गोरखपुर: नवजात की हत्या मामले में बिन ब्याही मां और उसकी मां गिरफ्तार, अनैतिक संबंध बनाने वाले युवक पर दुष्कर्म का केस
कोर्ट में आरोपी युवती का बयान और मेडिकल जांच कराने के बाद जेल भेजा गया। युवती के बयान के बाद, दबाव बनाकर अनैतिक संबंध बनाने वाले युवक पर दुष्कर्म का केस भी दर्ज हो गया है।
विस्तार
गोरखपुर जिले के बड़हलगंज के मिश्रौलिया गांव में नवजात बच्ची को मारकर फेंके जाने के मामले में पुलिस ने बृहस्पतिवार को बिन ब्याही मां और उसकी मां को गैर इरादतन हत्या समेत अन्य आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। युवती के कलमबंद बयान के आधार पर मृत बच्ची के जैविक पिता के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप में मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। वह भी जल्द ही जेल की सलाखों के पीछे होगा।
इस प्रकरण में नवजात का शव मिलने के बाद अमर उजाला की पहल पर धारा 317 (12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे का परित्याग करना) में भाजपा नेता रुद्रेश तिवारी की तहरीर पर केस दर्ज किया गया था। पीपीगंज मेें नवजात बच्ची के मृत मिलने के मामले में दुष्कर्मी, किशोरी मां और किशोरी की मां को जेल भेजवाने के प्रकरण के बाद अमर उजाला को यह दूसरी सफलता मिली है।
अमर उजाला ने बड़हलगंज के मिश्रौलिया गांव मेें पोखरे के पास मृत मिली नवजात की हत्या का ताना-बाना खोलते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके बाद एसएसपी के हस्तक्षेप पर हरकत में आई पुलिस ने आखिर अपराध के आरोपितों के चेहरों से पर्दा उठा दिया। जांच में पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) बढ़ाते हुए, बिन ब्याही मां और उसकी मां को आरोपित बना दिया था।
उधर, बिन ब्याही मां ने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में बताया कि एक युवक ने शादी का झांसा देकर उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाए। फिर शादी से इनकार कर दिया था। बार-बार संबंध बनाने की वजह से ही वह गर्भवती हो गई और फिर बच्ची का जन्म हुआ था। इसी आधार पर पुलिस ने युवक को दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने का आरोपी बनाया। बड़हलगंज थाने के एसएसआई अश्वनी तिवारी ने बताया कि बयान और मेडिकल कराने के बाद कोर्ट में पेश कर आरोपियों को जेल भेजा गया है। आरोपी युवक की तलाश की जा रही है।
आरोपी युवक पर और बढ़ सकती हैं धाराएं
युवती ने कोर्ट में दिए बयान में आरोपी युवक पर दुष्कर्म के अलावा गर्भपात कराने का दबाव बनाने, शादी का झांसा देने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं। माना जा रहा है कि उसके बयान के आधार पर आरोपित पर पुलिस कई और धाराएं बढ़ा सकती है।
गुजरात में हो सकता है आरोपी
आरोपी युवक के गुजरात में होने की संभावना है। गांव वालों के मुताबिक वह पिछले कुछ साल से गुजरात ही में रहकर काम करता है। गांव में बिन ब्याही युवती के मां बनने पर उसे पंचायत के लिए बुलाया गया था। तब भी वह गुजरात से ही आया था, लेकिन शादी के लिए तैयार नहीं हुआ और फिर फरार हो गया।
यह थी घटना
