गोरखपुर: 24 घंटे में तीन जू कीपरों को हिरण ने हमला कर किया घायल, दस दिन पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
दस दिन पहले एक जू कीपर को घायल किया था। शनिवार को एक फिर सोमवार को दो कीपर जख्मी हुए।
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गोरखपुर प्राणि उद्यान में 24 घंटे के अंदर तीन जू कीपरों पर हिरण ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। रविवार की देर शाम एक कीपर जू के भीतर साफ सफाई करने गया तो सबसे पहले हिरण ने उसे घायल कर दिया। इसके बाद, सोमवार की सुबह वापस बाड़े के भीतर जाने पर हिरण ने हमला बोल दिया। घायल कीपर किसी तरह बाड़े के बाहर आ सका। शाम को वापस बाड़े के भीतर जाने पर अन्य कीपर पर हिरण ने हमला कर उसे घायल कर दिया।
दरअसल, पिछले दस दिनों में हिरण के द्वारा जू कीपरों पर हमला किए जाने का यह चौथा मामला है। जू कीपर दीपचंद 10 दिन पहले बाड़े में गया था। इसी बीच अचानक हिंसक होकर हिरण ने उसपर हमला कर दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके कुछ दिन बाद मादा हिरण की भी मौत हो गई। सूत्रों ने बताया कि नर हिरण हिंसक होकर जू कीपर और हिरण दोनों पर हमला कर दिया था।
इसी हमले में मादा हिरण भी घायल हो गई थी। रविवार की रात में शाहरूख नाम का जू कीपर बाड़े की साफ सफाई करने और भोजन देने गया हुआ था। इसी बीच नर हिरण ने उसपर हमला कर दिया जबकि, यही जू कीपर पिछले आठ महीने से बाड़े में जाकर हिरण को रोज खाना देता था। बाड़े की साफ-सफाई भी करता था। हमले में घायल कीपर को अन्य लोग बाड़े से बाहर लेकर आए। सोमवार सुबह साप्ताहिक बंदी होती है। ऐसे में वन्य जीवों के बाड़ों की सफाई के अलावा उन्हें भोजन व अन्य खाद्य पदार्थ देने वह गए थे। इसी बीच वापस जू कीपर अभिषेक पर हमला कर दिया।
अस्थायी पद की नहीं है किसी पर जिम्मेदारी
घायल अभिषेक को बाहर लाकर बाड़े को बंदकर दिया गया। इसके बाद दोपहर के वक्त तीसरे जू कीपर अंगद ने जाकर किसी तरह उसे भोजन दिया और बाड़े को अंदर से बंद कर दिया। इस दौरान वह भी घायल हो गया। उसपर भी हमला कर दिया। डॉक्टर योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जू कीपरों की जिम्मेदारी बाड़े की साफ-सफाई के अलावा उन्हें भोजन करवाना होता है। इसी दौरान हिरण ने हमला कर
दिया।
प्राणि उद्यान में एक निदेशक का पद है, वह अभी छुट्टी पर हैं। उनकी जगह अस्थायी निदेशक की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी व कर्मचारी के पास नहीं है। सूत्रों की मानें ऐसे में प्राणि उद्यान के अन्य जिम्मेदारों पर जिम्मेदारी तय होती है। लेकिन इसके लिए उन्हें अधिकार नहीं होता है।
रविवार रात ही एक लोमड़ी की भी हो गई थी मौत
रविवार शाम को प्राणी उद्यान में एक लोमड़ी की भी मौत हो गई थी। पिछले कई दिनों से उसकी तबियत खराब थी। सूत्रों ने बताया कि बाड़े में ही उसका इलाज चल रहा था। दोपहर बाद अचानक तबियत बिगड़ने लगी और रात तक उसकी मौत हो गई। अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद प्राणी उद्यान परिसर के ही इलेक्ट्रॉनिक शवदाह ग्रह में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।