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Dengue: कार्ड टेस्ट पर न रखें भरोसा, निगेटिव के बाद भी हो सकता है डेंगू
Mon, 03 Oct 2022 12:05 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 03 Oct 2022 12:05 PM IST
सार
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि एनएस-वन कार्ड रैपिड किट की तर्ज पर काम करता है। सैंपल डालने पर आधे घंटे के अंदर यह रिपोर्ट बताती है। लेकिन, इसकी जांच पर भरोसा नहीं है। निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर मरीज निश्चिंत हो जाता है। ऐसे में मरीज की जान जाने की संभावना रहती है।
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डेंगू वार्ड। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डेंगू के बढ़ते मरीजों के बीच निजी अस्पताल जांच के नाम पर कमाने में जुट गए हैं। एनएस-वन कार्ड के जरिए जांच कर रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने पर डेंगू मरीज बताकर अधिक रुपये वसूल रहे हैं। ऐसे निजी पैथालॉजी के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा पत्र जारी करते हुए रिपोर्ट को संदिग्ध मानते हुए एलाइजा जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि एनएस-वन कार्ड पर भरोसा न रखें। क्योंकि, कार्ड जांच को स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि एनएस-वन कार्ड की जांच में गलत रिपोर्ट आने के चांस ज्यादा है। इसकी वजह यह है कि किट की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है। ऐसे में अगर पॉजिटिव रिपोर्ट भी आता है, तो वह किस बीमारी का होगा, यह कह पाना संभव नहीं है। यही कारण है कि हम लोग एलाइजा जांच की सलाह देते हैं।
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उन्होंने बताया कि अगर एनएस-वन कार्ड की रिपोर्ट निगेटिव है तो यह कह पाना मुश्किल है कि वह निगेटिव ही होगा। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव भी हो सकती है। एलाइजा जांच 99 फीसदी सही है। जबकि, कार्ड जांच पर कोई भरोसा नहीं है। इसलिए डेंगू के लक्षण वाले मरीजों को यह सलाह दी जाती है कि वे एलाइजा जांच कराएं, कार्ड के जांच पर भरोसा न रखें।
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निजी पैथालॉजी कर रहे केवल कार्ड जांच
निजी पैथालॉजी रुपये कमाने के चक्कर में केवल एनएस-वन कार्ड से डेंगू मरीजों की जांच कर रहे हैं। इसके एवज में वह मरीजों से 800 से लेकर एक हजार रुपये वसूल रहे हैं। कार्ड जांच में महज 30 मिनट के अंदर ही रिपोर्ट आ जा रही है। जबकि, एलाइजा जांच 1200 से 1500 के बीच हैं। रिपोर्ट में पांच से छह घंटे का समय लगता है। यही वजह है कि सीएमओ ने इन पैथालॉजी सेंटरों को निर्देश जारी कर कार्ड से जांच न करने की सख्त हिदायत दी है।
क्या है एनएस-वन कार्ड
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि एनएस-वन कार्ड रैपिड किट की तर्ज पर काम करता है। सैंपल डालने पर आधे घंटे के अंदर यह रिपोर्ट बताती है। लेकिन, इसकी जांच पर भरोसा नहीं है। निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर मरीज निश्चिंत हो जाता है। ऐसे में मरीज की जान जाने की संभावना रहती है।
क्या है एलाइजा जांच
एलाइजा जांच पुष्ट और प्रमाणिक है। इसकी जांच मशीन से होती है। जांच में पांच से छह घंटे का समय लगता है। लक्षण के आधार पर यह 10 दिनों के अंदर तक के डेंगू के लक्षण को पकड़ सकता है। 10 दिन तक जांच न कराने पर एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि हो जाती है। इसके परिणाम बेहद सटीक और बेहतर होते हैं।
एक नजर आंकड़ों पर
क्या है एनएस-वन कार्ड
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि एनएस-वन कार्ड रैपिड किट की तर्ज पर काम करता है। सैंपल डालने पर आधे घंटे के अंदर यह रिपोर्ट बताती है। लेकिन, इसकी जांच पर भरोसा नहीं है। निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर मरीज निश्चिंत हो जाता है। ऐसे में मरीज की जान जाने की संभावना रहती है।
क्या है एलाइजा जांच
एलाइजा जांच पुष्ट और प्रमाणिक है। इसकी जांच मशीन से होती है। जांच में पांच से छह घंटे का समय लगता है। लक्षण के आधार पर यह 10 दिनों के अंदर तक के डेंगू के लक्षण को पकड़ सकता है। 10 दिन तक जांच न कराने पर एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि हो जाती है। इसके परिणाम बेहद सटीक और बेहतर होते हैं।
एक नजर आंकड़ों पर
- अब तक डेंगू के मिले मरीज-26
- नोटिस- 70 दुकानदारों और घर स्वामियों को
- सोर्स रिडक्शन- 17 हजार से अधिक