घंटे में शहीद के परिजनों को आर्थिक सहायता दी गई। इसके अलावा शहीद के आश्रित को पहली बार योगी सरकार की तरफ से शासकीय सेवाएं दी जा रही हैं। इससे पहले ऐसा नहीं हुआ था।
सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र प्रशासन के अतिरिक्त निदेशक श्याम किशोर पांडेय ने बताया है कि सरकार ने एक अप्रैल 2017 से सेना के शहीद जवान और इसके एक सप्ताह बाद ही अर्द्धसैनिक बल के शहीद जवानों के लिए शासकीय सेवाएं शुरू की हैं। इससे सेना के जवानों का मनोबल बढ़ा है।
ओएसडी गृह विभाग एके सिंह ने बताया कि अप्रैल से सरकार ने पहली बार सेना और अर्द्धसैनिक बलों के शहीद के आश्रितों को तत्काल सहायता देना शुरू किया है। इसके तहत पहली बार 24 घंटे में शहीद के परिजनों को आर्थिक सहायता दी गई। इसके अलावा शहीद के आश्रित को पहली बार योगी सरकार की तरफ से शासकीय सेवाएं दी जा रही हैं। इससे पहले ऐसा नहीं हुआ था।
सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र प्रशासन के अतिरिक्त निदेशक श्याम किशोर पांडेय ने बताया है कि सरकार ने एक अप्रैल 2017 से सेना के शहीद जवान और इसके एक सप्ताह बाद ही अर्द्धसैनिक बल के शहीद जवानों के लिए शासकीय सेवाएं शुरू की हैं। इससे सेना के जवानों का मनोबल बढ़ा है।