तीन जनवरी को बड़हलगंज इलाके के मिश्रौलिया गांव में पोखरे के किनारे अपराह्न करीब 3.30 बजे नवजात बच्ची का शव मिला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। 72 घंटे बाद हुए पोस्टमार्टम में सिर में चोट से मौत की पुष्टि हुई थी।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने कहा कि नवजात मामले में बड़हलगंज पुलिस ने केस दर्ज कर जांच की। जांच के आधार पर जो तथ्य सामने आए हैं, उसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इस प्रकरण में फरार आरोपी की तलाश में भी पुलिस टीम लगाई गई है, जल्द ही उसकी गिरफ्तारी भी कर ली जाएगी।
यह हो सकती है सजा
- धारा 317 : 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना (सजा-सात साल व जुर्माना)
- धारा 304 : गैर इरादतन हत्या (सजा-आजीवन कारावास)
- धारा 376 : दुष्कर्म (आजीवन कारावास या मृत्यु दंड)
- धारा 452 : जबरन घर में घुसकर दबाव बनाना (सजा-सात साल व जुर्माना)
- धारा 506 : धमकी देना (सजा-दो साल)
गोरखपुर में 154 साल बाद दर्ज हुई थी पहली एफआईआर
जिसके जन्मदाता ने ही उसे मार डाला या लावारिस छोड़ दिया, फिर उसके मामले में कौन सुनेगा? अमूमन नवजात का शव मिलने या उसके जीवित मिलने पर पुलिस कोई मामला दर्ज ही नहीं करती। अमर उजाला ने नवजात के लावारिस मिलने पर 2019 में यह मामला उठाया तो धारा-317 के तहत गोरखपुर में पहली एफआईआर दर्ज हुई, वरना इससे पूर्व जनरल डायरी में शिशु के मिलने का उल्लेख करके पुलिस अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती थी। चौंकाने वाली बात थी कि गोरखपुर पुलिस के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक इस कानून के बनने के 154 साल बाद यहां ऐसी कोई एफआईआर दर्ज हो सकी।
इन मामलों में पुलिस का कुतर्क रहता है कि कोई तहरीर ही नहीं देने वाला तो वे एफआईआर कैसे दर्ज करें? अमर उजाला की पहल पर तत्कालीन डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने प्रदेश भर मेें सर्कुलर जारी करके इस समस्या का समाधान भी किया था कि नवजात शिशु के मामले में तहरीर का इंतजार किए बिना, पुलिस स्वयं वादी बनकर मामला दर्ज करे। इसके बाद गोरखपुर में कई मामले दर्ज हुए। कुछ मामलों मेें पुलिस ही वादी भी बनी।
स्पष्ट और कठोर कानूनी प्रावधान हैं शिशुओं के मामले में
जीवित, मृत या अजन्मे शिशु के मामलों में आईपीसी में स्पष्ट और कठोर कानूनी प्रावधान हैं। धारा-315 (बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसे मारने का अपराध), धारा-316 (सजीव अजन्मे बच्चे की मृत्यु कारित करने का अपराध), 317 (12 वर्ष से कम उम्र के शिशु परित्याग के आशय से अरक्षित छोड़ने का अपराध), 318 (शिशु की मृत्यु जन्म से पूर्व हुई या बाद में उसको जानबूझकर छुपाने का अपराध) तहत आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।
कुछ ऐसे ही हालात में पीपीगंज में मौत के घाट उतारा गया था नवजात
कथित लोकलाज से बचने के लिए नवजात को मौत के घाट उतारने का कुकृत्य हमारे समाज में आदिकाल से होता चला आ रहा है। पाठकों केे पता होगा कि एक ऐसा ही मामला, अमर उजाला की कोशिशों से पीपीगंज में खुला था। 31 जनवरी 2020 को दर्ज इस मामले की तफ्तीश कैंपियरगंज थाना पुलिस ने की थी।
इस मामले में एक प्रभावशाली परिवार के युवक ने एक नाबालिग को हवस का शिकार बनाया था। उससे एक बच्चे का जन्म हुआ। बिन ब्याही किशोरी मां और उसकी मां ने नवजात को मारकर फेंक दिया था। अमर उजाला की पड़ताल पर सक्रिय हुई पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी, नवजात को मौत के घाट उतारने वाली किशोरी मां और किशोरी की मां को हत्या के आरोप में 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था।