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Gorakhpur: खजनी थाने के सामने शव रखकर प्रदर्शन, पुलिस की सख्ती पर गांव छोड़कर ग्रामीण फरार
Mon, 22 Aug 2022 09:41 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 22 Aug 2022 09:41 AM IST
सार
खजनी क्षेत्र में शनिवार को खुटहना की रहने वाली महिला के बच्चेदानी की नस कट जाने से करमा नर्सिंग होम के संचालक डीके सिंह की लापरवाही सामने आई है। सीएमओ आशुतोष दुबे के आदेश पर एडिशनल सीएमओ एके सिंह नेतृत्व में 4 सदस्यीय टीम रविवार शाम खजनी पहुंची। अधिकारियों के पहुंचने की भनक लगते ही अस्पताल संचालक डीके सिंह फरार हो गया।
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मौके पर जुटे ग्रामीण व पुलिस अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर जिले के खजनी इलाके के खुटहना गांव की महिला के मौत के मामले में रविवार को बवाल मच गया। पोस्टमार्टम के बाद शव आते ही परिजन 50 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर खजनी थाने के सामने शव रखकर सड़क जाम कर दिए। जाम की सूचना पाते ही चार थाने की फोर्स मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सख्ती की तो सब छोड़कर परिजन और कई ग्रामीण गांव छोड़कर फरार हो गए। सड़क पर लावारिस शव देखकर पुलिस ने आनन-फानन शव को थाने में रखवा दिया है। पुलिस ने मृतक महिला के देवर की तहरीर पर डॉक्टर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया है।
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उधर, मामला पढ़ने के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य महकमा ने नर्सिंग होम को सील कर छानबीन शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक,खुटहना गांव निवासी मुनीब की पत्नी लक्ष्मी (23) को परिजनों ने खजनी इलाके के करमा नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान बच्चेदानी की नस कट जाने की वजह से शनिवार को लक्ष्मी की मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने संचालक डीके सिंह पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और थाने में तहरीर दी थी।
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पुलिस ने मामला शांत करा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। रविवार को शव आते ही परिजन ग्रामीणों के साथ उग्र हो गए हैं। शांत करने के लिए पुलिस ने आनन-फानन गैर इरादतन हत्या की धारा में केस दर्ज कर लिया और शव सुपुर्द कर अंत्येष्टि के लिए कहा। लेकिन, थोड़ी देर बाद ही परिजन मुआवजा, सरकारी नौकरी की मांग को लेकर सड़क पर उतर गए और शव रखकर रास्ता जाम कर दिए।
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यह खबर पाते ही सिकरीगंज,बेलीपार, बासंगाव,उरुवा, बेलघाट व हरपुर बुदहट के थाने की फोर्स मौके पर बुला ली गई। पुलिस ने सख्ती से शव की अंत्येष्टि का दबाव बनाया तो परिजन घर से लौट के आने की बात कहते हुए शव सड़क पर छोड़ कर फरार हो गए। मामला बढ़ता देख पुलिस ने शव को खजनी थाने में रखवा दिया है। पुलिस का कहना है कि सोमवार को परिजन आएंगे तो शव सुपुर्द कर अंत्येष्टि कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नर्सिंग होम को सील किया, संचालक फरार
खजनी क्षेत्र में शनिवार को खुटहना की रहने वाली महिला के बच्चेदानी की नस कट जाने से करमा नर्सिंग होम के संचालक डी के सिंह की लापरवाही सामने आई है।सीएमओ आशुतोष दुबे के आदेश पर एडिशनल सीएमओ ए के सिंह नेतृत्व में 4 सदस्यीय टीम रविवार साय खजनी पहुंची। अधिकारियों के पहुंचने की भनक लगते ही अस्पताल संचालक डी के सिंह फरार हो गया। जांच टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के 2 कर्मचारी उपस्थित मिले।उनसे पूछताछ करने पर महिला की मौत का मामला संदिग्ध पाया गया।नर्सिंग होम संचालक की उपस्थिति का इंतजार किया गया, लेकिन वह अपना बयान दर्ज नहीं करा सके।इसलिए जांच टीम अग्रिम आदेश तक अस्पताल को सील कर दिया गया।इस संबंध में एडिशनल सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कर्मचारी के बयान के आधार पर मामला संदिग्ध है। जांच की जा रही है, अग्रिम आदेश तक अस्पताल को सील कर दिया गया है।
परिजनों की यह है मांग
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नर्सिंग होम को सील किया, संचालक फरार
खजनी क्षेत्र में शनिवार को खुटहना की रहने वाली महिला के बच्चेदानी की नस कट जाने से करमा नर्सिंग होम के संचालक डी के सिंह की लापरवाही सामने आई है।सीएमओ आशुतोष दुबे के आदेश पर एडिशनल सीएमओ ए के सिंह नेतृत्व में 4 सदस्यीय टीम रविवार साय खजनी पहुंची। अधिकारियों के पहुंचने की भनक लगते ही अस्पताल संचालक डी के सिंह फरार हो गया। जांच टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के 2 कर्मचारी उपस्थित मिले।उनसे पूछताछ करने पर महिला की मौत का मामला संदिग्ध पाया गया।नर्सिंग होम संचालक की उपस्थिति का इंतजार किया गया, लेकिन वह अपना बयान दर्ज नहीं करा सके।इसलिए जांच टीम अग्रिम आदेश तक अस्पताल को सील कर दिया गया।इस संबंध में एडिशनल सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कर्मचारी के बयान के आधार पर मामला संदिग्ध है। जांच की जा रही है, अग्रिम आदेश तक अस्पताल को सील कर दिया गया है।
परिजनों की यह है मांग
- 50 लाख का मुआवजा दिया जाए।
- परिवार में एक सरकारी नौकरी दी जाए।
- किसी के दबाव में पीड़ित परिवार पर कोई केस न दर्ज किया जाए।
- आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।