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मनीष हत्याकांड: रामगढ़ताल थाने पहुंची कानपुर से आई एसआईटी, मौत का कारण तलाशने के लिए हो रही जांच
Sun, 03 Oct 2021 04:59 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 03 Oct 2021 04:59 PM IST
सार
एसआईटी मनीष गुप्ता की मौत का कारण तलाशने के लिए हत्याकांड से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। साथ ही टीम द्वारा क्राइम ब्रांच पहुंचकर छानबीन की गई।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की पुलिस की पिटाई से मौत के मामले में कानपुर से आई एसआईटी टीम शनिवार को रामगढ़ताल थाने पहुंची। एसआईटी मनीष गुप्ता की मौत का कारण तलाशने के लिए हत्याकांड से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। इस दौरान रामगढ़ताल थाने में पुलिस की गाड़ी पर केमिकल डाला गया ताकि पता चले कि खून लगे थे कि नहीं। इसके बाद एसआईटी टीम द्वारा क्राइम ब्रांच पहुंचकर छानबीन की गई।
आरोपी इंस्पेक्टर के घर पहुंची गोरखपुर एसओजी
मनीष गुप्ता की हत्या के मुख्य आरोपी दरोगा जेएन सिंह की तलाश में गोरखपुर की एसओजी टीम अमेठी पहुंची है। थाना मुसाफिरखाना के कोतवाल से मिलने के बाद शनिवार देर रात टीम ने उसके घर छापेमारी की। इंस्पेक्टर के न मिलने पर टीम ने परिवारवालों से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया।
आरोपी दरोगा अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के अढनपुर के नारा गांव का निवासी बताया जा रहा है। शनिवार शाम मुसाफिरखाना कोतवाली पहुंची एसओजी गोरखपुर टीम ने प्रभारी निरीक्षक परशुराम ओझा से आरोपी दरोगा के संबंध में जानकारी हासिल की। इसके बाद देर रात उसके घर पर छापामारी हुई। हालांकि इस दौरान आरोपी कोतवाल घर पर नहीं मिला। इस संबंध में अमेठी पुलिस फिलहाल कुछ भी कहने से बच रही है। एसएचओ परसुराम ओझा ने बताया कि एसओजी गोरखपुर ने इंस्पेक्टेर के परिवार से पूछताछ की है।
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अपर पुलिस आयुक्त की अगुवाई में गठित है कमेटी
एसआईटी का नेतृत्व अपर पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश कर रहे हैं। इसके अलावा एडिशनल डीसीपी वेस्ट बृजेश कुमार श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर, फोरेंसिक टीम व अन्य पुलिस वालों के साथ आए हैं। इस केस का मुख्य विवेचक बृजेश कुमार श्रीवास्तव को बनाया गया है।
यह हुआ था
कानपुर के बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की सुबह आठ बजे गोरखपुर अपने दो दोस्तों हरवीर व प्रदीप के साथ घूमने आए थे। तीनों युवक तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। 27 सितंबर की रात ही रामगढ़ताल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, फलमंडी चौकी प्रभारी रहे अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस वाले आधी रात के बाद होटल में चेकिंग को पहुंच गए थे। कमरे की तलाशी लेने पर मनीष ने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि पुलिस वालों ने उनकी पिटाई कर दी थी जिससे उनकी मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस की ओर से नशे में गिरने से मौत बताया था मगर बाद में केस दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष के शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले। मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया, तब जाकर परिवार के लोग शव लेकर कानपुर रवाना हुए थे।
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आरोपी इंस्पेक्टर के घर पहुंची गोरखपुर एसओजी
मनीष गुप्ता की हत्या के मुख्य आरोपी दरोगा जेएन सिंह की तलाश में गोरखपुर की एसओजी टीम अमेठी पहुंची है। थाना मुसाफिरखाना के कोतवाल से मिलने के बाद शनिवार देर रात टीम ने उसके घर छापेमारी की। इंस्पेक्टर के न मिलने पर टीम ने परिवारवालों से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया।
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आरोपी दरोगा अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के अढनपुर के नारा गांव का निवासी बताया जा रहा है। शनिवार शाम मुसाफिरखाना कोतवाली पहुंची एसओजी गोरखपुर टीम ने प्रभारी निरीक्षक परशुराम ओझा से आरोपी दरोगा के संबंध में जानकारी हासिल की। इसके बाद देर रात उसके घर पर छापामारी हुई। हालांकि इस दौरान आरोपी कोतवाल घर पर नहीं मिला। इस संबंध में अमेठी पुलिस फिलहाल कुछ भी कहने से बच रही है। एसएचओ परसुराम ओझा ने बताया कि एसओजी गोरखपुर ने इंस्पेक्टेर के परिवार से पूछताछ की है।
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अपर पुलिस आयुक्त की अगुवाई में गठित है कमेटी
एसआईटी का नेतृत्व अपर पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश कर रहे हैं। इसके अलावा एडिशनल डीसीपी वेस्ट बृजेश कुमार श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर, फोरेंसिक टीम व अन्य पुलिस वालों के साथ आए हैं। इस केस का मुख्य विवेचक बृजेश कुमार श्रीवास्तव को बनाया गया है।
यह हुआ था
कानपुर के बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की सुबह आठ बजे गोरखपुर अपने दो दोस्तों हरवीर व प्रदीप के साथ घूमने आए थे। तीनों युवक तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। 27 सितंबर की रात ही रामगढ़ताल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, फलमंडी चौकी प्रभारी रहे अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस वाले आधी रात के बाद होटल में चेकिंग को पहुंच गए थे। कमरे की तलाशी लेने पर मनीष ने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि पुलिस वालों ने उनकी पिटाई कर दी थी जिससे उनकी मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस की ओर से नशे में गिरने से मौत बताया था मगर बाद में केस दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष के शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले। मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया, तब जाकर परिवार के लोग शव लेकर कानपुर रवाना हुए थे।