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नाग पंचमी:गोरखपुर के श्रद्धालु घरों में गाय के गोबर से बनाएंगे नाग-नागिन,चढ़ाएंगे दूध-लावा;जानें कब है त्योहार

Thu, 08 Aug 2024 12:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 08 Aug 2024 12:20 PM IST
सार

वाराणसी से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को सावन मास के शुक्ल पंचमी तिथि का मान पूरे दिन और रात को नौ बजकर 54 मिनट तक है। इस दिन चित्रा नक्षत्र भी पूरे दिन और रात्रि तीन बजकर 47 मिनट तक है। चंद्रमा की स्थिति कन्या और तुला दोनों राशियों पर रहेगी।

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नाग पंचमी व्रत कथा - फोटो : amar ujala

विस्तार

नाग देवता की उपासना का पर्व नाग पंचमी सोमवार को मनाई जाएगी। सावन का सोमवार और नाग पंचमी दोनों एक ही दिन पड़ने से शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव और नाग देवता को प्रसन्न करेंगे।
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वाराणसी से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन सावन मास के शुक्ल पंचमी तिथि का मान पूरे दिन और रात को नौ बजकर 54 मिनट तक है। इस दिन चित्रा नक्षत्र भी पूरे दिन और रात्रि तीन बजकर 47 मिनट तक है। चंद्रमा की स्थिति कन्या और तुला दोनों राशियों पर रहेगी।
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नाग पंचमी - फोटो : Amar Ujala
सूर्योदय के समय बुधादित्य योग बन रहा है। बुधादित्य योग सूर्य और बुध के उच्च स्थिति पर बनता है। इस योग में पूजन-अर्चन से विद्यार्थियों को विद्या की प्राप्ति होगी। वहीं बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होने के साथ ही व्यापार भी अच्छा होगा।

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं। बताया कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह बताया गया है। मन को शिव के प्रति समर्पण के उद्देश्य से भी नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है।

पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, हिंदू धर्म में नाग को भगवान शिव के गले का हार और भगवान विष्णु की शैय्या कहा गया है। ऐसे में माना जाता है कि नाग की पूजा करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों प्रसन्न होते हैं।
 
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नाग पंचमी की शुभकामनाएं 2024 - फोटो : Amar Ujala
नाग पंचमी की पूजन-विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, इस व्रत के एक दिन पूर्व यानि चतुर्थी को एक समय भोजन कर पंचमी तिथि को उपवास रखें। गरुड़ पुराण के अनुसार, व्रती अपने घर के दोनों ओर नागों को चित्रित करके उनकी विधि पूर्वक पूजा करें।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं। इसलिए भक्तिभाव के साथ गंध, पुष्प, धूप, कच्चा दूध, खीर, भीगा हुआ बाजरा और घी से नाग देवता का पूजन करें। उन्हें लावा और दूध अर्पण करें।
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