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यूपी: 15 मिनट में तीन बम धमाके से दहल उठा था पूरा शहर, हर ब्लास्ट पर गदगद हो रहे थे आतंकी

Wed, 23 Dec 2020 12:17 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 23 Dec 2020 12:17 PM IST
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story of Bomb blast by Terrorist Tariq Kasami in golghar Gorakhpur
जेल से निकलता आतंकी तारिक कासमी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर शहर के गोलघर के सीरियल ब्लास्ट में पुलिस के जुटाए साक्ष्यों व गवाही ने आजमगढ़ के आतंकी तारिक कासमी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस के प्रयासों से ही कुछ गवाह सामने आए और एक-एक करके आतंकी की कारस्तानी कोर्ट को बताई। आतंकी को उम्रकैद की सजा हो चुकी है, फिर भी गवाह खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। 
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पुलिस के अनुसार, आतंकी घटना की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे गवाहों के टूटने का सिलसिला शुरू हो गया। विवेचक ने चार्जशीट में 23 गवाह शामिल किए थे। लेकिन आतंकी के डर से तमाम गवाह टूट गए। अब आतंकी को सजा हो चुकी है, इसके बावजूद गवाह खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। एक गवाह ने कुछ बातें बताई हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनका नाम नहीं दिया जा रहा है। गवाह के मुताबिक वह भी आतंकी घटना में घायल हुए थे।
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साल 2007 में 15 मिनट में ताबड़तोड़ तीन बम धमाके हुए थे। इससे भगदड़ मच गई थी। हर तरफ चीख-पुकार व दहशत का माहौल था। बलदेव प्लाजा पेट्रोल पंप पर विस्फोट हुआ तो वहां काम करने वाले संतोष सिंह घायल हो गए थे। जलकल बिल्डिंग और गणेश चौराहा के पास धमाके में भी लोग घायल हुए थे। इन सबको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों तक दहशत का माहौल था। गोलघर जाने से डर लगता था।
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बस में सवार आतंकी हर ब्लास्ट पर हो रहे थे गदगद

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आतंकी तारिक कासमी। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
सीरियल ब्लास्ट कर गोरखपुर को दहलाने वाले आतंकियों के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी। पुलिस के मुताबिक विस्फोट के बाद हूजी और इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के आतंकी बस में सवार होकर आजमगढ़ गए थे। उन्हें धमाके की जानकारी बस में ही मिली थी। सब विस्फोट करके गदगद थे। विस्फोट से पहले आईएम आतंकी सैफ ने गोरखपुर आकर तीन बार रेकी की थी। तारिक कासमी गैंग का लीडर था।

समीर के नाम से खरीदी थी साइकिल
आतंकियों ने समीर के नाम से साइकिलों को खरीदा था। इसका खुलासा तब हुआ जब ब्लास्ट के बाद छानबीन की गई। साइकिल के पास से ही पुलिस को साइकिल खरीद की पर्ची मिली थी। इसी के सहारे पुलिस रेती के साइकिल विक्रेता के पास तक पहुंची थी, फिर घटना की एक-एक परत खुलती चली गई।

15 मिनट में तीन विस्फोट से दहशत
पादरी बाजार के एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक वह बैग खरीदने गोलघर गए थे। शाम सात बजे पहला विस्फोट जलकल बिल्डिंग स्थित ट्रांसफार्मर के पास खड़ी साइकिल और उसमें रखे टिफिन में हुआ। इसमें दो लोग घायल हुए थे। पांच मिनट बाद बलदेव प्लाजा के पास स्थित पेट्रोल पंप और ठीक पांच मिनट बाद तीसरा विस्फोट गणेश होटल के पास हुआ। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या और कैसे हो रहा है।

बाटला हाउस एनकाउंटर में मारा गया था आतिफ मुख्तार

सीरियल ब्लास्ट में आजमगढ़ के आतंकी आतिफ मुख्तार उर्फ राजू और सैफ का नाम भी आया था। पुलिस ने आतिफ मुख्तार उर्फ राजू को पकड़ा भी था, लेकिन पूछताछ के बाद छोड़ दिया। एक साल बाद यानी 2008 में दिल्ली में बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ। तब पता चला कि आतिफ मुख्तार मारा गया है। तभी आतिफ के हूजी और आईएम से संबंधों का पता चला। बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान पकड़े गए आतंकियों में सैफ का नाम भी आया था। बाद में एटीएस ने उसे बढ़नी बार्डर से गिरफ्तार किया था। उस वक्त वह पाकिस्तान के करांची से विमान को हाइजैक करने की ट्रेनिंग लेकर नेपाल की सीमा से भारत में दाखिल हुआ था।

तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी कैंट विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि घटना शाम सात बजे हुई थी। तीन धमाकों की जानकारी मिली तो भागकर टीम के साथ पहुंच गए। हर तरफ अफरातफरी का माहौल था। सबको शांत कराया गया, फिर छानबीन शुरू हुई। विस्फोट वाले स्थल से ही साइकिल खरीद की एक पर्ची मिली थी। इसी के सहारे साइकिल विक्रेता तक पहुंचा गया, फिर एक-एक कड़ी खोलते गए। मास्टर माइंड तारिक कासमी ही था। जांच-पड़ताल से पता चला कि धमाकों में टिफिन बम का इस्तेमाल किया गया। पहली बार हूजी और आईएम आतंकियों की साठगांठ का पता चला था। पुलिस ने मजबूत साक्ष्य जुटाए और गवाहों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद कुछ गवाह मुकर गए। बहरहाल, आतंकी को उम्रकैद की सजा मिल गई है।
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