भालोटिया मार्केट में हड़कंप: करोड़ों की फंसी प्रतिबंधित दवाएं, अब बंगाल और नेपाल बना सहारा
ड्रग इंस्पेक्ट जय सिंह ने बताया कि अब तक 20 व्यापारियों ने एफडीसी दवाओं के स्टॉक संबंधी जानकारी दी है। इन दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। दवा व्यापारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि कंपनी को दवा वापस कर दें। मामले में पूरी निगाह रखी जा रही है।
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भारत सरकार की ओर से 14 फिक्स डोज कंबीनेशन (एफडीसी) दवाओं पर प्रतिबंध के बाद भालोटिया मार्केट के 100 से अधिक दवा व्यापारियों की करोड़ों रुपये की दवाएं फंस गई है। इन दवाओं को कुछ व्यापारी बंगाल और नेपाल भेजने की फिराक में हैं। क्योंकि, कुछ कंपनियों ने दवा वापस लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इसकी वजह से व्यापारी इस कोशिश में जुट गए हैं कि दवाओं का स्टॉक किसी तरह से निकल जाए ताकि उन्हें नुकसान न झेलना पड़े।
बताया जा रहा है कि नेपाल और बांग्लादेश में इन दवाओं की खपत ज्यादा है। बंगाल के रास्ते ही कोडीन युक्त सीरप और नशीली दवाएं बांग्लादेश पहुंचती हैं। इसका खुलासा पिछले दिनों पकड़े गए कोडीन युक्त सीरप और अन्य नशीले इंजेक्शन से भी हो चुका है।
यही कारण है कि कुछ दवा व्यापारी इस कोशिश में जुट गए हैं कि इन दवाओं को किसी तरह नेपाल और बंगाल तक पहुंचा दिया जाए। इसके लिए उन्होंने एक बड़े दवा व्यापारी की सहायता लेनी शुरू कर दी है, जिसका नाम कई बार नशीली दवा बेचने के मामले में आ चुका है।
वहीं, दूसरी ओर विभाग को अब तक 20 व्यापारियों ने अपने स्टाॅक की जानकारी दी है। अन्य व्यापारी अभी अपने स्टाक की जानकारी देने से बच भी रहे हैं। इन दवाओं में कोडिस्टार कफ सिरप, स्कोरिल सी सिरप, नियोपार प्लस टैबलेट, लीकुफ जैसी दर्द निवारक और कोडीन युक्त सीरप है।
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ड्रग इंस्पेक्ट जय सिंह ने बताया कि अब तक 20 व्यापारियों ने एफडीसी दवाओं के स्टॉक संबंधी जानकारी दी है। इन दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। दवा व्यापारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि कंपनी को दवा वापस कर दें। मामले में पूरी निगाह रखी जा रही है।
250 से 300 ब्रांड के नाम से बनती हैं ये दवाएं
बताया जा रहा है कि जो 14 फिक्स डोज कंबीनेशन प्रतिबंधित की गई हैं, वे 250 से 300 ब्रांड के नाम से बनती हैं। इनके प्रतिबंध से इन कंपनियों के लिए काम करने वाले दवा व्यापारियों के करोड़ों रुपये फंस भी गए हैं। इनमें कुछ कंपनियों ने दवा व्यापारियों से समय भी मांगा है। ऐसे में यह दवा व्यापारी चाह नहीं रहे हैं कि उनके पास ये दवाएं रहें। प्रतिदिन भालोटिया मार्केट से इन दवाओं की बिक्री 70 से 75 लाख रुपये की है।